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भारत की शिक्षा परंपरा को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता – डॉ. मंजू भदौरिया, आगरा में टीएलएम मेले का आयोजन

आगरा के डायट संस्थान में नवाचार महोत्सव और टीएलएम प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. मंजू भदौरिया ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा गौरवशाली रही है और हमें इसे पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। जानिए प्रदर्शनी के विजेताओं और खास आकर्षणों के बारे में विस्तार से।

भारत की शिक्षा परंपरा को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता – डॉ. मंजू भदौरिया

Saleem Sherwani

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)

आगरा, 19 सितंबर 2025

आगरा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) आगरा में चल रहे नवाचार महोत्सव एवं नॉलेज शेयरिंग कार्यक्रम का दूसरा दिन टीएलएम (Teaching Learning Material) मेला के नाम रहा। इस मेले ने यह साबित कर दिया कि यदि शिक्षक संकल्प कर लें तो शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे बच्चों की सोच और कल्पनाशक्ति को उड़ान देने वाला बनाया जा सकता है।

टीएलएम मेला क्यों है खास?

आज की शिक्षा व्यवस्था में टीएलएम (Teaching Learning Material) बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह केवल पढ़ाई को सरल बनाने का साधन नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को इंटरेक्टिव, रोचक और जीवन से जुड़ा बनाता है।

  • गणित के कठिन सूत्रों को समझाने के लिए वर्किंग मॉडल

  • विज्ञान के प्रयोगों को सरल बनाने वाले डेमो प्रोजेक्ट्स

  • सामाजिक विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को स्पष्ट करने वाले नवाचार उपकरण

इस प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की जिज्ञासा और प्रयोगधर्मिता से जुड़ी हुई यात्रा है।

डायट आगरा में नवाचार महोत्सव और नॉलेज शेयरिंग कार्यक्रम | शिक्षकों ने साझा किए नए प्रयोग

डॉ. मंजू भदौरिया का संदेश – गौरवशाली शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करना

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डॉ. मंजू भदौरिया का संदेश

प्रदर्शनी की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने शिक्षकों के प्रयासों को सराहते हुए कहा –

“भारत का अतीत और शिक्षा का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात शिक्षा केंद्रों ने पूरी दुनिया को ज्ञान दिया। आज आवश्यकता है कि हम उसी गौरव को पुनः स्थापित करें। शिक्षकों का यह समर्पण और नवाचार उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

उनके इस वक्तव्य ने न केवल शिक्षकों को प्रेरित किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि शिक्षा में नवाचार और परंपरा का संगम ही भविष्य की दिशा तय करेगा।

प्रतियोगिता के विजेता और उनके नवाचार

टीएलएम प्रदर्शनी में भाग लेने वाले विभिन्न विकास क्षेत्रों के शिक्षकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रथम स्थान – विकास क्षेत्र खेरागढ़

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द्वितीय स्थान – विकास क्षेत्र जैतपुर कला

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तृतीय स्थान – विकास क्षेत्र शमशाबाद

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आकर्षण का केंद्र रहे मॉडल्स

  • मीता वर्मा (राजकीय इंटर कॉलेज)एआई रोबोट

  • अशोक कुमार (खेरागढ़)एआई विज्ञान टीएलएम

  • अर्जुन सिंह (जैतपुर कला)जादुई बॉक्स: उत्तर प्रदेश एक दृष्टि में

ये मॉडल न केवल बच्चों के लिए ज्ञान का स्रोत हैं बल्कि शिक्षा में तकनीक और क्रिएटिविटी के मेल का प्रतीक भी हैं।

शिक्षाविदों की सोच और दिशा

समापन सत्र में उप शिक्षा निदेशक/प्राचार्य डायट आगरा पुष्पा कुमारी ने कहा –

“जनपद आगरा की पहचान केवल ताजमहल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमें शिक्षा में भी ऐसा मुकाम बनाना चाहिए जिससे पूरा प्रदेश प्रेरणा ले।”

कार्यक्रम प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि यह प्रदर्शनी शिक्षकों के लिए एक ऐसा मंच है जहाँ वे अपने विचारों को मूर्त रूप देकर न केवल विद्यार्थियों बल्कि पूरे समाज को दिशा देते हैं।

निर्णायक मंडल में यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा और संजीव कुमार सत्यार्थी ने शिक्षकों के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए कहा कि इनमें से कई मॉडल प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकते हैं।

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शिक्षा और समाज पर असर

  1. विद्यार्थियों में जिज्ञासा बढ़ेगी – ऐसे मॉडल्स बच्चों को किताबों के पन्नों से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन से जोड़ते हैं।

  2. शिक्षकों का आत्मविश्वास बढ़ता है – जब उनके प्रयासों को मान्यता मिलती है, तो वे और भी रचनात्मक बनने की ओर प्रेरित होते हैं।

  3. प्रदेश स्तर पर नई पहचान – आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर को अब शिक्षा नवाचारों के लिए भी जाना जा सकता है।

  4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप पहल – यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कैसे शिक्षा प्रणाली में प्रयोग और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

समापन

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टीएलएम प्रदर्शनी केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि शिक्षा के भविष्य की झलक है। जब शिक्षक नवाचार करते हैं और समाज उन्हें समर्थन देता है, तो भारत की शिक्षा परंपरा पुनः अपने गौरव को प्राप्त कर सकती है।

डॉ. मंजू भदौरिया के शब्दों में –

“हमें भारत की शिक्षा परंपरा को पुनः स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। शिक्षा ही राष्ट्र की असली शक्ति है।”

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