खेरागढ़ में अभिभावक-शिक्षक बैठक : शिक्षा पर फोकस
खेरागढ़ के कंपोजिट विद्यालय में माता उन्मुखीकरण के तहत अभिभावक-शिक्षक बैठक का आयोजन, बच्चों की शिक्षा और उपस्थिति पर हुई चर्चा।
खेरागढ़ में अभिभावक-शिक्षक बैठक, शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की नियमित उपस्थिति पर खास जोर
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ)-
खेरागढ़/आगरा।
सरकार की मंशा के अनुरूप बच्चों की शिक्षा को और बेहतर बनाने तथा अभिभावकों को स्कूल से जोड़ने के उद्देश्य से खेरागढ़ ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय खेरागढ़ प्रथम कंपोजिट में एक विशेष माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम और अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) का आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता विद्यालय की स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) अध्यक्ष श्रीमती मधु ने की। इस मौके पर मुख्य अतिथियों का फूल-माला पहनाकर और पट्टिका भेंट कर भव्य स्वागत किया गया।
सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की इंचार्ज और एसआरजी मीना पुष्कर ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने अभिभावकों को निपुण भारत मिशन समेत सरकार की कई योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने कहा—
“बच्चे देश का भविष्य हैं। यदि हम उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगे तो वे एक सशक्त और जागरूक नागरिक बनेंगे।”
बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने पर जोर
अभिभावकों को संबोधित करते हुए विद्यालय के शिक्षक राजकुमार शर्मा ने कहा कि बच्चों की शिक्षा तभी सफल हो सकती है जब वे नियमित रूप से विद्यालय आएं। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को हर दिन स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करें।
खेल-खेल में सीखने की पहल
मीना पुष्कर ने आगे कहा कि शिक्षा को रोचक और सरल बनाने के लिए खेल-खेल में पढ़ाने की पद्धति अपनाई जा रही है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को प्रेरित करें ताकि वे पढ़ाई में रुचि लें और विद्यालय आने को उत्साहित हों।
निपुण भारत मिशन पर चर्चा
कार्यक्रम में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई के लिए नए दिशा-निर्देश साझा किए गए। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy) में दक्ष बनाना है।
मीना पुष्कर ने शिक्षकों और अभिभावकों दोनों को समझाया कि यदि घर और स्कूल मिलकर बच्चों को मार्गदर्शन देंगे तो यह मिशन निश्चित रूप से सफल होगा।
उपस्थिति और ठहराव पर जोर
बैठक के दौरान विशेष चर्चा इस बात पर हुई कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति और ठहराव (Retention) को शत-प्रतिशत कैसे सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए शिक्षकों से कहा गया कि वे समय-समय पर अभिभावकों से संवाद बनाए रखें और बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए लगातार प्रेरित करें।
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अभिभावकों की भागीदारी
बैठक में शामिल हुए अभिभावकों ने भी अपने विचार रखे। कई माताओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें विद्यालय की गतिविधियों की जानकारी मिलती है और वे खुद को बच्चों की शिक्षा से अधिक जुड़ा हुआ महसूस करती हैं।
एक अभिभावक ने कहा—
“पहले हमें नहीं पता चलता था कि स्कूल में क्या हो रहा है, लेकिन इस तरह की बैठकें हमें बच्चों की प्रगति और शिक्षा की गुणवत्ता को समझने का अवसर देती हैं।”
माताओं और बच्चों को सम्मानित किया गया
कार्यक्रम में विशेष रूप से माताओं का सम्मान किया गया। उन्हें उपहार स्वरूप वस्तुएं दी गईं और विद्यालय की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका की सराहना की गई।
इसके साथ ही, विद्यालय के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को गिफ्ट देकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
सफल संचालन और आभार
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय की इंचार्ज एवं एसआरजी मीना पुष्कर ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यालय स्टाफ का धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक के समापन के बाद सभी के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई।
शिक्षा की ओर एक सकारात्मक कदम
यह अभिभावक-शिक्षक बैठक केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि शिक्षा के स्तर को सुधारने, बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
आज के समय में जब शिक्षा बच्चों का सबसे बड़ा हथियार है, ऐसे कार्यक्रम समाज को सही दिशा में ले जाते हैं। अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का यह पुल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
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