प्रयोगों से विज्ञान की समझ, नवाचार से नई उड़ान: मानिकपुरा विद्यालय में ‘Learning by Doing’ से बच्चों में विकसित हो रही वैज्ञानिक सोच
पिनाहट के उच्च प्राथमिक विद्यालय में विद्यार्थी खुद बना रहे स्मार्ट मॉडल, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से सीख रहे विज्ञान; वैज्ञानिक सोच के साथ बढ़ रहा आत्मविश्वास
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 29 अगस्त 2026। विज्ञान को अगर सिर्फ किताबों में पढ़ने के बजाय प्रयोग करके समझा जाए तो सीखने का अनुभव कहीं अधिक रोचक और प्रभावी हो सकता है। इसी सोच को जमीन पर उतारने की पहल आगरा के विकासखंड पिनाहट स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय मानिकपुरा में देखने को मिल रही है। यहां विद्यार्थियों को विज्ञान की अवधारणाएं समझाने के लिए ‘Learning by Doing’ यानी करके सीखने की पद्धति को प्रभावी रूप से अपनाया जा रहा है।
विद्यालय में बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तक की जानकारी तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वयं प्रयोग करने, मॉडल तैयार करने, तकनीक को समझने और रोजमर्रा की समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तलाशने का अवसर दिया जा रहा है। इस गतिविधि आधारित पहल से बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा के साथ-साथ रचनात्मकता, तार्किक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित हो रही है।
विज्ञान की कक्षा अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं
उच्च प्राथमिक विद्यालय मानिकपुरा में स्थापित गतिविधि आधारित विज्ञान प्रयोगशाला बच्चों के लिए सीखने का एक अलग अनुभव तैयार कर रही है। यहां विद्यार्थी विभिन्न वैज्ञानिक अवधारणाओं को स्वयं प्रयोग करके समझने का प्रयास करते हैं।
विद्यालय में विद्यार्थियों ने अपनी सीख और रचनात्मकता के आधार पर कई उपयोगी मॉडल तैयार किए हैं। इनमें स्वचालित ऊंचाई मापन प्रणाली, स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था, बाधा से बचने वाला रोबोट, आवाज से नियंत्रित कार, स्वचालित कूड़ेदान, स्वचालित टोल गेट और जल आधारित खेती प्रणाली जैसे मॉडल शामिल हैं।
इन मॉडलों के माध्यम से बच्चों को यह समझने का अवसर मिलता है कि किसी तकनीकी व्यवस्था के पीछे कौन-सा वैज्ञानिक सिद्धांत काम करता है और वास्तविक जीवन की किसी समस्या को तकनीक की मदद से किस तरह हल किया जा सकता है।
मॉडल बनाने से आगे, उसकी कार्यप्रणाली समझ रहे बच्चे
विद्यालय की खास पहल यह है कि बच्चों को केवल तैयार मॉडल दिखाकर उसकी जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें मॉडल बनाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
विद्यार्थी पहले समस्या को समझते हैं, फिर उसके संभावित समाधान पर विचार करते हैं। इसके बाद आवश्यक सामग्री का चयन, माप, निर्माण, प्रयोग और परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरते हैं। प्रयोग के दौरान यदि कोई गलती सामने आती है तो बच्चे उसे पहचानकर मॉडल में आवश्यक सुधार करने का प्रयास करते हैं।
इस प्रक्रिया से बच्चों में यह समझ विकसित हो रही है कि विज्ञान केवल सही उत्तर याद करने का विषय नहीं है, बल्कि सवाल पूछने, प्रयोग करने, परिणाम देखने और गलती से सीखने की प्रक्रिया भी है।
सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से तकनीक की समझ
‘Learning by Doing’ गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों को तकनीकी उपकरणों के साथ काम करने का भी अवसर मिल रहा है।
बच्चे पीवीसी पाइप की माप और कटिंग, इलेक्ट्रॉनिक परिपथ तैयार करने, सेंसर जोड़ने, नियंत्रक उपकरण में प्रोग्राम डालने और जल आधारित खेती प्रणाली में जल प्रवाह का परीक्षण जैसी गतिविधियां करते हैं।
इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को माप, विद्युत परिपथ, सेंसर और स्वचालन जैसी अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिल रहा है।
मिट्टी और पानी की जांच से सीख रहे पर्यावरण विज्ञान
विद्यालय में विज्ञान शिक्षण को स्थानीय परिवेश से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को जल एवं मिट्टी परीक्षण, वर्मी कम्पोस्ट और सौर ऊर्जा आधारित मॉडल जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता समझाई जाती है।
इसके अलावा हृदय का मॉडल, प्रकाशिकी के मॉडल, कोशिका एवं पादप संरचना सहित विभिन्न रासायनिक और जैविक प्रयोगों के जरिए बच्चों को विज्ञान के अलग-अलग विषयों को व्यावहारिक तरीके से समझने का अवसर दिया जा रहा है।
नियमित विज्ञान कक्षाओं में भी गतिविधि आधारित शिक्षण
यह नवाचार केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। विद्यालय की नियमित विज्ञान कक्षाओं में भी गतिविधियों और प्रयोगों को शिक्षण का हिस्सा बनाया जा रहा है।
अम्ल-क्षार की पहचान, सूक्ष्मदर्शी से सूक्ष्म जीवों का अवलोकन, प्रकाश संश्लेषण, कोशिका और पादप संरचना जैसे विषयों को बच्चों के सामने प्रयोग एवं गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
इससे विद्यार्थियों के लिए कठिन लगने वाली वैज्ञानिक अवधारणाएं अधिक सहज और समझने योग्य बन रही हैं।
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‘मैं भी बना सकता हूं’ की सोच विकसित कर रहे विद्यार्थी
गतिविधि आधारित शिक्षण का असर बच्चों के आत्मविश्वास में भी दिखाई दे रहा है। अब विद्यार्थी वैज्ञानिक अवधारणाओं को केवल याद करने के बजाय उन्हें खुद करके समझने की कोशिश कर रहे हैं।
तकनीकी गतिविधियों में भाग लेने से बच्चों का इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल उपकरणों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ रहा है। साथ ही वे टीम के साथ काम करना, अपनी बात रखना और अपने बनाए मॉडल की कार्यप्रणाली दूसरों को समझाना भी सीख रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बच्चों की सोच में दिखाई देता है। प्रयोग और मॉडल निर्माण के माध्यम से उनमें ‘मैं भी बना सकता हूं’ जैसी सकारात्मक भावना विकसित हो रही है।
मॉडल तैयार करने के साथ प्रस्तुतीकरण कौशल भी विकसित
विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मॉडल और प्रयोग विद्यालय स्तर के अलावा अलग-अलग शैक्षिक एवं विज्ञान संबंधी अवसरों पर भी प्रस्तुत किए गए हैं।
इन प्रस्तुतियों की खास बात यह रहती है कि विद्यार्थियों को अपने मॉडल की कार्यप्रणाली खुद समझाने का अवसर दिया जाता है। इससे उनके भीतर केवल वैज्ञानिक समझ ही विकसित नहीं होती, बल्कि प्रस्तुतीकरण, संवाद और आत्मविश्वास जैसे कौशल भी मजबूत होते हैं।
जब कोई बच्चा अपने हाथों से तैयार किए मॉडल के बारे में दूसरे विद्यार्थियों या शिक्षकों को समझाता है, तो उसके सीखने का अनुभव और अधिक प्रभावी बन जाता है।
प्रमोद सागर के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा नवाचार
विद्यालय में गतिविधि आधारित शिक्षण की इस पहल का संचालन प्रमोद सागर, सहायक अध्यापक एवं गतिविधि आधारित शिक्षण प्रभारी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, रचनात्मकता, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। विद्यार्थियों को ऐसी परिस्थितियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जहां वे स्वयं सवाल उठाएं, समाधान खोजें और अपने विचारों को प्रयोग के माध्यम से परख सकें।
‘Learning by Doing’ से बन रही विज्ञान सीखने की नई संस्कृति
उच्च प्राथमिक विद्यालय मानिकपुरा की पहल यह दिखाती है कि विज्ञान शिक्षण को रोचक बनाने के लिए हमेशा महंगे या जटिल संसाधनों की जरूरत नहीं होती। सही मार्गदर्शन, गतिविधि आधारित दृष्टिकोण और बच्चों को प्रयोग करने की स्वतंत्रता देकर कक्षा को सीखने की प्रयोगशाला बनाया जा सकता है।
यहां ‘Learning by Doing’ का उद्देश्य केवल आकर्षक मॉडल तैयार करना नहीं है। इसके पीछे बच्चों को सोचने, सवाल पूछने, प्रयोग करने, गलतियों से सीखने, समस्याओं का समाधान तलाशने और नए विचारों को वास्तविक रूप देने के लिए तैयार करना है।
मानिकपुरा विद्यालय में अपनाई जा रही यह पहल प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर विज्ञान शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, विद्यार्थी-केंद्रित, आधुनिक और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

