सामुदायिक सहभागिता से विद्यालय विकास – पुष्पा कुमारी के पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण का सार
आगरा DIET में NEP 2020, NCF 2023 और निपुण भारत मिशन पर पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण का समापन, शिक्षकों को बालक-केंद्रित और कौशल-आधारित शिक्षा में मार्गदर्शन।

सामुदायिक सहभागिता: विद्यालय विकास की दिशा – पुष्पा कुमारी ने शिक्षकों को प्रेरक प्रशिक्षण दिया
एस. शेरवानी, ब्यूरो चीफ़
आगरा, 26 सितम्बर 2025
आगरा। शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और प्रारंभिक शिक्षा में नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), आगरा में दिनांक 22 सितंबर से दसवें बैच का पांच दिवसीय एकीकृत प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से एत्मादपुर क्षेत्र के कक्षा पाँच तक के शिक्षकों के लिए आयोजित किया गया था।
समापन अवसर पर DIET प्राचार्य पुष्पा कुमारी ने शिक्षकों को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए और कहा, “हमारा लक्ष्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से अपने विद्यालय और क्षेत्र का समग्र विकास करना है। शिक्षा तभी सार्थक होगी जब शिक्षक, बच्चे और समाज मिलकर इसे सफल बनाएं।”
प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व

प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020), राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCF 2023) और निपुण भारत मिशन के अनुरूप शिक्षण कौशल विकसित करने के लिए आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की मूलभूत साक्षरता और गणना क्षमता को मजबूत करना और उन्हें जीवन-कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है।
इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान देने के लिए मार्गदर्शन दिया गया:
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भाषा शिक्षण और पुस्तकालय का उपयोग
विशेषज्ञ संदर्भदाता अनिल कुमार ने शिक्षकों को पुस्तकालय और स्थानीय संसाधनों के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्थानीय साहित्य और संसाधन बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को रोचक और प्रभावी बना सकते हैं। -
समावेशी शिक्षा और जीवन कौशल
संजीव सत्यार्थी ने समावेशी शिक्षा, नैतिक मूल्य, और जीवन कौशल पर जोर देते हुए शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार शिक्षा देने का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अकादमिक सफलता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होनी चाहिए। -
पाठ योजना और स्थानीय संसाधनों का उपयोग
प्रशिक्षण में शिक्षकों को सिखाया गया कि किस प्रकार स्थानीय संसाधनों, खेल-आधारित गतिविधियों और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से बच्चों की जिज्ञासा और सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। -
एनसीएफ 2023 और ‘प्लेफुल लर्निंग’
डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 को प्रशिक्षण से जोड़ते हुए बताया कि इसमें शिक्षा को बहुविषयक, जीवन से जुड़ा और कौशल-आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गतिविधि-आधारित शिक्षण और सतत मूल्यांकन को प्राथमिकता देना अब शिक्षा का मूल आधार बन गया है। -
निपुण भारत मिशन
संदर्भदाता धर्मेंद्र प्रसाद गौतम और यशवीर सिंह ने शिक्षकों को बताया कि इसका उद्देश्य कक्षा 3 तक के सभी बच्चों को पढ़ने, लिखने और गणना में दक्ष बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को बच्चों की सीखने की गति के अनुसार उपचारात्मक शिक्षण अपनाना चाहिए और बच्चों की प्रगति को सतत मूल्यांकन के माध्यम से मॉनिटर करना चाहिए।
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प्रशिक्षण के अंतिम दिन विशेष सत्र

पांचवें दिन प्रवक्ता पुष्पेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य सुरक्षा और एकीकृत शिक्षा पर विशेष सत्र आयोजित किया। इसके अलावा संजीव कुमार सत्यार्थी और डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने शिक्षकों को आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और यातायात सुरक्षा की ट्रेनिंग दी। इस अवसर पर सभी शिक्षकों ने यातायात सुरक्षा की शपथ ली, जो बच्चों और समुदाय दोनों के लिए सुरक्षा जागरूकता को बढ़ाने में मददगार साबित होगी।
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प्रशिक्षण का समग्र महत्व

यह प्रशिक्षण केवल शैक्षिक दृष्टिकोण को बदलने तक सीमित नहीं है। यह शिक्षकों को सृजनात्मक, अनुभवात्मक और बालक-केंद्रित शिक्षा अपनाने की प्रेरणा देता है। NEP 2020, NCF 2023 और निपुण भारत मिशन की सामूहिक भावना को जोड़ते हुए यह पहल प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में सहयोग

इस कार्यक्रम में हिमांशु सिंह, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रचना यादव, अबु मुहम्मद आसिफ, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, रंजना पांडे, मुकेश सिन्हा, गौरव भार्गव, लाल बहादुर सिंह और अमित दीक्षित ने भी सहयोग किया। समापन समारोह का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया।
निष्कर्ष
यह प्रशिक्षण न केवल शिक्षकों को नवीन शैक्षिक दृष्टिकोण और आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित कराता है, बल्कि उन्हें सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से अपने विद्यालय और क्षेत्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा भी देता है। इसके परिणामस्वरूप, प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
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