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SNMC आगरा में पहली एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन

सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा ने पहली बार एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया सफल की, गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज की नई उम्मीद।

सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा में पहली बार एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया सफल

 

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) –

आगरा। चिकित्सा क्षेत्र में आगरा के लिए ऐतिहासिक क्षण आया है। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) ने पहली बार एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रिया – एंटीरियर कम्युनिकेटिंग आर्टरी एन्यूरिज्म कॉइलिंग – कॉलेज के PMSSY विंग की अत्याधुनिक कार्डियक कैथ लैब में पूरी की गई।

सबसे खास बात यह रही कि जहां दिल्ली और बड़े शहरों में इस तरह की प्रक्रिया की लागत करीब ₹15 लाख तक होती है, वहीं SNMC ने इसे आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह से निःशुल्क कर दिखाया। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई उम्मीद भी जगाती है।

बहु-अनुशासनात्मक टीम का प्रयास बना सफलता की कुंजी

इस उपलब्धि के पीछे कई विभागों का संयुक्त सहयोग रहा। विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों, रेजिडेंट्स, नर्सों और तकनीशियनों की टीम ने मिलकर इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाया।

प्रक्रिया में शामिल प्रमुख विशेषज्ञ:

  • कार्डियोलॉजी विभाग: डॉ. बसंत कुमार गुप्ता (विभागाध्यक्ष)

  • न्यूरोसर्जरी विभाग: डॉ. गौरव धाकरे (विभागाध्यक्ष), डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. तरुणेश शर्मा

  • इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी: डॉ. अंशुल जैन (मैक्स नोएडा) का विशेष सहयोग

  • इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी: डॉ. पल्लव गुप्ता

  • एनेस्थीसिया विभाग: डॉ. अतिहर्ष मोहन, डॉ. प्रभा

इसके अलावा, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियनों ने भी अपनी जिम्मेदारी को बेहतरीन ढंग से निभाया। यही सामूहिक समर्पण इस सफलता का मूल आधार बना।

SNMC, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज

गरीब मरीजों को मिला जीवन का नया सहारा

यह प्रक्रिया सिर्फ एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ रहते हैं।

प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा –
“यह उपलब्धि SNMC की चिकित्सा क्षमता और बुनियादी ढांचे को एक नए स्तर पर ले जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भी विश्वस्तरीय और जीवनरक्षक उपचार मिल सके। आने वाले समय में न्यूरो-इंटरवेंशन की इस नई सुपर-सब-स्पेशलिटी के माध्यम से न केवल आगरा, बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।”

एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन क्या है?

आम भाषा में इसे समझें तो यह मस्तिष्क की रक्त धमनियों में आने वाले खतरनाक एन्यूरिज्म (फटने का खतरा वाली गांठ/सूजन) का इलाज करने की प्रक्रिया है। इस तकनीक में बिना बड़ी सर्जरी किए, केवल कैथेटर और कॉइलिंग तकनीक के माध्यम से समस्या का समाधान किया जाता है।

  • यह तकनीक अत्यधिक जटिल मानी जाती है।

  • मस्तिष्क की नाजुक धमनियों में सूक्ष्म हस्तक्षेप करके रक्तस्राव और जानलेवा स्थितियों से मरीज को बचाया जाता है।

  • सामान्यतः यह प्रक्रिया केवल दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में ही संभव होती थी।

  • अब SNMC आगरा में यह सुविधा उपलब्ध होना एक बड़ी उपलब्धि है।

स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

आगरा और ब्रज क्षेत्र लंबे समय से बेहतर न्यूरोसर्जरी और इंटरवेंशनल सुविधाओं की कमी झेलते रहे हैं। गंभीर मरीजों को दिल्ली या लखनऊ रेफर करना पड़ता था, जिससे कई बार इलाज में देरी होती थी।

लेकिन अब इस सफलता के बाद SNMC आगरा रीजनल मेडिकल हब के रूप में उभर सकता है।

  • इससे आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, भरतपुर, एटा जैसे जिलों के मरीजों को राहत मिलेगी।

  • आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब मरीजों को बिना खर्च इलाज मिल सकेगा।

  • स्थानीय स्तर पर सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।

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सरकार और समाज के लिए संदेश

इस उपलब्धि ने यह साबित किया है कि अगर सरकारी अस्पतालों को उचित संसाधन, तकनीकी सहयोग और समर्पित टीम मिले, तो वे किसी भी प्राइवेट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से पीछे नहीं हैं।

  • गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मिलना इस पहल की सबसे बड़ी ताकत है।

  • आगरा जैसे शहर में विश्वस्तरीय न्यूरो इंटरवेंशन सुविधा मिलना अपने आप में गौरव की बात है।

  • आने वाले वर्षों में SNMC इस क्षेत्र में और भी जटिल प्रक्रियाएं करने के लिए तैयार रहेगा।

भविष्य की संभावनाएं

SNMC अब इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।

  • न्यूरो-इंटरवेंशन सुपर स्पेशलिटी ग्रुप का गठन किया जाएगा।

  • नई तकनीकों और उपकरणों को शामिल किया जाएगा।

  • डॉक्टरों और रेजिडेंट्स को इस प्रक्रिया में और अधिक प्रशिक्षित किया जाएगा।

  • आने वाले वर्षों में मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक, न्यूरोवस्कुलर ब्लॉकेज और अन्य जटिल बीमारियों का इलाज यहीं मिलेगा।

निष्कर्ष

सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा की यह उपलब्धि केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया की सफलता नहीं है, बल्कि यह जनकल्याण, चिकित्सा आत्मनिर्भरता और गरीब मरीजों को नई जिंदगी देने का संकल्प है।

जहां कभी मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई जाना पड़ता था, वहीं अब आगरा में ही विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध होगा। SNMC ने साबित किया है कि समर्पण, टीमवर्क और सही दिशा में प्रयास से सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

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AGRA NEWS, HINDI DAINIK SAMACHAR

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