Agra Breaking: आगरा डायट में “रंगांजलि महोत्सव” का रंगीन शुभारंभ — शिक्षकों की कला और संस्कृति का हुआ भव्य संगम
आगरा के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में दो दिवसीय “रंगांजलि कला–क्राफ्ट–संस्कृति महोत्सव” का भव्य शुभारंभ हुआ। एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान व प्राचार्य पुष्पा कुमारी ने शिक्षकों की कलाकृतियों का अवलोकन कर कहा — “कला आत्मा की आवाज़ है।”

“रंगांजलि महोत्सव” में खिला शिक्षकों का सृजन—रंग, कला और संस्कृति का संगम
“कला शिक्षण को जीवन देती है, यह आत्मा की अभिव्यक्ति है” — एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान
रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 11 नवम्बर 2025
आगरा। ताज नगरी के हृदयस्थल जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा का परिसर सोमवार को रचनात्मकता, रंगों और संवेदनशीलता से सराबोर हो उठा। यहाँ हुआ दो दिवसीय “रंगांजलि कला–क्राफ्ट–संस्कृति महोत्सव” केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि शिक्षा में सृजनशीलता और संस्कृति के महत्व को समर्पित एक प्रेरणास्पद उत्सव बन गया।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि यमुनाधर चौहान (एडीएम सिटी, आगरा) और उप शिक्षा निदेशक/प्राचार्य श्रीमती पुष्पा कुमारी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर, मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। पूरे वातावरण में सरस्वती वंदना की मधुर ध्वनि गूंज उठी — जिसने इस आयोजन को एक आध्यात्मिक और सृजनशील आरंभ प्रदान किया।
कला के रंगों में शिक्षण की नई परिभाषा

इस “रंगांजलि महोत्सव” का उद्देश्य शिक्षकों की छिपी हुई रचनात्मक प्रतिभा को मंच देना, उनके कला-प्रेम को पहचानना और शिक्षा में सृजनात्मकता को नए आयाम देना था। इस बार 81 शिक्षकों ने अपने आवेदन भेजे, जिनमें से 70 श्रेष्ठ प्रविष्टियाँ चयनित होकर प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गईं।
इनमें पेंटिंग्स, स्कल्पचर, वॉल हैंगिंग, पपेट्स, लोककला आधारित मॉडल्स, और शैक्षिक संदेशों से युक्त हस्तनिर्मित वस्तुएं शामिल थीं। प्रदर्शनी में प्रत्येक कलाकृति शिक्षकों के भीतर बसे उस कलाकार की कहानी कह रही थी जो रोज़ बच्चों की मुस्कानों से प्रेरणा लेकर जीवन को रंगों में ढालता है।
“कला आत्मा की आवाज़ है” — एडीएम सिटी

मुख्य अतिथि यमुनाधर चौहान ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा –
“कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह समाज की आत्मा का प्रतिबिंब है। एक शिक्षक जितना सृजनशील होगा, उतना ही संवेदनशील समाज का निर्माण करेगा। रंगांजलि महोत्सव इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, यह भावनाओं और मूल्यों की भी शिक्षा है।”
उन्होंने शिक्षकों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की गहराई से प्रशंसा की और कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षा जगत को मानवीय दृष्टिकोण से जोड़ते हैं।
“कला से शिक्षण जीवंत हो जाता है” — उप शिक्षा निदेशक पुष्पा कुमारी
डायट प्राचार्य श्रीमती पुष्पा कुमारी ने कहा —
“शिक्षक जब कला के माध्यम से शिक्षा देते हैं, तो विषय केवल पढ़ाया नहीं जाता — जिया जाता है। रंगों, आकारों और प्रतीकों के माध्यम से बच्चा जीवन के गहरे अर्थों को समझने लगता है। रंगांजलि महोत्सव यही सिखाता है कि सृजनशील शिक्षक ही वास्तविक परिवर्तनकर्ता होता है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रदर्शनी ने शिक्षकों को अपनी कल्पनाशक्ति को व्यक्त करने का एक सशक्त मंच दिया है और आने वाले समय में डायट आगरा इसे वार्षिक परंपरा के रूप में विकसित करेगा।
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“शिक्षक रचनात्मकता के ध्वजवाहक हैं” — डॉ. डी. के. गुप्ता
कार्यक्रम के नोडल प्रभारी डॉ. डी.के. गुप्ता (प्रवक्ता, डायट आगरा) ने कहा —
“रंगांजलि का उद्देश्य केवल कला प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों की उस रचनात्मक ऊर्जा का उत्सव है जो शिक्षा की जड़ों में प्राण फूंकती है। हमारे शिक्षक सिर्फ ज्ञान नहीं देते, वे संस्कृति, संवेदना और सौंदर्यबोध भी बच्चों तक पहुंचाते हैं।”
उन्होंने बताया कि इस महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षण तभी प्रभावी बनता है जब उसमें कला का समावेश हो।
प्रदर्शनी में झलकी रचनात्मक विविधता

प्रदर्शनी में दर्शकों ने शिक्षकों की विविध कलाकृतियों का अवलोकन किया।
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प्राकृतिक जीवन से प्रेरित चित्र,
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लोक कला और अमूर्तन कला,
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आधुनिक एवं धार्मिक चित्रांकन,
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सांस्कृतिक प्रतीक एवं शिक्षा से जुड़ी मॉडल प्रदर्शनी,
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हस्तनिर्मित पपेट्स एवं क्राफ्ट्स,
हर कृति ने यह संदेश दिया कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक संवेदना और शिक्षण का गहरा साधन है।
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एकता और संस्कृति का जीवंत उत्सव

पूरे आयोजन के दौरान डायट आगरा का परिसर मानो “कला के मेले” में बदल गया था। हर ओर रंग, रूप और सृजन की ऊर्जा बिखरी हुई थी।
शिक्षकों ने एक-दूसरे की कलाकृतियों से प्रेरणा ली और यह साझा भावना प्रकट की कि कला शिक्षक को मानवीय बनाती है, संवेदना से जोड़ती है और विद्यार्थियों के जीवन को अर्थ देती है।
कार्यक्रम का संचालन धर्मेंद्र प्रसाद गौतम (प्रवक्ता, डायट आगरा) ने किया।
इस दौरान डॉ. मनोज वार्ष्णेय, यशवीर सिंह, अनिल कुमार, हिमांशु सिंह, मीना पुष्कर, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, रचना यादव, कल्पना सिन्हा, आकांक्षा लवानिया, गौरव भार्गव, अमित दीक्षित सहित अनेक प्रशिक्षु व शिक्षक उपस्थित रहे।
कला, संस्कृति और शिक्षा का संगम बना “रंगांजलि”
महोत्सव का समापन सरस्वती वंदना और सामूहिक गीत के साथ हुआ।
कार्यक्रम में ब्रोशर का विमोचन करते हुए अतिथियों ने कहा कि “कला, संस्कृति और शिक्षा का यह समन्वय ही भारत की असली पहचान है। यह महोत्सव न केवल शिक्षकों को प्रेरित करेगा बल्कि बच्चों में भी सृजनशीलता और संस्कृति के प्रति लगाव बढ़ाएगा।”
“रंगांजलि” ने यह साबित कर दिया कि जब शिक्षक रचता है — तब शिक्षा खिल उठती है।
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