जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति बैठक | उटांगन नदी पुनरुद्धार व वृक्षारोपण पर जोर
आगरा कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण, गंगा व वृक्षारोपण समिति की बैठक हुई। उटांगन नदी पुनरुद्धार, वायु गुणवत्ता सुधार, सीवेज प्रबंधन और तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर चर्चा।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति की बैठक संपन्न, उटांगन नदी पुनरुद्धार और वृक्षारोपण पर विशेष जोर
आगरा, 03 सितंबर 2025 |
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति, जिला वृक्षारोपण समिति और जिला गंगा एवं पर्यावरण समिति की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जनपद की पर्यावरणीय चुनौतियों, वायु प्रदूषण, नदियों के संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वृक्षारोपण के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
वायु गुणवत्ता पर सुधार, आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स “गुड”
बैठक की शुरुआत में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि ने जानकारी दी कि अगस्त माह के दौरान आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) “गुड” श्रेणी में दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग ने इस सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सभी विभाग इसी तरह निरंतर कार्य करें ताकि आगरा की वायु गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।
खनन और निर्माण कार्य पर सख्ती
बैठक में निर्देश दिया गया कि खनन और निर्माण कार्य करने वाले विभाग पर्यावरण मानकों का पूरी तरह पालन करें। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित विभाग पर जुर्माना लगाया जाएगा।
ठोस अपशिष्ट और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन
बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण पर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अपशिष्ट प्रबंधन में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार विभागों पर कार्रवाई की जाएगी।
उटांगन नदी पुनरुद्धार और गंगा समिति की समीक्षा
जिला गंगा समिति की समीक्षा में उटांगन नदी के पुनरुद्धार पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नदियों के किनारे बसे गांवों को “गंगा ग्राम” का दर्जा दिया जाए। साथ ही, प्रत्येक गंगा ग्राम में ग्राम गंगा समिति, ग्राम आद्रभूमि समिति और ग्रीन चौपाल का गठन किया जाए ताकि नदियों की स्वच्छता और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
सिंचाई विभाग ने जानकारी दी कि फ्लड प्लेन ज़ोन चिन्हांकन का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है और मंजूरी मिलने के बाद चिन्हित स्थानों पर पिलर लगाए जाएंगे।
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सीवेज प्रबंधन और नमामि गंगे योजना
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि यमुना और उसकी सहायक नदियों में सीवेज का बहाव किसी भी स्थिति में न हो। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत स्वीकृत किए गए एसटीपी संयंत्रों की समीक्षा की गई और सभी संयंत्रों को समयबद्ध रूप से चालू रखने के निर्देश दिए गए।
तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश
जिला आद्रभूमि समिति की समीक्षा में जनपद के सभी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के आदेश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि तालाब न केवल जल संचयन का साधन हैं बल्कि जैव विविधता और भूजल स्तर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वृक्षारोपण की प्रगति और पौधों की जीवितता
बैठक में वृक्षारोपण समिति की समीक्षा की गई। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग ने बताया कि इस वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण लगाए गए पौधों की जीवितता प्रतिशत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पौधों की सुरक्षा और देखरेख पर विशेष ध्यान दिया जाए और स्थलवार क्रॉस-चेकिंग कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए।
प्रमुख अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान, डीएफओ राजेश कुमार, डीएफओ चंबल चांदनी सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण मौजूद रहे।
निष्कर्ष
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि आगरा प्रशासन न केवल वायु और जल प्रदूषण से निपटने के लिए गंभीर है, बल्कि उटांगन नदी के पुनरुद्धार, वृक्षारोपण, तालाब संरक्षण और सीवेज प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी ठोस कदम उठा रहा है। यदि ये प्रयास इसी प्रकार जारी रहे तो आने वाले वर्षों में आगरा न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के लिए, बल्कि एक स्वच्छ और हरित शहर के रूप में भी पहचाना जाएगा।







