आगरा

शिक्षक दिवस पर शिक्षामित्रों का उपवास व धरना: स्थायीकरण व वेतनमान की माँग तेज

आगरा में शिक्षक दिवस पर सैकड़ों शिक्षामित्रों ने जिला मुख्यालय पर उपवास व धरना प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर स्थायीकरण, प्रशिक्षित वेतनमान व मानदेय वृद्धि सहित 8 सूत्रीय माँगें रखीं।

शिक्षक दिवस पर शिक्षामित्रों का उपवास और धरना प्रदर्शन: स्थायीकरण की माँग तेज

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) –

आगरा।

शिक्षक दिवस, जिसे देशभर में गुरुजनों के सम्मान के रूप में मनाया जाता है, इस बार आगरा के शिक्षामित्रों के लिए संघर्ष का प्रतीक बन गया। शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को जिलेभर से आए सैकड़ों शिक्षामित्रों ने उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के बैनर तले ज़िला मुख्यालय पर एक दिवसीय उपवास व धरना प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह छौंकर ने किया। शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि एसीएम तृतीय विनोद कुमार को सौंपा और सरकार से वादों को पूरा करने की जोरदार अपील की।

क्यों उतरे शिक्षामित्र सड़कों पर?

धरना स्थल पर जमा भीड़ ने सरकार को उसके पुराने वादे याद दिलाए।

  • शिक्षामित्रों का कहना है कि जो देश का भविष्य गढ़ते हैं, उनका खुद का भविष्य असुरक्षित है।

  • पुनः स्थायीकरण और प्रशिक्षित वेतनमान उनकी प्रमुख माँग है।

  • महंगाई के दौर में मानदेय बेहद कम है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।

शिक्षक दिवस पर शिक्षामित्रों का उपवास व धरना

जिलाध्यक्ष का बयान

धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह छौंकर ने कहा:

 “सरकार ने हमसे वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। मजबूरी में हमें उपवास पर बैठना पड़ा है। हम चाहते हैं कि शिक्षामित्रों का पुनः स्थायीकरण हो और हमें भी प्रशिक्षित शिक्षकों की तरह वेतनमान मिले।”

शिक्षामित्रों की प्रमुख 8 माँगें

  1. पुनः स्थायीकरण/समायोजन या नई शिक्षा नीति में प्री-प्राइमरी में समायोजन।

  2. स्थायीकरण प्रक्रिया पूर्ण होने तक समान कार्य समान वेतन।

  3. अन्य राज्यों की तरह मानदेय वृद्धि।

  4. टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर प्राथमिकता।

  5. मृतक शिक्षामित्र परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी सेवा।

  6. ईपीएफ और आयुष्मान योजना का लाभ।

  7. समर कैंप ड्यूटी का लंबित मानदेय भुगतान।

  8. शिक्षामित्रों को पंचायत और बीएलओ ड्यूटी से मुक्ति।

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आंदोलन में सक्रिय भागीदारी

धरने में जिलेभर से आए शिक्षामित्रों ने जमकर नारेबाजी की।
मंच पर शिशुपाल सिंह चाहर, ब्रजकिशोर राठौर, अनिल यादव, सचिन सिंह सिसौदिया, भूरी सिंह सोलंकी, भरत सिंह चाहर, रनवीर सिंह सिकरवार, विजय पाल चौधरी समेत सैकड़ों नाम शामिल रहे।
महिला शिक्षामित्रों – मनीषा यादव, गीता मिश्रा, अनुपम कटारा, गीता बघेल, प्रियंका शर्मा, ममता और पिंकी ने भी बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।

क्यों है यह मुद्दा अहम?

शिक्षामित्र लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ रहे हैं। ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाने में उनकी भूमिका अहम है। लेकिन:

  • स्थायी नौकरी का अभाव

  • वेतनमान की समस्या

  • और सुविधाओं की कमी

इन कारणों से उनका जीवन संघर्षमय बना हुआ है।

शिक्षक दिवस 2025, शिक्षामित्र धरना आगरा

सरकार की जिम्मेदारी

शिक्षामित्रों का कहना है कि सरकार को अब जल्द ही ठोस कदम उठाने होंगे।

  • यदि स्थायीकरण नहीं हुआ तो आंदोलन और बड़ा होगा।

  • शिक्षक दिवस जैसे पावन दिन पर धरना देना उनकी मजबूरी रही।

नतीजा और आगे की राह

धरने के बाद शिक्षामित्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी माँगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन प्रदेशभर में तेज़ किया जाएगा।

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