आगराउत्तर प्रदेश

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आगरा में शिक्षकों का हल्ला बोल – प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

आगरा में एक हजार से अधिक शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया। यूटा संगठन ने अध्यादेश संशोधन की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

आगरा: टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में यूटा का हल्ला बोल, हजारों शिक्षकों का प्रदर्शन तेज़ – प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

Saleem Sherwani

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) –

आगरा, 11 सितम्बर 2025

उत्तर प्रदेश के आगरा में गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर ऐतिहासिक शिक्षक आंदोलन का गवाह बना। यूटा (United Teachers Association) के बैनर तले लगभग एक हजार से अधिक शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में जुटे और जोरदार प्रदर्शन किया।

कलेक्ट्रेट का माहौल गगनभेदी नारों से गूंज उठा –
टीईटी अध्यादेश वापस लो”, “शिक्षक एकता जिंदाबाद” और “न्याय चाहिए, अन्याय नहीं”।

आंदोलन की अगुवाई यूटा के जिलाध्यक्ष के.के. शर्मा ने की, जबकि यह प्रदर्शन संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर के आह्वान पर चल रहे प्रदेशव्यापी आंदोलन का हिस्सा था।

पृष्ठभूमि: क्यों भड़के शिक्षक?

भारत सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने के बाद शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किए गए। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्य होगी।

समस्या यह है कि –

  • 30 लाख से अधिक शिक्षक देशभर में प्रभावित हो रहे हैं।

  • इनमें से लाखों शिक्षक ऐसे हैं जो 20-25 साल पहले वैध नियमों के अनुसार चयनित हुए थे।

  • उस समय की अर्हता और भर्ती प्रक्रिया पूरी कर चुके ये शिक्षक अब अचानक से बाहर किए जाने के खतरे में हैं।

यूटा नेताओं का कहना है कि यह फैसला अन्यायपूर्ण और एकतरफा है। जिन शिक्षकों ने जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा देने में समर्पित कर दिया, उनके साथ अब “नौकरी छीनने जैसा व्यवहार” उचित नहीं।

शिक्षकों की मुख्य मांगें

टीईटी अनिवार्यता विरोध, आगरा शिक्षक प्रदर्शन, यूटा संगठन आंदोलन, प्रधानमंत्री को ज्ञापन, TET protest Agra, TET teachers protest

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कई प्रमुख मांगें उठाईं –

  1. शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) में संशोधन कर यह स्पष्ट किया जाए कि अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त हों।

  2. केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए।

  3. लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और सेवा को मान्यता दी जाए।

  4. शिक्षा व्यवस्था को अस्थिर करने वाले ऐसे आदेशों को तुरंत वापस लिया जाए।

कानूनी पहलू और 2017 का संशोधन विवाद

टीईटी अनिवार्यता विरोध, आगरा शिक्षक प्रदर्शन, यूटा संगठन आंदोलन, प्रधानमंत्री को ज्ञापन, TET protest Agra, TET teachers protest

यूटा के प्रदेश संगठन मंत्री यादवेन्द्र शर्मा और मंडल अध्यक्ष केशव दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2017 में भारत सरकार ने शिक्षा अधिकार अधिनियम में संशोधन किया था, लेकिन यह सिर्फ “फाइलों में दबा” रहा।
अब अचानक इस अधिनियम को आधार बनाकर कोर्ट में एकतरफा आदेश पारित कर दिया गया।

इससे लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। संगठन का आरोप है कि यह पूरा मामला “गुपचुप तरीके से शिक्षकों पर थोपा गया निर्णय” है, जो शिक्षा व्यवस्था को अस्थिर कर देगा।

शिक्षकों का आक्रोश – “अन्याय स्वीकार नहीं”

प्रदर्शन में आए शिक्षक बेहद आक्रोशित नज़र आए। उनका कहना था कि –

  • “हम वर्षों से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। अगर आज हमें अयोग्य बताया जा रहा है तो यह हमारे सम्मान पर चोट है।”

  • “सरकार को समझना चाहिए कि हम शिक्षक सिर्फ नौकरी करने वाले कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज निर्माता हैं।”

प्रदर्शन स्थल पर कई शिक्षकों की आंखों में आंसू थे। महिला शिक्षकों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी की और सरकार से न्याय की गुहार लगाई।

FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR

प्रमुख शिक्षक और पदाधिकारी रहे शामिल

इस बड़े प्रदर्शन में आगरा और आसपास के जिलों से भारी संख्या में शिक्षक पहुंचे। इनमें प्रमुख रूप से –
धर्मेंद्र चाहर, अशोक जादौन, आनंद शर्मा, ओमवीर सिंह गुर्जर, हरेंद्र राना, निधि श्रीवास्तव, संजीव शर्मा, पूजा खंडेलवाल, बबली व्यास, देवेश तिवारी, अन्नपूर्णा गुप्ता, मनोज मुद्गल, मंजीत सिंह, स्मिता, गरिमा, शमा गुलाटी, चेतन भारद्वाज, योगेश शर्मा, ऋचा श्रीवास्तव, अर्चना, रंजना शर्मा, वीनू निर्मल समेत सैकड़ों शिक्षक शामिल रहे।

आंदोलन का अगला चरण

टीईटी अनिवार्यता विरोध, आगरा शिक्षक प्रदर्शन, यूटा संगठन आंदोलन, प्रधानमंत्री को ज्ञापन, TET protest Agra, TET teachers protest

यूटा संगठन ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा।
यदि केंद्र सरकार ने जल्द ही अध्यादेश संशोधन कर राहत नहीं दी, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा।

संगठन के नेताओं ने चेतावनी दी कि लाखों शिक्षकों का भविष्य दांव पर है। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था को ठप कर सकता है।

निष्कर्ष

आगरा का यह आंदोलन अब सरकार और न्यायपालिका के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। एक तरफ लाखों शिक्षकों का भविष्य संकट में है, तो वहीं दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता भी दांव पर है।

  • यूटा संगठन के इस संघर्ष ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है –
    क्या दशकों से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं को एक झटके में समाप्त कर देना न्यायसंगत है?

अब सबकी नज़र केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हुई है।

CHECK ALSO:

UP NEWS: समर्थ व विकसित उत्तर प्रदेश @2047 अभियान: आगरा संवाद में खेरागढ़ के छात्रों की चमक

iPhone Air First Look – Apple का सबसे हल्का और फ्यूचरिस्टिक iPhone लॉन्च

AGRA NEWS, HINDI DAINIK SAMACHAR

Related Articles

Back to top button