आगरा में माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का प्रशिक्षण शुरू, नेतृत्व और मानसिक स्वास्थ्य पर हुई चर्चा
डीआईईटी में प्रशिक्षण के प्रथम चरण का शुभारंभ, विद्यालय प्रशासन, नेतृत्व क्षमता और कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपायों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी), आगरा में राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के प्रशिक्षण का प्रथम चरण शुरू हो गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह एवं ललित मोहन पाल ने मां शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
इस अवसर पर सेवारत सह प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सरस्वती वंदना एवं अभियान गीत के साथ प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत की। कार्यक्रम में प्रधानाचार्यों की भूमिका, विद्यालय प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
समूह चर्चा और प्रस्तुतीकरण से समझा माध्यमिक शिक्षा का परिदृश्य
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में संदर्भदाता डॉ. रचना चौहान ने ‘माध्यमिक शिक्षा का परिदृश्य एवं प्रधानाचार्य की संकल्पना’ विषय पर सत्र संचालित किया। उन्होंने समूह चर्चा और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रधानाचार्य की भूमिका तथा माध्यमिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों के विचार साझा कराए।
द्वितीय सत्र में संदर्भदाता लक्ष्मी शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र में इसे बेहतर बनाए रखने के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय के सकारात्मक वातावरण और बेहतर कार्यक्षमता के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
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प्रशासक के साथ नेतृत्वकर्ता की भूमिका भी निभाते हैं प्रधानाचार्य
तृतीय सत्र में नोडल प्रभारी रचना यादव ने प्रधानाचार्य की प्रशासक एवं नेतृत्वकर्ता के रूप में भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने इस जिम्मेदारी के विभिन्न आयामों को समझाते हुए विद्यालय संचालन में नेतृत्व क्षमता के महत्व को रेखांकित किया।
चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में संदर्भदाता एस.बी. आरती ने मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डाला। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उपायों की जानकारी देकर प्रतिभागियों को लाभान्वित किया।
प्रशिक्षण में मिली सीख को विद्यालयों में लागू करने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह और ललित मोहन पाल ने कहा कि प्रशिक्षण से हमेशा कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी और अनुभवों को प्रधानाचार्यों को अपने विद्यालयों में लागू करना चाहिए, ताकि विद्यार्थी भी इनसे लाभान्वित हो सकें।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सकारात्मक वातावरण विकसित करने के लिए प्रधानाचार्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में नई जानकारी और दृष्टिकोण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया। इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रंजना पांडे, यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, संजीव कुमार सत्यार्थी, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित संस्थान के समस्त स्टाफ का सहयोग रहा।

