पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के प्रावधानों के बारे में भी प्रतिभागियों को विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षकों ने सरल और रोचक तरीके से समझाया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण और अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों और समाज के सभी जिम्मेदार व्यक्तियों का यह कर्तव्य है कि वे बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के बारे में जागरूक करें, ताकि वे किसी भी प्रकार की अनुचित स्थिति में अपने अधिकारों के प्रति सजग रह सकें।
मीना मंच से विकसित होती है नेतृत्व क्षमता
संदर्भदात्री श्रीमती आभा पुरोहित ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मीना मंच की गतिविधियां विद्यालयों में बालिकाओं के नेतृत्व विकास, आत्मविश्वास और संवाद कौशल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि जब बालिकाओं को मंच मिलता है तो वे अपने विचार खुलकर व्यक्त करती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में आगे बढ़ती हैं। ऐसे कार्यक्रम बालिकाओं को स्वावलंबी और जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर पूर्व एबीआरसी जयपाल सिंह गुर्जर और सोमेन्द्र सिंह ने प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण समाज के विकास की आधारशिला है और इसके लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए।
ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक वातावरण में हुआ कार्यक्रम

पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत ज्ञानवर्धक, संवादात्मक और प्रेरणादायक रहा।
इस अवसर पर कार्यालय सहायक रमाकांत, मोहित, मनोज सहित अन्य सहयोगी भी उपस्थित रहे और कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि समाज में बालिकाओं को सही दिशा, शिक्षा और अवसर मिलें तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।