भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडलीय बैठक सम्पन्न, शिक्षा में भारतीय संस्कृति और वैदिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान
डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा में भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडलीय बैठक सम्पन्न हुई। चेयरमैन डॉ. एन.पी. सिंह और मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा और संस्कार आधारित आधुनिक शिक्षा पर बल दिया।

भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडलीय बैठक डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में सम्पन्न — भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा को अपनाने का संकल्प
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) |
आगरा | 27 अक्टूबर 2025
आगरा।
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के जे.पी. ऑडिटोरियम में रविवार को भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडलीय बैठक उत्साह और वैदिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एन.पी. सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह (आईएएस) मुख्य अतिथि और ऐश्वर्या जायसवाल (ए.डी. बेसिक) विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिससे पूरा सभागार भारतीय परंपरा की पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।
“भारतीय शिक्षा बोर्ड” – नई पीढ़ी को भारतीयता से जोड़ने का मिशन
गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. एन.पी. सिंह, चेयरमैन, भारतीय शिक्षा बोर्ड ने कहा कि भारत में आज की शिक्षा प्रणाली पश्चिमी प्रभाव से इतनी अधिक प्रभावित हो चुकी है कि संस्कार, आचरण, अध्यात्म और संस्कृति जैसे शब्द धीरे-धीरे पुस्तकों से गायब होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि —
“आधुनिक शिक्षा हमें तकनीकी रूप से सक्षम तो बना रही है, लेकिन मानवीय दृष्टि से कमजोर कर रही है। आज जरूरत है शिक्षा में भारतीयता और अध्यात्म का समावेश करने की।”
डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य केवल बच्चों को डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें चरित्रवान, संस्कारित और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को वेद, उपनिषद, गीता, पुराणों की शिक्षाओं के साथ-साथ कंप्यूटर साइंस, गणित, विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा का संतुलित ज्ञान दिया जाएगा।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि वर्तमान में शिक्षा का केंद्र “रोजगार” तक सीमित हो गया है जबकि वास्तविक शिक्षा वह है जो विचार, आचरण और आस्था में परिवर्तन लाए। उन्होंने उपस्थित प्रबंधकों, प्राचार्यों और प्रतिनिधियों से कहा कि —
“यदि भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना है, तो हमें भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़कर अपने विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा लागू करनी होगी।”
“संस्कार और शिक्षा – एक ही सिक्के के दो पहलू” : मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह

मुख्य अतिथि मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह (आईएएस) ने अपने प्रेरक सम्बोधन में कहा कि एक बच्चे के भविष्य निर्माण में शिक्षक और माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अंकों या डिग्रियों का खेल नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण की प्रक्रिया है।
“बच्चों को संस्कार देने का काम किसी पाठ्यक्रम का नहीं, बल्कि समाज और परिवार के सामूहिक प्रयास का है। अगर बच्चे में अनुशासन, दया, देशप्रेम और ईमानदारी नहीं है तो वह शिक्षा अधूरी है।”
मंडलायुक्त ने कहा कि हमें आज की चकाचौंध भरी शिक्षा प्रणाली के बजाय अपने प्राचीन वैदिक शिक्षा मॉडल को अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें “गुरु-शिष्य परंपरा”, “आत्मसंयम”, “सेवा भाव” और “नैतिक आचरण” पर बल दिया जाता था।
उन्होंने विद्यालय संचालकों से अपील की कि वे अपने स्कूलों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध करें ताकि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और संस्कार निर्माण बन सके।
कार्यक्रम का संचालन और पतंजलि परिवार का सहयोग

कार्यक्रम का संचालन सुनील शास्त्री, राज्य प्रभारी भारत स्वाभिमान ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए यह अभियान मात्र एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि आध्यात्मिक पुनर्जागरण का आंदोलन है।
इस अवसर पर पतंजलि परिवार से कई वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे —
विपिन (राज्य प्रभारी), दयाशंकर आर्य (राज्य प्रभारी, पतंजलि किसान सेवा समिति), रविकर आर्य (संभल प्रभारी), डा. शिवनंदन (समन्वयक), सुशील गुप्ता, स्वामी रामानंद सहित अनेक शिक्षाविदों ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की पहल का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, स्वदेशी ज्ञान और पर्यावरण चेतना को शिक्षा में शामिल करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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250 से अधिक विद्यालयों ने जताई सहमति – “भारतीयता ही भविष्य की दिशा”
इस मंडलीय बैठक में आगरा मंडल के 250 से अधिक विद्यालयों के प्रबंधक, प्राचार्य और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभी ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की विचारधारा से सहमति व्यक्त करते हुए इसे विद्यालय स्तर पर लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में भारतीय शिक्षा बोर्ड देशभर में भारतीय संस्कृति आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देगा, जिसमें
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वेदिक गणित,
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संस्कृत संवाद कौशल,
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प्रकृति विज्ञान,
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योग और ध्यान,
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चरित्र निर्माण शिक्षा,
को प्रमुखता दी जाएगी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और संकल्प के साथ

गोष्ठी के अंत में सभी उपस्थित जनों ने राष्ट्रगान के साथ “संस्कारयुक्त शिक्षा से सशक्त भारत निर्माण” का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन वातावरण में उमंग और गर्व की भावना के साथ हुआ, जहां सभी ने एक स्वर में कहा —
“भारत की आत्मा उसकी शिक्षा में बसती है, और अब समय आ गया है कि शिक्षा फिर से भारतीय बने।”
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मुख्य निष्कर्ष
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भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडलीय बैठक डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुई।
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चेयरमैन डॉ. एन.पी. सिंह ने शिक्षा में भारतीय संस्कृति, वेद और उपनिषद आधारित मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
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मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण को शिक्षा का आधार बताया।
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पतंजलि परिवार और भारत स्वाभिमान के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
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250 से अधिक विद्यालयों ने भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़ने की प्रतिबद्धता जताई।
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