TET अनिवार्यता पर आगरा में शिक्षकों का जंगी प्रदर्शन | PM को सौंपा 6 पृष्ठीय ज्ञापन
आगरा में प्राथमिक शिक्षक संघ ने TET अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने कहा, “मांग पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।”
TET की अनिवार्यता पर आगरा में शिक्षकों का उफान: प्राथमिक शिक्षक संघ का जंगी प्रदर्शन, PM को सौंपा 6 पृष्ठीय ज्ञापन
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 16 सितंबर 2025
आगरा। बेसिक शिक्षा जगत में मचे उथल-पुथल के बीच TET (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता को लेकर गुस्सा अब सड़कों पर साफ दिखने लगा है। सोमवार को आगरा में प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले हजारों शिक्षक इकट्ठा हुए और उन्होंने जंगी प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि: क्यों भड़के शिक्षक?
शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनके दशकों की मेहनत और योग्यता पर सवाल उठाने जैसा है।
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20-25 साल की सेवा के बाद नए नियम थोपना न सिर्फ अनुचित बल्कि शिक्षकों के आत्मसम्मान पर चोट है।
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कई शिक्षकों ने कहा कि “हमने अपनी नियुक्ति के समय की सभी अर्हताएं पूरी की थीं। अब पुराने शिक्षकों पर TET लागू करना अन्याय है।”
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प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता और असुरक्षा बढ़ा देगा।
प्रधानमंत्री को सौंपा 6 पन्नों का ज्ञापन

आंदोलनकारी शिक्षकों ने एक छह पन्नों का विस्तृत ज्ञापन प्रधानमंत्री को संबोधित कर जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि:
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पुराने शिक्षकों को TET से छूट दी जाए।
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शिक्षा विभाग नियुक्ति के समय की शर्तों को ही मान्य करे।
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न्यायालय और सरकार को शिक्षकों की सेवा की निरंतरता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
ज्ञापन एसीएम द्वितीय विनोद कुमार ने शिक्षकों से प्राप्त किया।
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प्रदर्शन में उमड़ा जनसैलाब

प्रदर्शन स्थल पर नारेबाजी और बैनरों के बीच हजारों शिक्षकों का जनसैलाब उमड़ा।
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“TET की अनिवार्यता वापस लो”
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“शिक्षकों का अपमान बंद करो”
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“शिक्षक समाज के साथ अन्याय नहीं सहा जाएगा”
ऐसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
प्रमुख नेताओं की राय
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जिला संयोजक चौधरी सुरजीत सिंह – “जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मानती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
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हरिओम यादव (जिला मंत्री) – “TET को अनिवार्य करना शिक्षकों की योग्यता और अनुभव को नजरअंदाज करना है।”
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विजयपाल नरवार – “शिक्षक समाज ने हमेशा शिक्षा के मानक ऊंचे किए हैं। अब हम पर नए नियम लादना नाइंसाफी है।”
आंदोलन में शामिल पदाधिकारी और शिक्षक

इस आंदोलन में जिले और मंडल भर से आए प्रमुख पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
नामों में शामिल रहे –
चौधरी सुरजीत सिंह, अजय शर्मा, डॉ. विशाल आनंद, प्रवीण शर्मा, हरिओम यादव, बृजेश शुक्ला, केके इंदौलिया, सुखवीर चाहर, विजयपाल नरवार, प्रदीप यादव, सोनवीर चाहर, परमवीर, सुनीता सिंह, सीता वर्मा, डॉ. योगेश चाहर, पुनीत अरोड़ा, अशोक शर्मा, बलवीर सिंह, राकेश गौतम, पूजा रश्मि, राशिद अल्वी, अजय भदौरिया, देवेंद्र नरवार और अन्य सैकड़ों शिक्षक।
आंदोलन का असर और आगे की राह
यह विरोध सिर्फ आगरा तक सीमित नहीं है।
- राज्यभर में आंदोलन की तैयारी है।
- शिक्षक संघ का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने फैसला नहीं बदला तो इसे राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाएगा।
शिक्षक संघ का दावा है कि “यह सिर्फ नौकरी बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और न्याय की लड़ाई है।”
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शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था और नीति निर्धारकों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
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क्या दशकों से बच्चों को पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों को अचानक अयोग्य माना जा सकता है?
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क्या सरकार और न्यायालय को शिक्षकों के अनुभव और योगदान का सम्मान करना चाहिए?
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या फिर TET को शिक्षा गुणवत्ता का अंतिम पैमाना मान लिया जाएगा?
इन सवालों का जवाब ही आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करेगा।
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