आस्था और संवेदना की मिसाल: आगरा में ब्राह्मण परिषद ने वैदिक विधि से किया 11,000 लक्ष्मी-गणेश मूर्तियों का विसर्जन
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 26 अक्टूबर 2025।
दिवाली का पर्व भले ही बीत गया हो, लेकिन आस्था और श्रद्धा की लौ अभी भी जल रही है। आगरा शहर ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो संवेदनशीलता, श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन गया।
ब्राह्मण परिषद, आगरा ने दिवाली के बाद त्यागी गई भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पुरानी मूर्तियों को पूरे शहर से एकत्र किया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यमुना तट स्थित हाथी घाट पर उनका सम्मानपूर्वक विसर्जन किया।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि एक सामाजिक जागरूकता अभियान था — जो यह संदेश देता है कि हमारे आराध्य देवों का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
मूर्तियों का अपमान नहीं, उनका सम्मान हमारा धर्म — सुनील दुबे
इस अभियान के संयोजक सुनील दुबे ने बताया कि कई टीमों ने मिलकर पूरे शहर की गलियों, मंदिरों, कालोनियों और सड़कों से त्यागी गई मूर्तियाँ एकत्र कीं।
“हमने शहर के हर कोने से मूर्तियाँ एकत्र कीं — कहीं पेड़ों के नीचे पड़ी थीं, कहीं कूड़े के ढेर के पास। जब हमने उन्हें उठाया, तो लगा जैसे हम केवल मूर्तियाँ नहीं, बल्कि लोगों की भुला दी गई आस्था को फिर से सम्मान दे रहे हों।”
उन्होंने कहा कि इस वर्ष लगभग 11,000 गणेश-लक्ष्मी मूर्तियों के जोड़े एकत्र कर वैदिक विधि से विसर्जित किए गए। नगर निगम ने भी इस अभियान में सक्रिय सहयोग किया और हाथी घाट पर विशेष कुंड की व्यवस्था की गई।
पर्यावरण और आस्था — दोनों की रक्षा का संदेश
सुनील दुबे ने आगे बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ प्रयास है।
“जब मूर्तियाँ खुले में पड़ी रहती हैं, तो धूल, बारिश और प्रदूषण से उनका स्वरूप बिगड़ जाता है। इससे न केवल आस्था आहत होती है, बल्कि मिट्टी और जल प्रदूषण भी बढ़ता है। इसीलिए हमने यह ठाना कि हर वर्ष यह विसर्जन अभियान निरंतर जारी रहेगा।”
उन्होंने कहा कि यह पहल किसी संगठन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है — “हर व्यक्ति जो अपनी पुरानी मूर्तियाँ सम्मानपूर्वक विसर्जित करना चाहता है, वह इस अभियान का हिस्सा है।”
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ब्राह्मण परिषद की अपील — श्रद्धा से जुड़ी वस्तुओं को सड़कों पर न रखें
ब्राह्मण परिषद के प्रमुख प्रांजल भारद्वाज ने कहा कि हर साल दीपावली के बाद बड़ी संख्या में पुरानी मूर्तियाँ जगह-जगह छोड़ दी जाती हैं, जो धार्मिक दृष्टि से अनुचित है।
“हमारा धर्म हमें सिखाता है कि देव प्रतिमाओं का अपमान न करें। उन्हें सड़कों पर छोड़ने की बजाय सुरक्षित रखें, ताकि हमारी टीमें उन्हें विधिवत विसर्जित कर सकें।”
उन्होंने आगे कहा कि परिषद भविष्य में “मूर्ति सम्मान अभियान” को और बड़े पैमाने पर चलाने की योजना बना रही है, जिसमें स्कूलों, मंदिरों और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा ताकि यह संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचे।
समाज की एकजुटता और सेवा भावना
इस अनोखी पहल में शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु शामिल रहे।
राजेंद्र शर्मा, प्रमोद गुप्ता, सुनील दत्त शर्मा, आर.के. पांडे, नरेंद्र कुमार शर्मा, प्रवीण शर्मा, मणि दुबे, अशोक राजपूत, सुमित व मनीष थापक, हरिओम शर्मा, अनीश चतुर्वेदी, राहुल चतुर्वेदी, सुनील कनौजिया, सुमित मुद्गल, मयंक वे, सुधीर राठौर, सुनील तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से मूर्तियाँ विसर्जित कीं।
विसर्जन के दौरान घाट पर वैदिक मंत्रों की गूंज, दीपक की ज्योति, और यमुना की लहरों की छुअन ने पूरे वातावरण को पवित्र बना दिया। यह दृश्य देखने वाला हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
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हर मूर्ति में बसी आस्था — हर विसर्जन में सम्मान
ब्राह्मण परिषद की यह पहल केवल आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। यह हमें याद दिलाती है कि आस्था का सम्मान केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि उस आस्था की हर अभिव्यक्ति का आदर करना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम संयोजक सुनील दुबे (मो. 9917766644) ने अंत में कहा —
“हम चाहते हैं कि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुँचे कि त्यागी गई मूर्तियाँ भी हमारी श्रद्धा का हिस्सा हैं। आइए, मिलकर उन्हें सम्मान दें।”
कार्यक्रम का सारांश
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कार्यक्रम का नाम: वैदिक विधि से मूर्ति विसर्जन अभियान 2025
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स्थान: हाथी घाट, यमुना किनारा, आगरा
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आयोजक: ब्राह्मण परिषद, आगरा
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कार्यक्रम संयोजक: सुनील दुबे
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मूर्तियों की संख्या: लगभग 11,000
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