धाकड़ धर्मशाला में श्रीमद भागवत कथा: संत अभिषेक भाई जी की वाणी से गूंजा आस्था का माहौल
आगरा की धाकड़ धर्मशाला में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन। संत अभिषेक भाई जी की संगीतमयी वाणी सुनने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्ति और आस्था से सराबोर वातावरण।

धाकड़ धर्मशाला में श्रीमद भागवत कथा: संत अभिषेक भाई जी की मधुर वाणी से गूंजा आस्था का माहौल
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 26 सितम्बर 2025
आगरा। धर्म और भक्ति का संगम तब देखने को मिलता है जब भक्त अपनी दिनचर्या छोड़कर प्रभु की कथा में डूब जाते हैं। ऐसा ही नज़ारा इन दिनों आगरा के धाकड़ धर्मशाला में देखने को मिल रहा है, जहां श्रीमद भागवत कथा का आयोजन पूरे भक्तिभाव और उल्लास के साथ किया जा रहा है।
कथा का वाचन राष्ट्रीय संत अरविंद महाराज के सुपुत्र संत अभिषेक भाई जी कर रहे हैं। उनकी मधुर संगीतमयी वाणी और गहन आध्यात्मिक विचार श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति प्रदान कर रहे हैं।
कथा में सुनाए गए प्रसंग और गहरा संदेश
संत अभिषेक भाई जी ने कथा के दौरान कई प्रेरणादायी प्रसंग सुनाए।
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स्कंद एकादशी पुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में कभी भी पशु बलि की परंपरा नहीं रही। यह धर्म हमेशा करुणा, अहिंसा और जीवन की रक्षा का संदेश देता है।
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रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “श्रेष्ठ कुल और उच्च ज्ञान के बावजूद यदि कर्म बुरे हों तो व्यक्ति संसार में बुराई का प्रतीक बन जाता है।”
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वहीं, शबरी माता का प्रसंग सुनाकर उन्होंने बताया कि सच्चा अपनत्व और निष्ठा इंसान को महान बनाते हैं। शबरी ने अपने प्रेम और भक्ति से भगवान श्रीराम का हृदय जीत लिया और माता के समान पूजनीय हो गईं।
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संत ने राजा ध्रुव की कथा भी सुनाई, जिससे भक्तों ने धैर्य, भक्ति और अडिग संकल्प का महत्व समझा।
इन प्रसंगों ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में जाति नहीं, बल्कि कर्म को प्राथमिकता दी गई है।
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भक्तिमय वातावरण और श्रद्धालुओं की भीड़

धाकड़ धर्मशाला का हर कोना भक्ति से सराबोर है। कथा सुनते समय भक्त आंखें बंद करके प्रभु के नाम में डूब जाते हैं। भजन, कीर्तन और संत की वाणी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्रद्धालु कहते हैं कि कथा सुनते समय उन्हें न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी प्राप्त होती है।
विशेष अतिथि और समाज का योगदान

कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मिलन और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बन चुकी है।
कथा में शहर के कई राजनीतिक और सामाजिक गणमान्य लोग भी शामिल हुए। आज के विशेष अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री के पुत्र डॉ. अलौकिक उपाध्याय ने कथा स्थल पर आकर श्रद्धा व्यक्त की।
कथा आयोजक राजवीर सिंह धाकड़ ने बताया कि भक्तों का उत्साह और बढ़ती उपस्थिति इस आयोजन की सफलता को दर्शाता है।
प्रसादी और सेवा व्यवस्था
कथा के अंत में भक्तों के लिए भव्य प्रसादी वितरण की व्यवस्था की गई।
इस सेवा में प्रमुख रूप से बृजराज सिंह, बाबू लाल धाकड़, लक्ष्मण धाकड़, केशव धाकड़, धर्मेन्द्र धाकड़ और किशन गोपाल धाकड़ सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। भक्त प्रसाद ग्रहण कर आनंद और संतोष का अनुभव कर रहे हैं।
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निष्कर्ष
धाकड़ धर्मशाला में चल रही श्रीमद भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरण, संस्कार और भक्ति का संदेश फैलाने का माध्यम बन चुकी है।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी और संत अभिषेक भाई जी की वाणी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया है। यह कथा न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा भी है।
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