भारत की जनगणना-2027 को लेकर आगरा जनपद में तैयारियां तेज़ हो चुकी हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में न केवल जनगणना की रणनीति तय की गई, बल्कि अपर जिला जनगणना अधिकारी, उपजिलाधिकारी और चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण भी सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है, क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया है, साथ ही आम नागरिकों को पहली बार स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया जा रहा है।
22 मई से 20 जून तक चलेगा पहला चरण
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि जनगणना-2027 के पहले चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण और भवन गणना का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 तक किया जाएगा।
इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर डिजिटल माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे और जानकारी का सत्यापन करेंगे।
यह चरण आगे होने वाली जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार करेगा।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जो इसे पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और सटीक बनाएगी।
डेटा संग्रहण मोबाइल/टैब आधारित
ऑनलाइन डेटा एंट्री और रियल टाइम अपलोड
डिजिटल सत्यापन और निगरानी
पेपरलेस प्रक्रिया से समय और संसाधनों की बचत
जिलाधिकारी ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था से त्रुटियों में कमी आएगी और डेटा की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
स्व-गणना पोर्टल: नागरिक खुद भर सकेंगे जानकारी
जनगणना में इस बार आम नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्व-गणना पोर्टल शुरू किया जा रहा है।
पोर्टल 07 मई से 21 मई 2026 तक खुला रहेगा
नागरिक स्वयं अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे
इसके बाद प्रगणक द्वारा सत्यापन किया जाएगा
यह सुविधा विशेष रूप से शहरी और डिजिटल रूप से जागरूक नागरिकों के लिए उपयोगी साबित होगी।
15 से 25 अप्रैल तक व्यापक प्रशिक्षण अभियान
जनगणना जैसे विशाल कार्य को सफल बनाने के लिए 15 से 25 अप्रैल तक चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण
प्रगणकों और सुपरवाइजर्स को 3-3 दिन की ट्रेनिंग
अलग-अलग समूहों में प्रशिक्षण सत्र
सभी प्रशिक्षण तहसील स्तर पर आयोजित होंगे
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी उपजिला मजिस्ट्रेट स्वयं प्रशिक्षण में उपस्थित रहकर इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करें।
प्रशिक्षण के बाद परीक्षा: जवाबदेही तय
प्रशिक्षण के बाद सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की परीक्षा कराई जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह समझ चुके हैं।
यह कदम कार्य की गुणवत्ता और सटीकता को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
10 हजार से अधिक प्रगणक, 1700 से अधिक पर्यवेक्षक तैनात
जनपद में इस कार्य के लिए बड़े स्तर पर मानव संसाधन तैनात किया गया है—
10,527 प्रगणक (Enumerators)
1,755 पर्यवेक्षक (Supervisors)
ये सभी प्रशासन की निगरानी में कार्य करेंगे और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करेंगे।
जनगणना: विकास योजनाओं की आधारशिला
जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश के विकास की दिशा तय करने का प्रमुख आधार है।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर—
शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास योजनाएं बनती हैं
संसाधनों का वितरण तय होता है
नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं
इसलिए प्रत्येक नागरिक का सही जानकारी देना बेहद आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है या जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई विस्तृत समीक्षा
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) शुभांगी शुक्ला, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट शुभम कुमार, अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड सहित सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
डिजिटल भारत की ओर बड़ा कदम
जनगणना-2027 का यह डिजिटल स्वरूप भारत के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
आगरा में शुरू हुई तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष: जनभागीदारी से सफल होगी जनगणना
यह जनगणना केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जन अभियान है।
यदि प्रत्येक नागरिक सही और समय पर जानकारी देता है, तो यह डेटा देश के विकास, नीतियों और भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अब जिम्मेदारी प्रशासन के साथ-साथ हर नागरिक की भी है कि वह इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाए और देश के विकास में अपना योगदान दे।