मिशन शक्ति फेज़-5.0: बीए छात्रा पूजा बनीं एक दिन की प्राचार्य | राजकीय महाविद्यालय आगरा में छात्राओं ने दिखाया नेतृत्व
राजकीय महाविद्यालय आगरा में मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत बीए प्रथम वर्ष की छात्रा कु. पूजा को एक दिन के लिए प्राचार्य बनाया गया। पूजा ने कॉलेज प्रशासनिक कार्य संभाले, छात्राओं से संवाद किया और अनुशासन व स्वच्छता पर जोर दिया।

“मिशन शक्ति फेज़-5.0” के अंतर्गत राजकीय महाविद्यालय की बीए छात्रा पूजा बनीं एक दिन की प्राचार्य, संभाला कॉलेज का दायित्व और दिखाया सशक्त नेतृत्व
रिपोर्ट : एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 17 अक्टूबर 2025
आगरा में “मिशन शक्ति फेज़-5.0” अभियान के तहत शुक्रवार का दिन इतिहास बन गया।
राजकीय महाविद्यालय कैंट, आगरा में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा कु. पूजा को एक दिन के लिए महाविद्यालय की प्राचार्य बनाया गया।
इस अवसर ने न केवल छात्रा पूजा के आत्मविश्वास को नई उड़ान दी, बल्कि यह भी दिखाया कि जब बेटियों को अवसर मिलता है, तो वे नेतृत्व की हर कसौटी पर खरी उतरती हैं।
उद्देश्य — आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय क्षमता का विकास
कार्यक्रम का आयोजन “मिशन शक्ति फेज़-5.0” के अंतर्गत प्राचार्य प्रो. मनीषा की अध्यक्षता में और संयोजक डॉ. कविता शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया।
इस अभिनव पहल का उद्देश्य छात्राओं को प्रशासनिक कार्यों की समझ, निर्णय-निर्धारण की प्रक्रिया और नेतृत्व कौशल से अवगत कराना था।
राजकीय महाविद्यालय ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं, बल्कि यह विद्यार्थियों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का माध्यम है।
पूजा बनीं “एक दिन की प्राचार्य” — आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का मिला संगम

कु. पूजा ने सुबह महाविद्यालय की प्राचार्य का कार्यभार संभालते हुए स्टाफ मीटिंग में भाग लिया और कॉलेज के दैनिक प्रशासनिक कार्यों की जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने कार्यालयीन प्रक्रियाओं, बजट आवंटन, उपस्थिति, और शिक्षण गतिविधियों की समीक्षा की।
प्राचार्य के रूप में पूजा ने छात्राओं से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना — जैसे शौचालय की सफाई, खेलकूद संसाधनों की कमी, तथा पुस्तकालय के समय को लेकर सुझाव लिए।
छात्रा पूजा ने अपने वक्तव्य में कहा —
“आज मुझे एहसास हुआ कि एक संस्थान का संचालन केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी की जरूरत को समझने की जिम्मेदारी भी है। मैं सभी छात्राओं से कहती हूं कि वे आत्मनिर्भर बनें और अपनी आवाज़ को मजबूती से रखें।”
कॉलेज में बदलाव का प्रस्ताव — खेल मैदान और स्वच्छता पर जोर
प्राचार्य के रूप में कार्य करते हुए पूजा ने कॉलेज परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने खेलकूद के लिए एक खेल मैदान की आवश्यकता पर बल दिया और यह प्रस्ताव प्राचार्य प्रो. मनीषा के समक्ष रखा।
प्रो. मनीषा ने आश्वासन दिया कि इस विषय पर शीघ्र कार्यवाही की जाएगी ताकि छात्राओं को शारीरिक विकास के लिए उचित अवसर मिल सके।
पूजा ने स्वच्छता को लेकर भी विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा —
“स्वच्छ वातावरण में ही स्वस्थ मस्तिष्क विकसित होता है। यदि हम अपने कॉलेज को स्वच्छ रखेंगे, तो यह हमारी जिम्मेदारी का प्रमाण होगा।”
संवाद और नेतृत्व — शिक्षकों व छात्राओं के साथ प्रेरणादायक चर्चा

दिनभर पूजा ने शिक्षकों से संवाद करते हुए विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं की समीक्षा की।
उन्होंने सभी छात्राओं से कहा कि अनुशासन, समयपालन और आत्म-सम्मान ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
उनका यह संवाद पूरे कॉलेज के लिए प्रेरणादायक रहा।
इस अवसर पर कॉलेज के शिक्षकों —
डॉ. सुमित चंद्र, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. नरेंद्र कुमार सेहरा, डॉ. प्रहलाद सिंह, डॉ. दीप्ति — ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से छात्राओं में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
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महिला सुरक्षा शपथ — आत्मरक्षा और जागरूकता की ओर एक कदम
कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रियंका ने छात्राओं को महिला सुरक्षा की शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा कि “मिशन शक्ति” केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि यह प्रत्येक छात्रा की आवाज़ और हक़ का प्रतीक है।
छात्राओं ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे किसी भी प्रकार की असुरक्षा की स्थिति में चुप नहीं रहेंगी और स्वयं तथा दूसरों की सुरक्षा के प्रति सजग रहेंगी।
आयोजन बना प्रेरणा का केंद्र
इस अवसर पर कॉलेज परिसर में उत्साह और ऊर्जा का वातावरण था।
छात्राओं ने कहा कि “एक दिन की प्राचार्य” बनना उनके लिए जीवन-पर्यंत प्रेरणास्रोत रहेगा।
पूजा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा —
“आज मुझे समझ में आया कि नेतृत्व केवल पद नहीं, बल्कि सेवा का भाव है। एक दिन में मैंने जो सीखा, वह पूरी जिंदगी याद रहेगा।”
निष्कर्ष — बेटियाँ जब आगे बढ़ती हैं, समाज आगे बढ़ता है
“मिशन शक्ति फेज़-5.0” के तहत राजकीय महाविद्यालय आगरा की यह पहल समाज के लिए प्रेरक उदाहरण है।
यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि बेटियाँ केवल कक्षा की छात्रा नहीं, बल्कि आने वाले समय की नेता, प्रशासक और नीति-निर्माता बन सकती हैं।
कु. पूजा जैसी छात्राओं की पहल न केवल शिक्षा के महत्व को दर्शाती है बल्कि यह साबित करती है कि जब अवसर और विश्वास मिलता है, तो बेटियाँ हर क्षेत्र में नेतृत्व का परचम लहरा सकती हैं।
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