आगरा: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान बैठक
आगरा में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान की बैठक सम्पन्न, जनजागरूकता व समन्वय पर जोर।
आगरा: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक सम्पन्न, संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान को मिली नई दिशा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 23 सितम्बर 2025।
आगरा जैसे ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले जिले में हर वर्ष बरसात के बाद संचारी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियाँ आम जनता के लिए चुनौती बन जाती हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति (शहरी एवं ग्रामीण) के साथ-साथ विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान पर गहन समीक्षा की गई।
अभियान की रूपरेखा: अक्टूबर माह होगा निर्णायक
बैठक में यह तय किया गया कि 01 से 31 अक्टूबर 2025 तक जिलेभर में विशेष संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान चलाया जाएगा।
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इस दौरान गांव-गांव और मोहल्लों तक स्वास्थ्य संदेश पहुँचाए जाएंगे।
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जनजागरूकता और जनसहभागिता को इस अभियान का मुख्य आधार बनाया गया है।
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जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि हर नागरिक को साफ-सफाई और बीमारियों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि जनता खुद जागरूक होगी तो किसी भी महामारी को फैलने से पहले ही रोका जा सकता है।
जिलाधिकारी के कड़े निर्देश

बैठक में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने स्पष्ट कहा कि अभियान केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि इसके परिणाम धरातल पर दिखने चाहिए।
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जलभराव को तुरंत खत्म करने का निर्देश दिया गया।
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फॉगिंग और एंटी-लार्वा एक्टिविटी नियमित और प्रभावी ढंग से कराई जाए।
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सभी विभाग – स्वास्थ्य, नगर विकास, पंचायती राज, शिक्षा, कृषि और पशुपालन – आपसी समन्वय से काम करें।
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ग्राम और ब्लॉक स्तर पर बैठकें आयोजित कर साफ-सफाई, शौचालय उपयोग और जल निकासी पर फोकस किया जाए।
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स्कूलों और कॉलेजों में होडिंग्स, पैम्फलेट्स और जागरूकता कैंप के जरिए अभियान को जनआंदोलन बनाया जाए।
उन्होंने चेतावनी भी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पिछले निर्देशों की समीक्षा और नाराजगी
जिलाधिकारी ने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालन आख्या तलब की।
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रिपोर्ट में बताया गया कि आगरा शहर के सभी वार्डों, हॉटस्पॉट्स और हाई-रिस्क क्षेत्रों में फॉगिंग, सफाई और जनजागरूकता का काम किया जा रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया गया है।
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हालांकि, कुछ जगहों पर कार्य संतोषजनक न होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि “आगरा डेंगू और मलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील जिला है। यहां किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
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स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी पर जोर
बैठक में यह भी तय हुआ कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
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सभी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं और मच्छर रोधी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा जाएगा।
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निगरानी टीमों को प्रत्येक क्षेत्र का सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बाध्य किया जाएगा।
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सीएमओ और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि हर गतिविधि का रिकॉर्ड पारदर्शी तरीके से रखा जाए।
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विभागीय समन्वय: सफलता की कुंजी
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि यह अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रहेगा।
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पंचायती राज विभाग गांवों में सफाई और शौचालय की स्थिति पर नजर रखे।
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शिक्षा विभाग स्कूलों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को संदेश दे।
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कृषि और पशुपालन विभाग ग्रामीण इलाकों में किसान और पशुपालकों को रोग नियंत्रण के महत्व से अवगत कराएं।
उन्होंने कहा कि “जब हर विभाग मिलकर काम करेगा तभी संचारी रोगों की जड़ पर प्रहार किया जा सकेगा।”
बैठक में मौजूद अधिकारी

इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:
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सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव
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डॉ. संजीव वर्मन
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डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति
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डॉ. अमित रावत
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डीपीएम कुलदीप भारद्वाज
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जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता
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जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सिंह
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पीओ नगरीय टीकाकरण नितिन खन्ना
इन अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी साझा की और सुधार के सुझाव भी दिए।
निष्कर्ष
आगरा जैसे बड़े जिले में संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि जनजीवन से जुड़ी आवश्यकता है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी के नेतृत्व में आयोजित यह बैठक साफ संदेश देती है कि प्रशासन इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
अगर यह अभियान सही दिशा में चला तो न सिर्फ डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों पर नियंत्रण होगा बल्कि जनता का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास भी और मजबूत होगा।
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