मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में गुड टच और बैड टच पर हुआ सेमिनार | बाल सुरक्षा और आत्म-सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में मिशन शक्ति 5.0 के तहत “गुड टच और बैड टच” पर सेमिनार आयोजित। एडवोकेट नम्रता मिश्रा, प्रो. अचला गक्खड़ व अन्य विशेषज्ञों ने छात्रों को आत्म-सुरक्षा, कानूनी जागरूकता और साइबर सुरक्षा के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।

“मिशन शक्ति 5.0” के तहत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में ‘गुड टच और बैड टच’ विषय पर प्रेरणादायक सेमिनार — बाल सुरक्षा और आत्म-सुरक्षा पर हुआ गहन विमर्श
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 16 अक्टूबर 2025
आगरा। समाज में बदलते परिवेश और डिजिटल युग के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता को लेकर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में एक अनूठा और सार्थक प्रयास किया गया। “मिशन शक्ति फेज-5.0” के अंतर्गत गृह विज्ञान संस्थान द्वारा “गुड टच और बैड टच” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को आत्म-सुरक्षा, सही और गलत स्पर्श की पहचान, और कानूनी जानकारी से सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ एवं प्रेरणास्रोत नेतृत्व

सेमिनार की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जो ज्ञान, चेतना और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में एक भावनात्मक क्षण था।
यह आयोजन राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा और कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि इसकी रूपरेखा और संचालन प्रो. अचला गक्खड़, निदेशक, गृह विज्ञान संस्थान एवं मिशन शक्ति नोडल अधिकारी, के नेतृत्व में किया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. अचला गक्खड़ ने कहा —
“बच्चों को सिर्फ शिक्षित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें यह सिखाना भी जरूरी है कि कब और कैसे अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करनी है। गुड टच और बैड टच की समझ हर बच्चे के जीवन की नींव है।”
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कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से आत्म-सुरक्षा पर मार्गदर्शन
संगोष्ठी की मुख्य वक्ता एडवोकेट नम्रता मिश्रा (आगरा) ने छात्रों को “गुड टच” और “बैड टच” के कानूनी पहलुओं पर बेहद सरल और प्रभावशाली तरीके से जानकारी दी।
उन्होंने POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences), बाल अधिकार कानून, और चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के उपयोग की विस्तार से व्याख्या की।
नम्रता मिश्रा ने कहा —
“बच्चों को डराने की नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाने की जरूरत है। हर बच्चा अगर जागरूक होगा तो समाज सुरक्षित होगा।”
सत्र के अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों को “बाल सुरक्षा की शपथ” (Oath of Safety) दिलाई, जिसमें बच्चों ने यह प्रतिज्ञा ली कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे और किसी भी गलत व्यवहार की स्थिति में आवाज उठाएंगे।
शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंटरी और इंटरएक्टिव संवाद
इसके बाद बच्चों को एक प्रभावशाली डॉक्यूमेंटरी फिल्म दिखाई गई, जिसमें वास्तविक घटनाओं के माध्यम से यह समझाया गया कि कैसे छोटे-छोटे संकेतों से गलत व्यवहार की पहचान की जा सकती है।
महिला प्रकोष्ठ की पूर्व सदस्य निर्मला दीक्षित ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बच्चों को खुला वातावरण और संवाद की आजादी देना ही उन्हें सुरक्षित बनाता है।
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वर्चुअल सुरक्षा और डिजिटल स्पेस में सजगता

डॉ. नेहा सक्सेना, असिस्टेंट प्रोफेसर, गृह विज्ञान संस्थान, ने “वर्चुअल दुनिया में गुड टच और बैड टच” पर एक रोचक सत्र लिया। उन्होंने बताया कि कैसे सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और चैटिंग प्लेटफ़ॉर्म्स के ज़रिए गलत व्यवहार की शुरुआत होती है, और बच्चों को साइबर सतर्कता क्यों ज़रूरी है।
उन्होंने कहा —
“ऑनलाइन दुनिया उतनी ही खतरनाक है जितनी वास्तविक दुनिया — बच्चों को डिजिटल स्वच्छता (Digital Hygiene) सिखाना आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।”
वहीं डॉ. अनुपमा गुप्ता ने “सेफ टच और अनसेफ टच” के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए बच्चों को अपने अनुभव साझा करने, संवाद बनाए रखने और किसी भी असहज स्थिति में भरोसेमंद वयस्क से संपर्क करने की सलाह दी।
347 विद्यार्थियों की सहभागिता — आत्मविश्वास से भरे चेहरे

सेमिनार में 185 छात्र और 162 छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने खुलकर अपनी जिज्ञासाएँ व्यक्त कीं और वक्ताओं से सवाल पूछे।
सौरभ निषाद, प्रधानाचार्य, यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास को मजबूत बनाती हैं।
कार्यक्रम के संचालन का दायित्व डॉ. प्रीति यादव और डॉ. कविता सिंह ने बखूबी निभाया, जबकि समापन सत्र में प्रो. अर्चना सिंह, डीन गृह विज्ञान एवं महिला प्रकोष्ठ समन्वयक, ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर प्रो. भूपेन्द्र स्वरूप शर्मा (डीन, छात्र कल्याण, डी.बी.आर.ए.यू.), श्रीमती स्नेहलता (उपाध्यक्ष, यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल), निर्मला दीक्षित (पूर्व सदस्य, महिला आयोग) सहित कई शिक्षाविद् और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम की सफलता में डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. संघमित्रा गौतम, डॉ. दीप्ति सिंह और डॉ. प्रिया यादव का विशेष योगदान रहा।
निष्कर्ष — बाल सुरक्षा की दिशा में सशक्त पहल

यह संगोष्ठी सिर्फ एक सेमिनार नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत थी। इसने छात्रों को आत्म-सुरक्षा की दिशा में न केवल जागरूक किया, बल्कि उन्हें आत्म-विश्वास, साहस और संवाद की शक्ति भी दी।
मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत ऐसे आयोजन यह साबित करते हैं कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञान नहीं, बल्कि सुरक्षा और संवेदनशीलता का संस्कार देना है।
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