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Agra Breaking News: सामाजिक अध्ययन नैतिक विकास का आधार: डॉ. मुकेश अग्रवाल

डायट आगरा प्रशिक्षण में संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने कहा— सामाजिक विज्ञान छात्रों के नैतिक व सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।

सामाजिक परिवेश और नैतिक मूल्यों के निर्माण में सामाजिक अध्ययन की अहम भूमिका – डॉ. मुकेश चंद्र अग्रवाल

Saleem Sherwani

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 12 फरवरी 2026

शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों से दक्ष बनाने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, आगरा में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिदीप्त मॉड्यूल आधारित सामाजिक विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र अग्रवाल ने विस्तृत अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण की प्रक्रिया, सामग्री, प्रस्तुतीकरण शैली और प्रतिभागी शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी का गहन मूल्यांकन किया।

सामाजिक विज्ञान: व्यक्तित्व निर्माण का आधार

अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सामाजिक विज्ञान केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और सामाजिक चेतना के निर्माण का मूल आधार है। उन्होंने कहा—

“सामाजिक अध्ययन विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और तार्किक सोच का विकास करता है। इसलिए सामाजिक विज्ञान अध्यापक का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण और जिम्मेदार होता है।”

उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में शिक्षक को अपने विषय में इतना दक्ष होना चाहिए कि वह विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ जीवन कौशल भी प्रदान कर सके।

शिक्षक की पहचान उसके शिक्षण से

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इस अवसर पर डायट प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि शिक्षक का प्रथम और सर्वोपरि कार्य शिक्षण है और यही उसकी वास्तविक पहचान भी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान तभी सार्थक होगा जब शिक्षक उसे कक्षा में लागू करें और विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे।

उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने विषय को रोचक, गतिविधि आधारित और जीवनोपयोगी बनाकर विद्यार्थियों में सीखने की रुचि उत्पन्न करें।

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विषय विशेषज्ञों द्वारा गहन प्रशिक्षण सत्र

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों—

  • मीनू पवार

  • डॉ. लक्ष्मी देवी सैनी

  • तेजेंद्र सिंह मीणा

  • रेनू जायसवाल

ने सामाजिक विज्ञान के प्रमुख विषयों—नागरिक शास्त्र, इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र—पर विस्तृत सत्र संचालित किए।

इन सत्रों में निम्न विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया—

  • गतिविधि आधारित शिक्षण तकनीक

  • आधुनिक आकलन पद्धतियां

  • प्रभावी पाठ योजना निर्माण

  • शिक्षण में उदाहरण आधारित व्याख्या

  • समूह चर्चा और प्रस्तुतीकरण विधि

  • कक्षा में सहभागितापूर्ण वातावरण निर्माण

सत्रों के दौरान शिक्षकों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए ताकि वे नई विधियों को सीधे कक्षा में लागू कर सकें।

प्रशिक्षण की संरचना और उद्देश्य

कार्यक्रम के प्रारंभ में नोडल प्रभारी रचना यादव ने प्रशिक्षण की रूपरेखा, उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों को न केवल विषयगत ज्ञान में मजबूत बनाता है, बल्कि उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और मूल्यांकन तकनीकों से भी परिचित कराता है।

संचालन और सहयोग

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित, समयबद्ध और सहभागितापूर्ण बनाए रखा।

इस अवसर पर जिला समन्वयक समग्र शिक्षा डब्ल्यू.एन. मिडिल, प्रवक्ता कल्पना सिन्हा, यशवीर सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, संजिव सत्यार्थी, लक्ष्मी शर्मा, यशपाल सिंह सहित अनेक शिक्षकों व अधिकारियों का सक्रिय सहयोग रहा।

शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, प्रासंगिक और छात्र-केन्द्रित बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की विषयगत समझ, प्रस्तुतीकरण कौशल और मूल्यांकन क्षमता को मजबूत करते हैं, जिससे विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में स्पष्ट सुधार देखा जा सकता है।

निष्कर्ष:

सामाजिक विज्ञान प्रशिक्षण का यह आयोजन शिक्षकों को ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण—तीनों स्तरों पर सशक्त बना रहा है। इससे शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की नई संभावनाएं खुल रही हैं और विद्यार्थियों को मूल्यपरक, व्यावहारिक तथा प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा प्रदान करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार हो रहा है।

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