खेरागढ़ में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर बच्चों ने सीखा सपना देखने का साहस | “कलाम, आपको दिल से सलाम”
खेरागढ़ के प्राथमिक विद्यालय कछपुरा में मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती भावनात्मक रूप से मनाई गई। शिक्षकों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेकर बच्चों को सपनों, विज्ञान और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया।

“कलाम, आपको दिल से सलाम” — खेरागढ़ के विद्यालय में मिसाइल मैन की जयंती पर बच्चों ने सीखा सपना देखने का साहस
रिपोर्ट — एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
खेरागढ़ / आगरा | 15 अक्टूबर 2025
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर भावनाओं और प्रेरणा से भरा आयोजन
खेरागढ़ विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय कछपुरा, सरेंडा में सोमवार को भारत के सबसे प्रिय राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और युवाओं के मार्गदर्शक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती को असाधारण उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
विद्यालय के प्रांगण में तिरंगे झंडे की छाया में बच्चों की मुस्कुराहट और शिक्षकों की आंखों में झलकती गर्व की चमक — सब कुछ यह दर्शा रहा था कि यह दिन सिर्फ एक स्मृति नहीं, बल्कि एक प्रेरणा पर्व है।
सादगी से भरा शुभारंभ, आदर से भरा वातावरण
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाध्यापक डॉ. सतीश कुमार ने दीप प्रज्वलन और डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके की।
उन्होंने कहा —
“डॉ. कलाम ने सिखाया कि जीवन का उद्देश्य केवल सफलता नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन को बेहतर बनाना है।”
विद्यालय के बच्चों ने “भारत को स्वर्ग बनाने का सपना” नामक समूह गीत गाया।
स्कूल की छोटी बच्चियों ने “विंग्स ऑफ फायर” पर आधारित लघु नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे एक साधारण परिवार का बेटा अपने कठोर परिश्रम, अनुशासन और विश्वास से देश का सबसे बड़ा वैज्ञानिक बन गया।
“डॉ. कलाम हर बच्चे के दिल में बसे हैं” — डॉ. सतीश कुमार

अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. सतीश कुमार ने कहा —
“डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केवल एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने हमें यह सिखाया कि सपने देखने वाले ही इतिहास बदलते हैं।”
उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहते हुए हमेशा शिक्षा और युवा शक्ति को प्राथमिकता दी।
उनका संदेश था —
“देश का असली धन उसके युवा हैं। अगर वे जागरूक, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेंगे तो भारत दुनिया में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करेगा।”
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सपनों से साकार हुआ भारत का मिसाइल प्रोग्राम
शिक्षक मोहित वर्मा ने डॉ. कलाम के वैज्ञानिक जीवन का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा —
“उन्होंने बचपन में अखबार बेचते हुए जो ईमानदारी सीखी, वही उनके वैज्ञानिक जीवन की आधारशिला बनी।”
उन्होंने छात्रों को बताया कि कलाम साहब ने DRDO में शुरुआत की और फिर ISRO में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III)** का निर्माण किया।
1980 में “रोहिणी उपग्रह” के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
इसके बाद उन्होंने अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल, और नाग जैसी मिसाइलों के विकास का नेतृत्व किया, जिसके कारण वे “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” कहलाए।
उनकी भूमिका पोखरण परमाणु परीक्षण 1998 में भी ऐतिहासिक रही, जिसने भारत को एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।
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कलाम की लेखनी: जो आज भी पीढ़ियों को दिशा देती है

शिक्षक राकेश कुमार ने कहा —
“कलाम साहब ने न केवल विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति की, बल्कि शिक्षा और विचार की शक्ति से करोड़ों दिलों को बदल दिया।”
उन्होंने छात्रों को बताया कि डॉ. कलाम की किताबें —
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Wings of Fire
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India 2020
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Ignited Minds
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My Journey
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A Vision for the New Millennium
आज भी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में प्रेरणास्रोत हैं।
इन पुस्तकों में डॉ. कलाम ने लिखा —
“अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखिए।”
सम्मान, सादगी और सच्ची सेवा का प्रतीक
डॉ. कलाम को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए
पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990) और भारत रत्न (1997) से सम्मानित किया गया।
लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान था — लाखों बच्चों के चेहरों पर उभरती मुस्कान और युवाओं के भीतर जगती आशा की लौ।
27 जुलाई 2015 को, जब वे शिलांग में छात्रों को व्याख्यान दे रहे थे, तब वे मंच पर ही गिर पड़े।
उनकी आत्मा आज भी हर विद्यार्थी के सपनों में जीवित है।
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विद्यालय परिसर में श्रद्धांजलि और प्रेरणा की गूंज
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
प्रधानाध्यापक डॉ. सतीश कुमार ने कहा —
“कलाम साहब की तरह हमें भी खुद पर भरोसा रखना चाहिए। वे हमें याद दिलाते हैं कि सच्ची सफलता वही है, जो दूसरों के जीवन को रोशन करे।”
छात्रों ने पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लिया — विषय था “My Dream for India”।
बच्चों के रंगों और विचारों ने कलाम के सपनों को फिर से जीवंत कर दिया।
कई छात्रों ने कहा कि वे आगे चलकर वैज्ञानिक, शिक्षक या सेना अधिकारी बनना चाहते हैं — ताकि वे अपने देश की सेवा कर सकें।
संदेश: “हर बच्चा एक सपना है, हर सपना एक भविष्य”
डॉ. कलाम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि गरीबी, सीमाएँ या संघर्ष किसी की उड़ान नहीं रोक सकते।
उनकी प्रेरणा से आज भी लाखों युवा “विंग्स ऑफ फायर” लेकर आसमान छूने का सपना देखते हैं।
विद्यालय के आँगन में बच्चों की आंखों की चमक देखकर यह साफ था कि —
“कलाम चले गए, पर उनके सपने अभी जीवित हैं।”
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