विश्व पर्यावरण दिवस पर डायट आगरा में हरियाली का महाअभियान, 20 से अधिक पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण, पक्षियों के लिए बनाए गए जलपात्र और आश्रय स्थल, प्रशिक्षुओं ने दिया हरित भविष्य का संदेश
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 05-06-2026
आगरा।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा तथा राजकीय शिशु प्रशिक्षण महिला महाविद्यालय आगरा में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्रकृति के प्रति जागरूकता को समर्पित भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पौधारोपण, पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों, पक्षी संरक्षण अभियान और हरित भविष्य के संकल्प के साथ पूरे उत्साह और प्रतिबद्धता से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं था, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के महत्व से जोड़ना भी था। इस अवसर पर शिक्षकों, प्रशिक्षुओं और कर्मचारियों ने मिलकर हरित वातावरण के निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लिया।
बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच दिया जागरूकता का संदेश

आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, वायु प्रदूषण, जल संकट और जैव विविधता में कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि मानवता को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने का अवसर बन गया है।
डायट आगरा में आयोजित कार्यक्रम में इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिक्षकों और प्रशिक्षुओं ने बताया कि यदि अभी से पर्यावरण के प्रति गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर प्राकृतिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत हुआ पौधारोपण

उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य अनिरुद्ध यादव के मार्गदर्शन में संस्थान परिसर में 20 से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान छायादार, फलदार और पर्यावरण संरक्षण में सहायक विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।
पौधारोपण के दौरान प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि प्रकृति और मातृत्व के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना है।
उन्होंने कहा—
“जिस प्रकार मां हमें जीवन देती है, उसी प्रकार वृक्ष पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने का कार्य करते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो देश में हरियाली का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पौधों की सुरक्षा के लिए किए गए विशेष प्रबंध
अक्सर देखा जाता है कि पौधारोपण के बाद पौधों का उचित संरक्षण नहीं हो पाता, जिसके कारण उनका विकास रुक जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए डायट परिसर में लगाए गए सभी पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाए गए।
प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि पौधे लगाना पहला कदम है, लेकिन उनका संरक्षण करना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। संस्थान द्वारा नियमित रूप से इन पौधों की देखभाल सुनिश्चित की जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में ये पौधे विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण को लाभ पहुंचा सकें।
जन्मदिन पर पौधा लगाने का दिया प्रेरणादायक संदेश
कार्यक्रम के दौरान प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा—
“यदि देश का प्रत्येक नागरिक अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी विशेष अवसर पर एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो हर वर्ष करोड़ों नए वृक्ष तैयार किए जा सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपील की कि वे अपने परिवार और समाज को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें।
पक्षियों के संरक्षण के लिए अनूठी पहल
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजकीय शिशु प्रशिक्षण महिला महाविद्यालय आगरा में भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कई रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं।
प्रशिक्षु छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण विषय पर आकर्षक पोस्टर और चार्ट तैयार किए। साथ ही पौधारोपण अभियान में भाग लेकर हरित वातावरण के निर्माण का संदेश दिया।
इस दौरान उप शिक्षा निदेशक एवं डायट प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किए गए विशेष पक्षी जलपात्र और आश्रय स्थलों को पेड़ों पर स्थापित किया।
विशेष बात यह रही कि ये जलपात्र और पक्षी घर पूरी तरह पुनर्चक्रण योग्य सामग्री जैसे—
- नारियल के खोल
- प्लास्टिक की बोतलें
- अनुपयोगी घरेलू सामग्री
से तैयार किए गए थे।
इनका उद्देश्य भीषण गर्मी के दौरान पक्षियों को पानी और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना था।
पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता का दिया संदेश
विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार बढ़ते तापमान और शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास तेजी से कम हो रहे हैं। ऐसे में उनके लिए पानी और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बन जाती है।
प्रशिक्षुओं ने बताया कि इस पहल ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जीव-जंतुओं और पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी।
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प्रशिक्षुओं ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रशिक्षुओं ने यह संकल्प लिया कि वे—
- प्रत्येक वर्ष पौधारोपण करेंगे
- लगाए गए पौधों की देखभाल करेंगे
- जल संरक्षण को बढ़ावा देंगे
- प्लास्टिक के उपयोग को कम करेंगे
- पक्षियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण में योगदान देंगे
- अपने आसपास के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे
पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने में डायट की महत्वपूर्ण भूमिका
डायट आगरा द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक दिवस का आयोजन नहीं बल्कि पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक रूप देने का प्रयास भी था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में पर्यावरण संरक्षण को इस प्रकार व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो भविष्य के शिक्षक लाखों बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी और प्रशिक्षु रहे उपस्थित
कार्यक्रम में इको क्लब प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह, संजीव कुमार सत्यार्थी, यशवीर सिंह, रंजना पांडे, कल्पना सिन्हा, यशपाल सिंह, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, अबु मुहम्मद आसिफ, हिमांशु सिंह, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, खंड शिक्षा अधिकारी जगत सिंह राजपूत, जिला समन्वयक कुलदीप तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, प्रशिक्षु एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
वहीं राजकीय शिशु प्रशिक्षण महिला महाविद्यालय के कार्यक्रम में एस.बी. आरती, सनत कुमार आर्य, ऋचा पंडित और सोहन लाल दीक्षित ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
हरित भविष्य की ओर एक सार्थक कदम
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। पौधारोपण, पक्षी संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता जैसी गतिविधियां समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डायट आगरा और राजकीय शिशु प्रशिक्षण महिला महाविद्यालय की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में भी प्रेरणादायक कदम साबित हो रही है।


