पराधीनता सपने में भी सुख नहीं देती, शिवाजी महाराज ने इसे अस्वीकार किया — राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल

रिपोर्ट: एस. शेरवानी, ब्यूरो चीफ़ — हिंदी दैनिक समाचार

स्थान: आगरा | दिनांक: 6 अक्टूबर 2025

आगरा में “जाणता राजा महानाट्य” का तीसरा दिन: ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रभक्ति की अनमोल प्रस्तुति

आगरा की ऐतिहासिक भूमि पर सोमवार को आयोजित “जाणता राजा महानाट्य” के तीसरे दिन का सत्र केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह भारतीय अस्मिता, राष्ट्रभक्ति और शिवाजी महाराज की अमर विचारधारा का जीवंत संदेश था।
बारिश से प्रभावित इस सत्र में भी जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंच पर उपस्थित हर व्यक्ति के मन में शिवाजी महाराज के पराक्रम और उनके अदम्य आत्मविश्वास की झलक स्पष्ट दिख रही थी।

राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा — “पराधीनता सुख नहीं, स्वतंत्रता ही सर्वोच्च लक्ष्य”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री शिवप्रताप शुक्ल ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस प्रकार पराधीनता को अस्वीकार कर स्वराज की स्थापना की, वह आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा —

“पराधीनता सपने में भी सुख नहीं देती, यह वाक्य केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है। शिवाजी ने हमें यह सिखाया कि अपने स्वाभिमान और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हर संघर्ष आवश्यक है।”

राज्यपाल ने शिवाजी महाराज के आगरा किले से साहसी पलायन की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं, बल्कि भारतीय विचारधारा का सशक्त प्रतीक है।

“जब शिवाजी महाराज ने फल और मिठाई की टोकरी में बैठकर मुगल कैद से बाहर निकलने की योजना बनाई, तब उन्होंने यह संदेश दिया कि विवेक और साहस मिलकर असंभव को संभव बना सकते हैं।”

स्वयंसेवक जीवन: सेवा और संयम की मिसाल

राज्यपाल ने अपने संबोधन में स्वयंसेवक जीवन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि एक सच्चा स्वयंसेवक किसी भी परिस्थिति में राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा नहीं खोता।
उन्होंने कहा —

“राजनीतिक जीवन में ऊंच-नीच आती रहती है, लेकिन स्वयंसेवक का साहस और धैर्य ही उसकी पहचान है। अहंकार नहीं, सेवा और संयम ही राष्ट्र निर्माण की कुंजी है।”

राज्यपाल ने युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि कर्म और मूल्य ही असली पूंजी हैं।

FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR

वाणी संयम और संवैधानिक मर्यादा पर गहन चर्चा

श्री शुक्ल ने भारतीय संविधान की धारा 19(1) और 19(2) का उल्लेख करते हुए वाणी संयम पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन साथ ही जिम्मेदारी भी सौंपता है कि हम अपनी वाणी का उपयोग समाज में सौहार्द और एकता बढ़ाने के लिए करें।

“अटल बिहारी वाजपेयी जी इसका श्रेष्ठ उदाहरण थे। वे विपक्ष में रहकर भी विदेशों में भारत का गौरव बढ़ाते थे। हमें उनसे सीखना चाहिए कि मतभेद हो सकते हैं, पर देश सर्वोपरि रहना चाहिए।”

अनुच्छेद 370 और राष्ट्र की एकता पर राज्यपाल का दृष्टिकोण

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि अनुच्छेद 370 का हटना केवल एक संवैधानिक कदम नहीं, बल्कि “भारत माता के अंगों का पुनः एकीकरण” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुच्छेद संविधान का स्थायी हिस्सा नहीं था, बल्कि आदेश द्वारा जोड़ा गया प्रावधान था।

“आज भारत माता जीवंत रूप में हमारे सामने है। हमें जड़ता छोड़कर राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए संकल्पित होना चाहिए।”

https://hindidainiksamachar.com/samsung-galaxy-s26-ultra-release-date/

सेवा परमो धर्म: दिव्य प्रेम सेवा मिशन की सराहना

राज्यपाल ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन की सेवाओं को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं संसद में इस मिशन और इसके संस्थापक आशीष गौतम की सेवा भावना की प्रशंसा कर चुके हैं।

“सेवा देखनी हो तो आशीष गौतम से मिलिए। पत्ते पर भोजन से शुरू हुई यह यात्रा आज समाजसेवा की पराकाष्ठा बन चुकी है। बिना सरकारी सहायता के, केवल श्रद्धा और भावना से जो कार्य होता है, वही सच्ची सेवा है।”

राज्यपाल ने उपस्थित जनसमूह से कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और तपस्या है — “जो दूसरों के लिए जीता है, वही सच्चा स्वयंसेवक है।”

कार्यक्रम में रही कई गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति

इस ऐतिहासिक अवसर पर मंच पर दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक आशीष गौतम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हरीश रौतेला, भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला, डॉ. आर.पी.एन. सिंह, और पूर्व कुलपति डॉ. सुरेंद्र दुबे जैसी जानी-मानी हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
सभी ने एक स्वर में कहा कि शिवाजी महाराज की विचारधारा भारत के भविष्य की दिशा तय करती है।

राज्यपाल का समापन संदेश: “सेवा ही सबसे बड़ी तपस्या है”

अपने समापन भाषण में राज्यपाल ने कहा —

“सेवा से जुड़ना ही सच्चा जीवन है। स्वयंसेवक, शिक्षक, या समाजसेवी — जो भी व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से समाज के लिए कार्य करता है, वही शिवाजी की उस भावना को जीवित रखता है जिसने भारत को स्वतंत्रता की ओर अग्रसर किया।”

CHECK ALSO:

दीपावली से पहले आगरा में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, अस्वच्छ खोया नष्ट — मिलावटखोरों पर होगी सख्त कार्रवाई

अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 2025: आगरा के प्रधानाध्यापक मो. शमशाद आलम को मिला “शिक्षक रत्न सम्मान”

मिशन शक्ति 5.0: आगरा में महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण व जेंडर रिसोर्स सेंटर का शुभारम्भ

AGRA NEWS, LATEST AGRA NEWS, HINDI DAINIK SAMACHAR

Share.
Exit mobile version