आगरा डीएम का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
आगरा डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर तैयारी का जायज़ा लिया, नाविकों को लाइफ जैकेट बांटे और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
आगरा डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण, नाविकों को बांटी लाइफ जैकेट
ब्यूरो चीफ़ एस. शेरवानी।
आगरा, 21 अगस्त 2025।
आगरा जिले में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तनौरा नूरपुर, समौगर के बुर्ज मजरा और सरगन खेड़ा (तहसील सदर) जैसे संवेदनशील इलाकों का जायजा लिया और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना।
जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि हर हाल में बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी रखी जाए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए उन्हें लाइफ जैकेट वितरित किए और नाविकों को अगले दो दिन तक नाव न चलाने का आदेश दिया।
ग्रामीणों से सीधा संवाद, 12 परिवारों की चिंता
निरीक्षण की शुरुआत डीएम ने ग्राम पंचायत समौगर के बुर्ज मजरा गांव से की। यहां पर उन्होंने ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 12 परिवार रहते हैं और वर्ष 2023 में यह क्षेत्र बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इस बार भी पानी गांव तक पहुंच सकता है।
इस पर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम), लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिव को निर्देश दिया कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो तुरंत परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
राहत केंद्र के रूप में स्कूल का निरीक्षण
इसके बाद डीएम ने प्राथमिक विद्यालय सरगन खेड़ा का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस विद्यालय को राहत शिविर के रूप में उपयोग किया जाएगा ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
यमुना घाट पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान डीएम तनौरा नूरपुर के यमुना घाट पहुंचे। यहां उन्होंने डूब क्षेत्र का जायजा लिया और ग्रामीणों से हालात की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग से प्राप्त सूचना के अनुसार 19 अगस्त को ओखला बैराज से 91,212 क्यूसेक और गोकुल बैराज से 87,079 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस वजह से यमुना का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगले दो दिन यमुना नदी के आसपास कोई गतिविधि न की जाए। नाविकों को भी निर्देश दिए गए कि वे दो दिन तक नाव संचालन पूरी तरह से बंद रखें।
नाविकों को लाइफ जैकेट और सतर्कता बरतने की अपील
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नाविकों को लाइफ जैकेट वितरित किए और कहा कि प्रशासन हर समय उनके साथ खड़ा है। किसी भी आपात स्थिति में वे सीधे लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव, उपजिलाधिकारी या स्वयं जिलाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
कृषि नुकसान का आकलन और सर्वे के निर्देश
गांववालों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि उनके कुछ कृषि क्षेत्रों में जलभराव हो गया है जिससे फसलों को नुकसान हुआ है। इस पर डीएम ने संबंधित लेखपाल को मौके पर जाकर सर्वे करने और नुकसान का सही आंकलन करने के निर्देश दिए।
जागरूकता अभियान और मुनादी के आदेश
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आदेश दिया कि गांवों में जागरूकता बैठकें आयोजित की जाएं और मुनादी के जरिए लोगों को बाढ़ से बचाव संबंधी जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि गोताखोर और नाविकों की टीमें तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में जलस्तर बढ़ने की अद्यतन जानकारी लगातार लोगों तक पहुंचाई जाए।
सतत निगरानी और क्षेत्र भ्रमण के निर्देश
डीएम ने लेखपाल और ग्राम सचिव को आदेश दिया कि वे प्रभावित गांवों में लगातार मौजूद रहकर निगरानी रखें। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी आदेश दिया गया कि वे लगातार क्षेत्र भ्रमण करें और गांव वालों से संपर्क बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
निरीक्षण में अधिकारियों की मौजूदगी
इस मौके पर अपर जिलाधिकारी (वि/रा) शुभांगी शुक्ला, एसडीएम सदर सचिन राजपूत, ग्राम सचिव, लेखपाल और ग्राम प्रधान करतार सिंह भी मौजूद रहे।
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मानवीय पहलू: बाढ़ की आशंका और ग्रामीणों की बेचैनी
गांव के लोगों के चेहरों पर साफ झलक रही चिंता इस बात की गवाही दे रही थी कि बाढ़ का खतरा उनके लिए केवल प्रशासनिक सूचना नहीं बल्कि एक बड़ी चुनौती है। खेतों में खड़ी फसलें, घरों की सुरक्षा और परिवारों की जान—सब कुछ इस बाढ़ पर टिका हुआ है।
जिलाधिकारी का गांव आना, ग्रामीणों से सीधे संवाद करना और लाइफ जैकेट बांटना लोगों के लिए राहत की बात रही। ग्रामीणों का कहना था कि जब भी प्रशासन गांव में सक्रिय रूप से आता है तो उन्हें सुरक्षा और भरोसे का एहसास होता है।
प्रशासन की तैयारी: बाढ़ से निपटने की योजना
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नाव संचालन पर रोक – अगले दो दिन तक नाविक नाव नहीं चलाएंगे।
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लाइफ जैकेट वितरण – नाविकों और ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट दिए गए।
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राहत केंद्र – प्राथमिक विद्यालय को जरूरत पड़ने पर राहत शिविर बनाया जाएगा।
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टीम की तैनाती – गोताखोर और नाविकों की टीम हर समय तैयार रहेगी।
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निगरानी व्यवस्था – लेखपाल और सचिव गांव में रहकर लगातार स्थिति पर नजर रखेंगे।
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जागरूकता अभियान – ग्रामीणों को बाढ़ से बचाव के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
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कृषि सर्वे – नुकसान की भरपाई के लिए खेतों का सर्वे कराया जाएगा।
निष्कर्ष
आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का यह दौरा सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए एक बड़ा भरोसा भी था। बाढ़ जैसी आपदा में जब लोग असहाय महसूस करते हैं, तब प्रशासन का मौके पर पहुंचकर निर्देश देना और मदद का आश्वासन देना सबसे बड़ी राहत है।
आगामी दिनों में यमुना का बढ़ता जलस्तर आगरा के कई गांवों के लिए चुनौती पेश कर सकता है। हालांकि, प्रशासन की सक्रियता और ग्रामीणों की सतर्कता मिलकर इस संभावित आपदा से निपटने का रास्ता आसान बना सकती है।
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