साहसी मां रीमा ने बचाई बेटी, 25 हजार की सहायता व सम्मान
आगरा की बाह तहसील की रीमा ने जंगली जानवर से बेटी को बचाया। जिला प्रशासन ने 25 हजार रुपये की सहायता राशि व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
आगरा.28.08.2025
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) –
आगरा। आगरा जिले की बाह तहसील के जैतपुर ब्लॉक के नौगवां गांव में घटी एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। लेकिन इस दुखद घटना में एक महिला ने अपनी साहसिकता और मातृत्व का परिचय देते हुए अपनी मासूम बेटी की जान बचाकर सभी को गर्व महसूस कराया। यह महिला और कोई नहीं बल्कि नौगवां निवासी श्रीमती रीमा पत्नी आशीष कुमार हैं, जिन्होंने न केवल अपनी बच्ची को मौत के मुंह से खींच लिया बल्कि महिला शक्ति और मातृत्व के महत्व का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने इस साहसी मां को सम्मानित करने का निर्णय लिया। बुधवार को बाह तहसील में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी बाह हेमंत कुमार बिंद, नायब तहसीलदार सुधीर गिरी, ब्लॉक प्रमुख बाह लाल सिंह चौहान और सांसद प्रतिनिधि मुन्ना लम्बरदार ने रीमा को 25 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक प्रदान किया। इसके अलावा शॉल ओढ़ाकर व मिष्ठान देकर उन्हें सम्मानित भी किया गया।
घटना का विवरण : साहस और मातृत्व का संगम
घटना 20 अगस्त 2025 को घटी जब रीमा की छोटी बेटी अर्पिता अपने घर के आंगन में खेल रही थी। अचानक से दीवार फांदकर एक हिंसक वन्यजीव (जंगली जानवर) घर के भीतर आ धमका और उसने मासूम बच्ची पर हमला कर दिया। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर मां रीमा दौड़कर मौके पर पहुँची।
रीमा ने बिना किसी भय और हिचकिचाहट के उस खतरनाक जंगली जानवर का सामना किया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जानवर से भिड़कर बच्ची को उसके चंगुल से छुड़ाया। यह संघर्ष इतना खतरनाक था कि बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई और उसे तत्काल इलाज के लिए सैफई मेडिकल हॉस्पिटल भेजा गया।
इलाज और बच्ची की हालत
घटना में घायल हुई अर्पिता को 20 अगस्त से लेकर 26 अगस्त तक सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती रखा गया। चिकित्सकों की कड़ी मेहनत और परिवार की दुआओं के बाद बच्ची की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और आखिरकार 26 अगस्त को उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अब बच्ची खतरे से बाहर है और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रही है।
सम्मान समारोह का दृश्य
सम्मान समारोह का दृश्य बेहद भावुक करने वाला था। जैसे ही अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने रीमा को 25 हजार रुपये का चेक और सम्मानस्वरूप शॉल व मिठाई भेंट की, पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। ग्रामीणों ने इस सम्मान को सही मायनों में महिला शक्ति और मातृत्व की जीत करार दिया।
उपजिलाधिकारी बाह हेमंत कुमार बिंद ने इस मौके पर कहा –
“रीमा जी ने जिस तरह से अपनी बच्ची की जान बचाई है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रशासन उनकी इस बहादुरी को नमन करता है और आगे भी हर संभव मदद करेगा।”
वहीं ब्लॉक प्रमुख बाह लाल सिंह चौहान ने कहा कि रीमा का साहस हर महिला के लिए मिसाल है। मातृत्व की शक्ति से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं और रीमा ने यह साबित कर दिया है।
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
गांव में खुशी और गर्व का माहौल
रीमा के साहस की चर्चा पूरे नौगवां गांव ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में हो रही है। गांव के लोग गर्व से कहते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को बचाने के साथ-साथ हर मां के आत्मविश्वास को मजबूत किया है।
महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण
यह घटना केवल एक मां-बेटी की कहानी नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) का सशक्त उदाहरण है। अक्सर समाज में महिलाएं कमजोर समझी जाती हैं, लेकिन जब बात अपने बच्चों की आती है तो वे किसी से भी भिड़ सकती हैं।
रीमा का यह साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा। साथ ही यह संदेश भी देगा कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस से हर समस्या का समाधान संभव है।
प्रशासन और समाज की जिम्मेदारी
इस घटना ने एक और सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण इलाकों में अक्सर जंगली जानवरों का आतंक देखने को मिलता है। प्रशासन को चाहिए कि गांवों के आसपास ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। वहीं ग्रामीणों को भी सतर्क रहना होगा और बच्चों पर विशेष ध्यान देना होगा।
रीमा का धन्यवाद संदेश
सम्मान पाकर रीमा भावुक हो गईं। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का धन्यवाद करते हुए कहा –
“मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि मेरी बच्ची अब सुरक्षित है। मैंने जो किया, वह किसी भी मां की जिम्मेदारी होती। प्रशासन और समाज ने मुझे जो सम्मान दिया है, वह मेरे लिए जीवन भर की पूंजी है।”
CHECK ALSO:
खेरागढ़ में FLN प्रशिक्षण: शिक्षकों को नई सीख मिली




