Agra Breaking News: डायट आगरा में दो दिवसीय ‘अंकुरण’ कृषि प्रदर्शनी का समापन | जैविक खेती व पर्यावरण संरक्षण पर जोर
डायट आगरा में आयोजित दो दिवसीय ‘अंकुरण’ कृषि प्रदर्शनी एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। शिक्षकों व डीएलएड प्रशिक्षुओं ने जैविक खेती, जल संरक्षण, फसल चक्र और घरेलू बागवानी पर आधारित स्टॉल लगाए। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित।

डायट आगरा में दो दिवसीय ‘अंकुरण’ कृषि प्रदर्शनी एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का भव्य समापन
जैविक खेती, जल संरक्षण, घरेलू बागवानी और औषधीय पौधों पर केंद्रित रहा आयोजन
शिक्षकों व डीएलएड प्रशिक्षुओं ने नवाचार और रचनात्मकता से प्रस्तुत किए मॉडल व स्टॉल
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 24 जनवरी 2026।
टीचर एजुकेशन योजनान्तर्गत प्रशिक्षण एवं शैक्षिक कार्यक्रमों के वार्षिक लक्ष्य को साकार करने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में आयोजित ‘अंकुरण’ कृषि प्रदर्शनी एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित दो दिवसीय कार्यक्रम का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यक्रम न केवल शिक्षकों और डीएलएड प्रशिक्षुओं के लिए सीखने का मंच बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम भी सिद्ध हुआ।
कृषि और पर्यावरण संरक्षण का मिला समन्वय

कार्यक्रम के द्वितीय एवं समापन दिवस पर डायट परिसर में शैक्षणिक एवं पर्यावरणीय चेतना से परिपूर्ण वातावरण देखने को मिला। डीएलएड प्रशिक्षुओं एवं परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा पर्यावरण संरक्षण, फसल चक्र, आधुनिक एवं पारंपरिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, औषधीय पौधों का महत्व, जल संरक्षण, उन्नत बीज प्रजातियां, घरेलू स्तर पर फल-सब्जी उत्पादन जैसे विषयों पर आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक स्टॉल लगाए गए।
स्टॉलों पर प्रदर्शित मॉडल, चार्ट और जीवंत प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सीमित संसाधनों में भी सतत कृषि और पर्यावरण संतुलन संभव है। कई स्टॉलों में छत पर बागवानी, किचन गार्डन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक खाद के प्रयोग को व्यवहारिक रूप में दर्शाया गया, जिसे आगंतुकों ने सराहा।
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जैविक खेती और घरेलू उत्पादन आज की आवश्यकता – अनिरुद्ध यादव

समापन अवसर पर उपस्थित उप शिक्षा निदेशक/प्राचार्य डायट आगरा अनिरुद्ध यादव ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक और प्रशिक्षु स्वयं जैविक खेती, घरेलू बागवानी और जल संरक्षण को अपनाएं, तो इसका प्रभाव समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अपने घर की छत, आंगन या खाली स्थान में फल एवं सब्जियां उगाकर न केवल स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है, बल्कि बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित की जा सकती है।
34 प्रतिभागियों ने प्रदर्शनी में दिखाई प्रतिभा
कार्यक्रम के नोडल प्रभारी प्रवक्ता पुष्पेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 24 जनवरी को गूगल फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण कराने वाले कुल 34 शिक्षक एवं डीएलएड प्रशिक्षु इस कृषि एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में सहभागी बने। प्रतिभागियों ने अपने स्टॉलों के माध्यम से रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक सरोकारों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट स्टॉलों को मिला सम्मान

प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल द्वारा विषयवस्तु, प्रस्तुति, नवाचार एवं उपयोगिता के आधार पर श्रेष्ठ स्टॉलों का चयन किया गया।
शिक्षक वर्ग में
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प्रथम स्थान – देवेश कुमार सिंह (खेरागढ़)
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द्वितीय स्थान – उषा कुमारी (शमशाबाद)
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तृतीय स्थान – अमित कुमार (खंदोली)
डीएलएड प्रशिक्षु वर्ग में
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प्रथम स्थान – हर्षवर्धन एवं चारु अग्रवाल
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द्वितीय स्थान – निखिल यादव एवं अंशु गौतम
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तृतीय स्थान – पूजा विश्वकर्मा एवं सीमा पाल
विशेषज्ञों ने निभाई निर्णायक मंडल की भूमिका
प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका आरबीएस कॉलेज आगरा के प्रोफेसर राजवीर सिंह एवं वरिष्ठ प्राविधिक सहायक, कार्यालय उप कृषि निदेशक सचिन शर्मा द्वारा निभाई गई। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ते हैं और भविष्य की पीढ़ी को पर्यावरण-अनुकूल सोच की ओर प्रेरित करते हैं।
शैक्षिक वातावरण में हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, अबु मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, हिमांशु सिंह, यशपाल सिंह, संजीव कुमार सत्यार्थी, रचना यादव, रंजना पांडे सहित समस्त डायट स्टाफ उपस्थित रहा।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश उभरकर सामने आया कि शिक्षा के साथ कृषि और पर्यावरण संरक्षण को जोड़कर ही सतत एवं स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
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