कला समेकन से रोचक बनेगी पढ़ाई, डायट आगरा में तीन दिवसीय ‘आर्ट इंटीग्रेशन इन टीचिंग एंड लर्निंग’ कार्यशाला का शुभारंभ
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 02-06-2026
नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षण को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और विद्यार्थियों के लिए आनंददायक बनाने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। डायट आगरा में प्राचार्य अनिरुद्ध यादव के निर्देशन तथा दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) आगरा के सहयोग से तीन दिवसीय “आर्ट इंटीग्रेशन इन टीचिंग एंड लर्निंग” कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को ऐसी नवाचारी शिक्षण विधियों से परिचित कराना है, जिनके माध्यम से कठिन विषयों को भी रोचक, सरल और बच्चों की समझ के अनुरूप बनाया जा सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य डायट आगरा अनिरुद्ध यादव तथा दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की शिक्षा संकाय की विशेषज्ञ डॉ. मनु शर्मा द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
शिक्षा में कला का समावेश बच्चों को बनाता है रचनात्मक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि वर्तमान समय में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बच्चों को विषयों से जोड़ने और सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाने के लिए कला आधारित शिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि कला समेकन (Art Integration) शिक्षण प्रक्रिया को जीवंत बनाता है और बच्चों की कल्पनाशीलता, रचनात्मकता तथा तार्किक क्षमता को विकसित करता है।
उन्होंने बताया कि जब किसी विषय को गीत, चित्र, नाटक, पपेट शो या अन्य रचनात्मक माध्यमों से पढ़ाया जाता है, तो विद्यार्थी उसे अधिक समय तक याद रखते हैं और विषय के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ती है।
गीतों के माध्यम से सीखने की नई विधा
कार्यशाला के प्रथम सत्र का संचालन दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की डॉ. मनु शर्मा ने किया।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को संगीत के माध्यम से विभिन्न विषयों के अध्यापन की तकनीक सिखाई। इस दौरान बताया गया कि गणित, पर्यावरण अध्ययन, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को भी गीतों के माध्यम से रोचक बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षुओं ने “कैसे बने घर”, “समय”, “जानवरों के अनुकूलन” जैसे विषयों पर आधारित गीतों का सामूहिक गायन किया और अनुभव किया कि संगीत आधारित शिक्षण बच्चों के लिए कितना प्रभावी हो सकता है।
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पपेट शो ने बढ़ाया सीखने का उत्साह

कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रशिक्षुओं को पपेट शो (कठपुतली कला) के माध्यम से कहानी चित्रण और शिक्षण की विधियां सिखाई गईं।
इस दौरान प्रशिक्षुओं को शैडो पपेट, फिंगर पपेट और स्टिक पपेट का उपयोग कर विषयों को रोचक बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
विशेष बात यह रही कि सभी प्रशिक्षुओं को 10 अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया, जिनके नाम कला के दीवाने, न्यू टैलेंट, क्रिएटिव फ्रेंड्स, आर्टिस्टिक एंजेल, यूनिकॉर्न, वसुंधरा आर्ट सर्कल, क्रिएटिव सोल, धमाका और कला प्रेमी जैसे रचनात्मक नामों पर रखे गए।
सभी समूहों ने स्वयं पपेट शो तैयार कर विभिन्न विषयों की प्रस्तुति दी और व्यावहारिक रूप से इस विधा को सीखा।
बच्चों में विकसित होंगे अनेक महत्वपूर्ण कौशल
प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि शिक्षक इन कलात्मक विधियों को अपनी कक्षा में लागू करें तो विद्यार्थी विषयों के प्रति अधिक आकर्षित होंगे।
उन्होंने कहा कि कला आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों में:
- तार्किक चिंतन क्षमता विकसित होती है
- भाषा अभिव्यक्ति बेहतर होती है
- आत्मविश्वास बढ़ता है
- भावनात्मक प्रबंधन कौशल विकसित होता है
- रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति का विस्तार होता है
- जटिल विषयों को समझना आसान हो जाता है
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को इन विधियों का निरंतर अभ्यास करना चाहिए ताकि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर जीवनोपयोगी बन सके।
नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि कला समेकन आधारित शिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।
यह शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों को केवल रटने के बजाय समझकर सीखने, सृजनात्मक सोच विकसित करने और अनुभवात्मक शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।
डायट आगरा में आयोजित यह कार्यशाला भविष्य के शिक्षकों को आधुनिक और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रशिक्षुओं ने दिखाई उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने गीत, कला, अभिनय और पपेट शो के माध्यम से सीखने की नई तकनीकों को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई।
प्रशिक्षुओं का कहना था कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल बच्चों को आकर्षित करेंगी बल्कि शिक्षकों के लिए भी शिक्षण को अधिक प्रभावी और आनंददायक बनाएंगी।
कार्यक्रम में रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की संयोजिका एवं समन्वयक डॉ. प्रज्ञा शर्मा और लक्ष्मी शर्मा रहीं।
इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशपाल सिंह, हिमांशु सिंह, कल्पना सिन्हा, रंजना पांडे, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, डॉ. डी.के. गुप्ता, अबु मुहम्मद आसिफ, संजीव कुमार सत्यार्थी, पुष्पेंद्र सिंह सहित संस्थान के अनेक शिक्षक एवं प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
डायट आगरा में आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यशाला इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रही। कला, संगीत, नाटक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आनंददायक बनाया जा सकता है।
“कला समेकन केवल शिक्षण की तकनीक नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है।” यही संदेश इस कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षुओं और शिक्षकों को दिया गया।


