Agra Breaking: रंगांजलि महोत्सव 2025: DIET आगरा में लोक कला–संस्कृति की भव्य प्रदर्शनी का सफल समापन
DIET आगरा में आयोजित दो दिवसीय रंगांजलि महोत्सव ग्रामीण लोक कला, सांझी कला, शिक्षकों की सृजनशीलता और 70 चयनित कलाकृतियों के साथ संपन्न। गेरू सजी गलियों और सांस्कृतिक थीम ने मन मोह लिया।

लोक कला की सुगंध से महका “रंगांजलि महोत्सव” — DIET आगरा में लोक कला, संस्कृति और शिक्षा का अद्भुत संगम
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 13 नवम्बर 2025
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) आगरा का परिसर 12 नवम्बर 2025 की शाम एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। लोक कला, सांस्कृतिक परंपराएँ, मिट्टी की सुगंध, गेरू की लकीरें, सांझी कला की अद्भुत छाप और शिक्षकों की सृजनशीलता—इन सभी ने मिलकर “रंगांजलि कला–क्राफ्ट–संस्कृति महोत्सव” के इस दो दिवसीय आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
यह महोत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि शिक्षा और भारतीय लोक संस्कृति के मिलन का एक ऐसा मंच बना जिसने दिखाया कि शिक्षक जब अपने भीतर छिपी कला को मंच देते हैं, तो वह किसी कलाकार से कम नहीं।
गाँव की गलियों का अनुभव—गेरू, सौंधी मिट्टी, सांझी कला की भव्यता
महोत्सव स्थल की थीम इस बार “लोक कला की महक” पर आधारित रही।
डायट परिसर को इस तरह सजाया गया कि वह ग्रामीण जीवन की वास्तविक झलक पेश करे—
● प्रवेश मार्ग पर गेरू की पारंपरिक पुताई
जिसे देखकर ऐसा लगा मानो आगंतुक किसी गाँव की चौपाल में प्रवेश कर रहे हों।
● दीवारों पर मथुरा–आगरा की सांझी कला
क्षेपांकन पद्धति से उकेरे गए डिजाइन लोगों को पुरानी परंपराओं और त्यौहारों की याद दिला रहे थे।
● प्राकृतिक रंगों की खुशबू
फूलों के रंग, मिट्टी के शेड्स, गेरू और चूने की आकृतियाँ भारतीय सौंदर्य का जीवंत उदाहरण बनीं।
● पूरे परिसर में लोकगीतों की धीमी धुन
एक आध्यात्मिक, शांत और सांस्कृतिक माहौल बनाया गया।
आगंतुकों ने प्रवेश करते ही महसूस किया—
“यह सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तर भारत की संस्कृति का पुनर्जीवन है।”
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82 आवेदन, 70 शिक्षक—कला और कल्पना का अद्भुत संसार

इस बार कला–क्राफ्ट प्रतियोगिता के लिए कुल 82 शिक्षकों ने आवेदन किया था।
इनमें से 70 उत्कृष्ट कलाकृतियों को प्रदर्शनी में स्थान मिला।
शिक्षकों ने ऐसी विविध और अनोखी कला प्रस्तुत की कि हर गैलरी में रुककर लोग निहारते रह गए—
✓ प्राकृतिक रंगों से बनी लोकचित्र पेंटिंग
✓ ग्रामीण जीवन की झाँकियाँ
✓ हस्तनिर्मित क्राफ्ट आइटम
✓ शैक्षणिक मॉडल
✓ नवाचार आधारित टीचिंग–लर्निंग मैटेरियल
✓ परंपरागत दीवार चित्रकला
✓ मिट्टी, लकड़ी और फेब्रिक आधारित कलाकृतियाँ
कई शिक्षक तो पहली बार अपनी कला सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर रहे थे और उनके चेहरों पर उत्साह, गर्व और भावनात्मक खुशी साफ झलक रही थी।
“शिक्षक समाज और संस्कृति के संवाहक हैं”—उप शिक्षा निदेशक पुष्पा कुमारी
समापन समारोह में उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य श्रीमती पुष्पा कुमारी ने बड़े भावपूर्ण शब्दों में कहा—
“हमारे शिक्षक केवल किताबों के ज्ञान के वाहक नहीं हैं, बल्कि यह समाज की कला, संस्कृति, संवेदना और परंपराओं के भी संरक्षक हैं। रंगांजलि ने यह सिद्ध कर दिया कि कला शिक्षा को अधिक जीवंत और आनंदमय बनाती है। यह आयोजन आने वाले वर्षों में शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणा बनेगा।”
उनके वक्तव्य ने पूरे माहौल में भावनात्मक ऊर्जा भर दी।
कई शिक्षक भावुक होकर बोले—“हमारी कला को पहली बार ऐसा मंच मिला।”
“यहाँ आगरा की मिट्टी की महक है”—नोडल प्रभारी डॉ. डी. के. गुप्ता
महोत्सव के नोडल प्रभारी, डायट प्रवक्ता डॉ. डी. के. गुप्ता ने बताया—
“यह आयोजन केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि आगरा की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। हमने परिसर को गाँव की गलियों जैसा बनाया। सांझी कला के डिजाइन इस तरह उकेरे गए कि हर दर्शक बोले—‘यह तो हमारे आगरा–मथुरा की असल पहचान है।’ दो दिनों की गतिविधियों ने शिक्षकों में नई संवेदना और आत्मविश्वास पैदा किया है।”
उनके शब्दों में स्थानीय संस्कृति के प्रति गहरी भावनात्मक जुड़ाव झलक रहा था।
शिक्षकों के अनुभव—“ऐसा आयोजन पहली बार देखा”
शिक्षकों ने मंच पर आकर अपने अनुभव साझा किए।
कुछ प्रमुख बातें—
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“हम अपनी कला को सिर्फ घर तक सीमित रखते थे, इस मंच ने हमारी पहचान बनाई।”
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“हमने जाना कि कला भी शिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
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“यह आयोजन नई सोच, नया आत्मविश्वास और नई ऊर्जा लेकर आया है।”
कई शिक्षक अपनी कलाकृतियाँ हाथ में लेकर मंच पर आए और गर्व से उन्हें दर्शाया।
दर्शकों ने हर एक रचना पर तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया।
सम्मान समारोह—हर कलाकार शिक्षक को मिला प्रमाणपत्र

समापन सत्र में उप शिक्षा निदेशक प्रभारी श्रीमती पुष्पा कुमारी द्वारा सभी चयनित व प्रतिभागी शिक्षकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
शिक्षकों की मेहनत, लगन और सांस्कृतिक योगदान का सम्मान किया गया।
सम्मान प्राप्त करते समय कई शिक्षकों की आँखों में खुशी के आँसू थे।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख प्रशिक्षु और शिक्षक
डॉ. मनोज वार्ष्णेय, यशवीर सिंह, अनिल कुमार, पुष्पेंद्र सिंह, यशपाल सिंह, हिमांशु सिंह, अबू मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र गौतम, लक्ष्मी शर्मा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, रंजना पांडे, रचना यादव, कल्पना सिन्हा, मुकेश सिन्हा, लाल बहादुर, तिलक जंग, आकांक्षा लवानिया, गौरव भार्गव, अमित दीक्षित सहित अनेक प्रतिभागी उपस्थित रहे।
उनकी सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को और अधिक जीवंत एवं सफल बनाया।
कार्यक्रम का समापन—सामूहिक प्रस्तुति, अनुभव साझा और आभार ज्ञापन
महोत्सव का समापन शिक्षकों की सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ।
कार्यक्रम संचालक मंडल ने सभी आगंतुकों, प्रतिभागियों, प्रशिक्षुओं और आयोजकों के प्रति आभार प्रकट किया।
रंगांजलि महोत्सव 2025 ने यह साबित किया कि शिक्षा और संस्कृति जब एक साथ आती हैं, तो एक अद्भुत और प्रेरणादायक वातावरण तैयार होता है।
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