डायट आगरा में षष्ठम कला, क्राफ्ट और पपेट्री प्रतियोगिता 2025 का भव्य समापन | चयनित शिक्षक जाएंगे राज्य स्तर
डायट आगरा में कला, क्राफ्ट एवं पपेट्री प्रतियोगिता 2025 का सफल समापन। 87 में से 57 शिक्षकों ने भाग लिया। चयनित शिक्षक अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व करेंगे। जानें पूरी खबर विस्तार से।
डायट आगरा में कला, क्राफ्ट और पपेट्री प्रतियोगिता 2025 का भव्य समापन: रचनात्मकता और नवाचार से गूंजा कैंपस
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 16 सितंबर 2025
आगरा। शिक्षा केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मन, मस्तिष्क और भावनाओं को जोड़ने की प्रक्रिया है। इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में षष्ठम कला, क्राफ्ट एवं पपेट्री शिक्षक प्रतियोगिता 2025 का आयोजन किया गया, जिसने शिक्षण को कला और रचनात्मकता से जोड़ने का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।
कला और शिक्षण का संगम

कई बार शिक्षा को बच्चों तक पहुँचाना कठिन हो जाता है। ऐसे में कला और पपेट्री जैसे माध्यम शिक्षण को न केवल सरल बनाते हैं बल्कि उसमें मनोरंजन और सहभागिता भी जोड़ते हैं।
इस प्रतियोगिता में शिक्षकों ने यह दिखाया कि किस तरह क्राफ्ट, चार्ट्स, पपेट्स और मॉडल्स का प्रयोग करके गणित, विज्ञान, भाषा और सामाजिक विज्ञान जैसे कठिन विषय भी बच्चों के लिए आसान बनाए जा सकते हैं।
87 शिक्षकों का जोश, 57 की प्रत्यक्ष भागीदारी

प्रतियोगिता में बेसिक शिक्षा परिषद के 87 शिक्षकों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 57 शिक्षक प्रत्यक्ष रूप से डायट परिसर में उपस्थित रहे। हर प्रतिभागी को केवल एक घंटे का समय मिला, जिसमें उन्होंने Teaching Material Model (TMM) बनाकर प्रस्तुत किया।
यह दृश्य अपने आप में प्रेरणादायक था—किसी ने रंगीन पपेट्स बनाए, किसी ने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को कागज़ और चार्ट्स पर उतारा, तो किसी ने कहानियों और संवादों के माध्यम से विषय को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ और महत्व
कार्यक्रम का उद्घाटन उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य श्रीमती पुष्पा कुमारी ने किया। मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के बाद उन्होंने कहा –
- “कला और क्राफ्ट केवल शौक नहीं, बल्कि शिक्षा को रोचक और यादगार बनाने का सबसे प्रभावी तरीका हैं। शिक्षकों के प्रयास बच्चों के लिए सीखने को उत्सव जैसा अनुभव बना सकते हैं।”
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प्रतियोगिता का उद्देश्य और दृष्टिकोण
नोडल प्रभारी डॉ. डी.के. गुप्ता ने कहा –
- “यह प्रतियोगिता शिक्षकों में नवाचार की भावना जगाने और उनकी रचनात्मक क्षमता को सामने लाने के लिए आयोजित की गई है। भविष्य की शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसमें जीवन और वास्तविकता का स्पर्श होना चाहिए।”
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित शिक्षक

कड़े मुकाबले और बेहतरीन प्रस्तुतियों के बीच निर्णायकों ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए इन शिक्षकों को चुना:
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भाषा (प्राथमिक स्तर): बबीता वर्मा – कंपोजिट विद्यालय नगला तल्फ़ी, बरौली अहीर
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गणित (प्राथमिक स्तर): रश्मि गोस्वामी – कन्या विद्यालय सवाई, एत्मादपुर
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गणित (उच्च प्राथमिक स्तर): अर्जुन सिंह – उच्च प्राथमिक विद्यालय गोपालपुरा, जैतपुर कलां
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विज्ञान: भारती – उच्च प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला
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सामाजिक विज्ञान: उषा कुमारी – उच्च प्राथमिक विद्यालय नगला पाटन, शमशाबाद
इन शिक्षकों की प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि वे न केवल पढ़ाने में कुशल हैं बल्कि बच्चों तक विषय को सरल और मजेदार तरीके से पहुँचाने की अनोखी क्षमता भी रखते हैं।
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निर्णायकों की राय
निर्णायक मंडल में प्रो. मीना कुमारी (एच.ओ.डी., ड्राइंग एवं पेंटिंग विभाग, आगरा कॉलेज), डॉ. गौरव (सहायक प्रोफेसर, हिंदी विभाग, आरबीएस कॉलेज) और डॉ. अम्बरीश कुमार (वनस्पति विज्ञान विभाग, आरबीएस कॉलेज) शामिल रहे।
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प्रो. मीना कुमारी – “शिक्षकों की प्रस्तुतियों ने दिखाया कि शिक्षा में कला को जोड़ना बच्चों के लिए सीखने को प्रेरणादायक बना सकता है।”
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डॉ. गौरव – “कला और भाषा का जो तालमेल यहां देखने को मिला, वह दुर्लभ और अद्भुत है।”
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डॉ. अम्बरीश – “पपेट्री और क्राफ्ट कठिन विषयों को भी बच्चों की समझ के स्तर पर लाकर सरल बना सकते हैं।”
सम्मान और प्रोत्साहन

समापन अवसर पर निर्णायकों को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। चयनित शिक्षकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और बाकी सभी प्रतिभागियों को भागीदारी प्रमाण पत्र देकर उनकी मेहनत का सम्मान किया गया।
डायट आगरा का कैंपस तालियों से गूंज उठा जब चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
शिक्षा में नई राह

यह प्रतियोगिता केवल एक इवेंट नहीं थी, बल्कि इसने एक संदेश दिया—
- “अगर शिक्षा में कला और नवाचार को जोड़ा जाए तो बच्चे केवल पढ़ेंगे नहीं, बल्कि सीखने का आनंद भी लेंगे।”
यह पहल भविष्य की शिक्षा प्रणाली के लिए प्रेरणा बन सकती है।
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