
अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 2025 पर आगरा के शिक्षक मो. शमशाद आलम को मिला “शिक्षक रत्न सम्मान”
ब्यूरो चीफ़ – एस. शेरवानी
खेरागढ़, 05 अक्टूबर 2025
आगरा/खेरागढ़। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 2025 का अवसर शिक्षा जगत के लिए बेहद खास रहा। इसी क्रम में फ्यूचर यूनिवर्सिटी फरीदपुर, बरेली (उ.प्र.) में आयोजित शैक्षिक उन्नयन गोष्ठी एवं शिक्षक सम्मान समारोह में आगरा ज़िले के खेरागढ़ ब्लॉक के परिषदीय विद्यालय डूंगरवाला के प्रधानाध्यापक मो. शमशाद आलम को उनके उत्कृष्ट शैक्षिक योगदान और समर्पण के लिए “शिक्षक रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया।
शिक्षक दिवस का महत्व
हर साल 5 अक्टूबर को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन समाज में शिक्षा और शिक्षक की अहम भूमिका को सम्मानित करने का प्रतीक है। भारत में यह दिन खास मायने रखता है क्योंकि शिक्षा को यहाँ सिर्फ नौकरी पाने का साधन नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाला माध्यम माना जाता है।
इसी पृष्ठभूमि में यह आयोजन हुआ, जिसमें न केवल शिक्षकों के योगदान को सराहा गया, बल्कि शिक्षा सुधार और नवाचार पर भी व्यापक चर्चा की गई।
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मो. शमशाद आलम का योगदान

मो. शमशाद आलम लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए लगातार नवाचार और सामाजिक बदलाव की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने जिन प्रमुख क्षेत्रों में योगदान दिया है, उनमें शामिल हैं:
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विद्यालय कायाकल्प अभियान – सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने और बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना।
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नामांकन बढ़ाना – ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना।
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स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण – विद्यालय में ग्रीन इनिशिएटिव और स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देना।
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भाषा विकास और बालिका शिक्षा – विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा और भाषा दक्षता पर ध्यान केंद्रित करना।
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मिशन शक्ति और निपुण भारत मिशन – बालिकाओं की सुरक्षा और शुरुआती शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार।
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भारत स्काउट एंड गाइड एवं मध्यान्ह भोजन योजना – बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण पर कार्य।
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शोध, नवाचार और प्रशिक्षण में सक्रिय भूमिका
मो. शमशाद आलम सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने लगातार शोध, शैक्षिक संगोष्ठी, कार्यशाला और शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रमों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनकी कोशिश रही है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जोड़े।
समारोह की झलक
यह आयोजन 05 अक्टूबर 2025 (रविवार) को फ्यूचर यूनिवर्सिटी, फरीदपुर, बरेली में हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षाविद और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
समारोह के दौरान शिक्षा में नवाचार और भविष्य की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। मंच से वक्ताओं ने कहा कि ऐसे शिक्षक ही वास्तव में समाज का भविष्य गढ़ते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा का दीपक जलाए रखते हैं।
सम्मान पाकर मो. शमशाद आलम भावुक नज़र आए। उन्होंने कहा:
“यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं बल्कि पूरे विद्यालय परिवार और उन सभी लोगों का है, जो शिक्षा के माध्यम से बदलाव लाने में विश्वास रखते हैं। यह पुरस्कार मुझे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देगा।”
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समाज और शिक्षा जगत में संदेश
इस सम्मान ने यह साबित कर दिया कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाले नहीं होते बल्कि समाज के मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और बदलाव के वाहक होते हैं।
आज जब शिक्षा व्यवस्था चुनौतियों से जूझ रही है, तब मो. शमशाद आलम जैसे शिक्षक एक रोल मॉडल बनकर उभरते हैं। उनका कार्य आने वाली पीढ़ी को न केवल शिक्षित करेगा बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक भी बनाएगा।
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