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आगरा में जिला पोषण समिति बैठक, बच्चों व महिलाओं के स्वास्थ्य पर जोर

सीडीओ प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति बैठक सम्पन्न, कुपोषित बच्चों की पहचान, ई-कवच पोर्टल पर निगरानी और पोषण स्तर सुधार पर निर्देश।

आगरा में जिला पोषण समिति की बैठक सम्पन्न, सीडीओ ने दिए कुपोषण मिटाने के कड़े निर्देश

ब्यूरो चीफ़ एस. शेरवानी।

आगरा, 21 अगस्त 2025।

आगरा विकास भवन सभागार में आज जिला पोषण समिति एवं कन्वर्जेन्स विभागों की समीक्षा बैठक मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) श्रीमती प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के पोषण स्तर में सुधार करना और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की समीक्षा करना था।

सीडीओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पोषण और स्वास्थ्य दोनों सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं और इसलिए हर विभाग को परस्पर तालमेल बनाकर काम करना होगा।

कुपोषण पर सीडीओ का फोकस – समय पर पुष्टाहार और स्वास्थ्य सुविधाएं

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि पोषण अभियान के तहत हर पात्र महिला और बच्चे को समय से पुष्टाहार (Supplementary Nutrition) उपलब्ध कराया जाए।

  • गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को समय पर आयरन, फोलिक एसिड और पौष्टिक आहार दिया जाए।

  • बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए।

  • किशोरियों को एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत आयरन की गोलियां और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया जाए।

सीडीओ ने कहा कि बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी की जाए, ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान हो सके।

पोषण समिति, जिला पोषण समिति, सीडीओ, प्रतिभा सिंह

कुपोषित बच्चों की पहचान और ई-कवच पोर्टल पर निगरानी

बैठक में सीडीओ ने विशेष जोर देकर कहा कि जिले में कुपोषित बच्चों (MAM और SAM) की पहचान की जाए और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सा व पोषण सुविधाएं दी जाएं।

  • MAM (Moderately Acute Malnutrition) और SAM (Severely Acute Malnutrition) बच्चों को चिन्हित कर उन्हें आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से जोड़ा जाए।

  • सभी बच्चों का विवरण ई-कवच पोर्टल (E-Kavach Portal) पर फीड किया जाए।

  • इससे बच्चों की परस्पर निगरानी (Convergence Monitoring) हो सकेगी और किसी भी बच्चे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुपोषित बच्चों को नियमित चिकित्सा जांच, पौष्टिक आहार और परामर्श दिया जाए।

किशोरियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि किशोरियों का स्वास्थ्य और पोषण समाज की नींव को मजबूत करने में अहम है। सीडीओ ने कहा कि—

  • किशोरियों को स्कूल और आंगनबाड़ी स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता सत्र दिए जाएं।

  • मासिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर किशोरियों को परामर्श और आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

  • उन्हें स्वच्छता, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाए।

पोषण समिति, जिला पोषण समिति, सीडीओ, प्रतिभा सिंह

परस्पर निगरानी और विभागीय तालमेल पर जोर

बैठक में सीडीओ ने कहा कि पोषण सुधार का काम अकेले महिला एवं बाल विकास विभाग का नहीं है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, पंचायतीराज, शिक्षा, खाद्य एवं रसद, मनरेगा और अन्य कन्वर्जेन्स विभागों को भी सक्रिय सहयोग करना होगा।

उन्होंने कहा कि सभी विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि—

  1. पोषण सामग्री समय पर सभी तक पहुँचे।

  2. स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से हो।

  3. कुपोषण की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

जागरूकता अभियान – समुदाय की भूमिका अहम

सीडीओ ने यह भी कहा कि पोषण स्तर सुधारने के लिए केवल सरकारी योजनाएँ काफी नहीं हैं। इसके लिए समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है।

  • गांव-गांव में जागरूकता बैठकें आयोजित हों।

  • माताओं को यह बताया जाए कि बच्चों को संतुलित आहार और स्वच्छ पानी कितना जरूरी है।

  • किशोरियों को समझाया जाए कि कुपोषण और एनीमिया से बचाव के लिए सही आहार और स्वास्थ्य आदतें अपनाना कितना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो कुपोषण जैसी चुनौती पर तेजी से काबू पाया जा सकता है।

पोषण समिति, जिला पोषण समिति, सीडीओ, प्रतिभा सिंह

बैठक में शामिल अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में उपायुक्त मनरेगा, उपायुक्त स्वतः रोजगार, जिला पंचायतराज अधिकारी, पूर्ति निरीक्षक, यूनिसेफ के डीएमसी राहुल कुलश्रेष्ठ, जिला कार्यक्रम अधिकारी और सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी मौजूद रहे।

सभी अधिकारियों को सीडीओ ने निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएँ और नियमित फील्ड विज़िट कर यह सुनिश्चित करें कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुँच रहा है।

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मानवीय दृष्टिकोण – ग्रामीण महिलाओं की उम्मीदें

बैठक के दौरान यह भी चर्चा में आया कि ग्रामीण इलाकों की महिलाएँ और माताएँ अब पोषण के महत्व को समझने लगी हैं। कई गांवों में महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त पुष्टाहार को सही तरीके से इस्तेमाल कर रही हैं।

हालांकि, कुछ जगहों पर अभी भी अनियमित वितरण, जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता जैसी चुनौतियाँ हैं। सीडीओ ने भरोसा दिलाया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा।

निष्कर्ष

आगरा में आयोजित जिला पोषण समिति एवं कन्वर्जेन्स विभागों की बैठक ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रशासन कुपोषण और महिलाओं-बच्चों के स्वास्थ्य सुधार को लेकर गंभीर है।

मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह के निर्देशों से साफ है कि आने वाले दिनों में—

  • कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी होगी।

  • ई-कवच पोर्टल पर डेटा अपडेट कर पारदर्शिता लाई जाएगी।

  • गर्भवती महिलाओं, माताओं और किशोरियों को पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।

  • विभागीय तालमेल और सामुदायिक सहभागिता के जरिए कुपोषण पर नियंत्रण पाया जाएगा।

इस बैठक ने यह भी संदेश दिया कि पोषण सुधार केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक आंदोलन है। और यदि सभी विभाग और समाज मिलकर प्रयास करें तो आगरा जल्द ही कुपोषण मुक्त जिले की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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