विश्व खाद्य दिवस 2025: आगरा के कंपोजिट विद्यालय में बच्चों ने सीखा संतुलित आहार और पोषण का महत्व | World Food Day Agra News
आगरा के खंदौली ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय मुढ़ी जहाँगीरपुर में विश्व खाद्य दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों ने संतुलित भोजन, पोषण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझा और समाज को जागरूक किया।

आगरा के कंपोजिट विद्यालय में विश्व खाद्य दिवस पर विशेष कार्यक्रम — बच्चों ने सीखा ‘संतुलित आहार’ का महत्व, पौष्टिक भोजन के प्रति बढ़ी जागरूकता
रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा/खंदौली, 16 अक्टूबर 2025
विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) के अवसर पर ताज नगरी आगरा के कंपोजिट विद्यालय मुढ़ी जहाँगीरपुर, ब्लॉक खंदौली में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष शिक्षात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में संतुलित आहार, सही पोषण और स्वच्छ जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना था ताकि वे भविष्य में स्वस्थ नागरिक बन सकें।
संतुलित भोजन पर हुई चर्चा, बच्चों ने जाना “पोषण का असली अर्थ”
विद्यालय के इ.प्र० अध्यापक अरुण कुमार ने बच्चों को बताया कि “संतुलित भोजन” का मतलब केवल पेट भरना नहीं, बल्कि ऐसा आहार लेना है जिसमें शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलें —
जैसे कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा के लिए, प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण के लिए, विटामिन व खनिज शरीर की सुरक्षा के लिए और रेशेदार पदार्थ पाचन के लिए आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा,
“यदि हम प्रतिदिन पौष्टिक भोजन लें, स्वच्छ जल पिएं और स्वच्छता बनाए रखें तो बीमारियाँ हमसे दूर रहेंगी। बच्चे देश का भविष्य हैं, और उन्हें मजबूत बनाने के लिए पोषण सबसे बड़ी कुंजी है।”
अरुण कुमार ने यह भी बताया कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal) को इसी उद्देश्य से चलाया जा रहा है ताकि हर बच्चे को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन प्राप्त हो सके।
बच्चों ने रचनात्मकता से दी सीख — पोस्टर प्रतियोगिता और वृक्षारोपण

कार्यक्रम में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
उन्होंने अपने चित्रों में “स्वस्थ भोजन, स्वस्थ जीवन”, “हरी सब्जियाँ खाओ, तंदरुस्त बनो” और “भोजन बर्बाद न करो” जैसे संदेश दिए।
इन रंग-बिरंगे पोस्टरों ने विद्यालय का वातावरण जीवंत बना दिया और संदेश दिया कि भोजन केवल पेट भरने का नहीं, बल्कि जीवन जीने का साधन है।
साथ ही विद्यार्थियों ने वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों ने कहा कि पौधों से हमें शुद्ध वायु मिलती है, और हर पौधा हमारे स्वास्थ्य के लिए एक नई साँस है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने की बच्चों की हेल्थ जांच

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम भी विद्यालय पहुंची।
टीम ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण (Health Check-up) किया और उन्हें पोषण व व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी उपयोगी जानकारियाँ दीं।
बच्चों को बताया गया कि भोजन में लोहे, कैल्शियम और प्रोटीन की कमी से शरीर कमजोर पड़ सकता है, इसलिए उन्हें अपने दैनिक आहार में दूध, हरी सब्जियाँ, दालें और फल अवश्य शामिल करने चाहिए।
शिक्षकों ने बच्चों को दी जीवनोपयोगी शिक्षा
सहायक अध्यापिका श्रीमती प्रेमलता शर्मा ने बच्चों को बताया कि —
“हमारे शरीर की वृद्धि, रक्षा और विकास सभी संतुलित आहार पर निर्भर करते हैं। हमें हमेशा घर का ताज़ा, पौष्टिक और स्वच्छ भोजन करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि आज के बच्चों में फास्ट फूड की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए उन्हें जंक फूड से दूर रहकर देशी भोजन अपनाना चाहिए।
जन-जागरूकता रैली से दी समाज को प्रेरणा
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के बच्चों ने अपने शिक्षकों के साथ एक जन-जागरूकता रैली निकाली।
इस रैली में बच्चों ने हाथों में तख्तियाँ लेकर नारे लगाए —
“संतुलित आहार अपनाओ, स्वस्थ भारत बनाओ!”
“भोजन बर्बाद मत करो, भूखों को भोजन दो!”
यह रैली पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी और स्थानीय लोगों को संतुलित आहार के महत्व का संदेश दिया।
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माताओं को किया जागरूक — “बच्चों को दें स्वच्छ और पौष्टिक भोजन”

विद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों की माताओं को भी आमंत्रित किया।
उन्हें समझाया गया कि घर पर तैयार भोजन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सबसे सुरक्षित और लाभदायक होता है।
माताओं ने भी संकल्प लिया कि वे अपने बच्चों को स्वच्छ और संतुलित भोजन ही खिलाएँगी।
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विद्यालय परिवार की सक्रिय भूमिका
इस कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के समस्त स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई —
संजय कुमार, श्याम बाबू, रेनू शर्मा, नीलम, मनोज, मोहन देवी, आकांक्षा सहित सभी शिक्षकों ने बच्चों को प्रेरित किया और आयोजन को सफल बनाया।
निष्कर्ष
यह आयोजन केवल एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत थी —
जहाँ बच्चों ने “भोजन, पोषण और पर्यावरण” के गहरे संबंध को समझा।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि —
“संतुलित आहार से ही स्वस्थ जीवन संभव है, और स्वस्थ बच्चे ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव हैं।”
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