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नारी अस्मिता समिति ने बच्चों को सिखाया पर्यावरण संरक्षण

आगरा में नारी अस्मिता समिति ने कंपोजिट विद्यालय बसई खुर्द में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश दिया।

पर्यावरण की जागरूकता बढ़ाने हेतु नारी अस्मिता समिति संस्था आई आगे

 

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)-

आगरा समाचार

आगरा। ताज नगरी आगरा में स्वतंत्रता और संस्कृति जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है पर्यावरण संरक्षण। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए नारी अस्मिता समिति संस्था ने कंपोजिट विद्यालय बसई खुर्द में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण जागरूकता, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवन के महत्व से परिचित कराना था।

बच्चों को दी पर्यावरण संरक्षण की सीख

विद्यालय प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में समिति की सदस्याओं ने बच्चों को समझाया कि कैसे प्लास्टिक हमारे जीवन और प्रकृति के लिए खतरा बन चुका है।

  • बच्चों को बताया गया कि प्लास्टिक का उपयोग कम करें और कपड़े या जूट के बैग अपनाएं।

  • साथ ही, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने पर जोर दिया गया ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वायु और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

समिति की सदस्याओं ने सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि यदि प्रत्येक बच्चा साल में एक पौधा भी लगाकर उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण को बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है।

नारी अस्मिता समिति, पर्यावरण संरक्षण

गमलों और बीजों का वितरण

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब था जब विद्यालय के लगभग 51 बच्चों को गमले और बीज वितरित किए गए। प्रत्येक बच्चे को न केवल बीज दिया गया बल्कि उन्हें रोपण की सही विधि भी सिखाई गई।

बच्चों को बताया गया कि –

  • बीज बोने के बाद रोजाना उसमें पानी देना आवश्यक है।

  • पौधे को धूप और छाया की जरूरत के अनुसार सही जगह पर रखना चाहिए।

  • मिट्टी को नमी बनाए रखना पौधे की लंबी उम्र के लिए जरूरी है।

समिति ने बच्चों से वादा किया कि जो बच्चा अगले 15 दिनों तक अपने पौधे की नियमित देखभाल करेगा और उसका पौधा स्वस्थ रूप से बढ़ेगा, उसे विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा

बच्चों की आंखों में अपने पौधे को बड़ा होते देखने की खुशी साफ झलक रही थी। कई बच्चों ने तुरंत बीज बोने का संकल्प लिया और अपने पौधे को “दोस्त” का नाम दिया।

विद्यालय की प्रधानाध्यापक शशिकला शर्मा ने कहा –
“बच्चों को केवल किताबों में पर्यावरण का पाठ पढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें प्रकृति से जोड़ना और जिम्मेदारी का एहसास कराना आवश्यक है। नारी अस्मिता समिति का यह प्रयास सराहनीय है।”

नारी अस्मिता समिति, पर्यावरण संरक्षण

अतिथियों का सम्मान और सहभागिता

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में कर्ण सिंह धाकड़ (शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि) मौजूद रहे। उनका सम्मान समिति की संरक्षक आकांक्षा शर्मा और विद्यालय की प्रधानाध्यापक शशिकला शर्मा ने किया।

इसके अलावा समिति की अध्यक्ष किरण उपाध्याय और सचिव पंकज मिश्रा ने विद्यालय के शिक्षकों को पौधे देकर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक प्रतीक था – “शिक्षक ही वह शक्ति हैं जो बच्चों में पर्यावरण प्रेम की जड़ें मजबूत कर सकते हैं।”

समिति की सक्रिय भूमिका

नारी अस्मिता समिति की उपाध्यक्ष अनुराधा अग्रवाल और सदस्याएँ – रचना अग्रवाल, कुसुम, सरोज, दीपाली, नीतू, ममता, प्रियंका और दीपिका प्रवीण गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

सभी ने मिलकर बच्चों को पौधों की देखभाल के तरीके बताए और अपने अनुभव साझा किए। समिति की सदस्याओं ने बच्चों को यह भी समझाया कि यदि हम आज पर्यावरण की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाले समय में हमें जल संकट, वायु प्रदूषण और असंतुलित जलवायु जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश

कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या संस्थाओं का दायित्व नहीं है।

  • हर व्यक्ति को अपने स्तर पर योगदान देना चाहिए।

  • छोटे-छोटे प्रयास जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, पेड़-पौधे लगाना, पानी की बचत करना मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।

बच्चों ने भी इस अवसर पर यह संकल्प लिया कि वे अपने आस-पास सफाई रखेंगे, प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे और हर साल कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएंगे।

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15 दिन बाद पुरस्कार का वादा

समिति ने बच्चों को भरोसा दिलाया कि 15 दिन बाद पौधों की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा।

  • जिस बच्चे ने सबसे अच्छे तरीके से अपने पौधे को संरक्षित किया होगा, उसे समिति की ओर से विशेष पुरस्कार दिया जाएगा।

  • इस पहल का मकसद केवल पौधे लगवाना नहीं बल्कि बच्चों में निरंतरता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।

भविष्य के लिए प्रेरणादायी कदम

इस कार्यक्रम के माध्यम से नारी अस्मिता समिति ने यह दिखा दिया कि यदि समाज की महिलाएं और संस्थाएं आगे आएं तो पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई जा सकती है।

संरक्षक आकांक्षा शर्मा ने कहा –
“नारी केवल घर की संरक्षिका नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति की संरक्षिका भी है। यदि महिलाएं बच्चों को सही दिशा देंगी तो निश्चित ही पर्यावरण को नया जीवन मिलेगा।”

निष्कर्ष

कंपोजिट विद्यालय बसई खुर्द में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक रहा बल्कि पूरे समाज को एक मजबूत संदेश भी दिया –
“प्लास्टिक छोड़ो, पेड़ लगाओ और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य दो।”

नारी अस्मिता समिति की यह पहल साबित करती है कि सामूहिक प्रयास से ही पर्यावरण संरक्षण संभव है।

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