भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आगरा जनपद में सामाजिक समरसता, समानता और संविधान के मूल्यों को याद करते हुए विविध कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। पूरे शहर में एक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम, संगोष्ठियां, प्रभात फेरियां और स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए।
कलेक्ट्रेट सभागार में गरिमामय आयोजन
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन आजाद भगत सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी, अपर जिलाधिकारी नागरिक आपूर्ति अजय नारायण सिंह, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे जुबेर बेग और सिटी मजिस्ट्रेट वेद सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके पश्चात आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने बाबा साहब के जीवन, उनके संघर्ष और भारतीय समाज में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
“संविधान है तो देश में स्थिरता है”—जिलाधिकारी
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मबल का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि बाबा साहब ने सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को पार करते हुए भारतीय संविधान का निर्माण किया, जो आज देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है।
“यदि संविधान नहीं होगा तो व्यवस्था नहीं होगी, और व्यवस्था नहीं होगी तो समाज में शांति और विकास संभव नहीं है।”
उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय हर व्यक्ति को समान दृष्टि से देखें और न्याय सुनिश्चित करें—यही बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बाबा साहब साहस, संघर्ष और संकल्प के प्रतीक थे। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना और अपने विचारों से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया।
अन्य अधिकारियों ने भी अपने संबोधन में कहा कि हमें बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक समानता, न्याय और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।
जनपद में जगह-जगह हुए कार्यक्रम
अंबेडकर जयंती के अवसर पर आगरा के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर आयोजन किए गए:
विद्यालयों और महाविद्यालयों में संगोष्ठियां: विद्यार्थियों को बाबा साहब के जीवन, संविधान और उनके योगदान के बारे में जानकारी दी गई।
प्रभात फेरियां और जागरूकता रैलियां: छात्रों और सामाजिक संगठनों ने प्रभात फेरियां निकालकर समाज में समानता और शिक्षा का संदेश दिया।
प्रतिमाओं की साफ-सफाई और माल्यार्पण: शहर के विभिन्न पार्कों और चौराहों पर स्थापित बाबा साहब की प्रतिमाओं की साफ-सफाई कर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
सामाजिक सहभागिता: विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे समाज में एकता और जागरूकता का संदेश गया।
बहुमुखी व्यक्तित्व और प्रेरणादायक योगदान
डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और विधिवेत्ता भी थे। उनके द्वारा बनाए गए संविधान में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार, न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है।
जिलाधिकारी ने कहा कि भारतीय नागरिकों को जो मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, वे आज भी कई देशों में उपलब्ध नहीं हैं—यह बाबा साहब की दूरदर्शिता का परिणाम है।
व्यापक सहभागिता से सफल हुआ आयोजन
इस अवसर पर कलेक्ट्रेट के नाजिर दुलीचंद शर्मा, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, तुषार सक्सेना, गोविंद राम, बलवीर सिंह, वीर सिंह, सुरेश चंद गौतम, हरिओम, ब्रजेश कुमार सहित सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
आगरा में मनाई गई डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि संविधान, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को आत्मसात करने का एक सशक्त अवसर बनी।
इस तरह के आयोजन समाज को यह याद दिलाते हैं कि बाबा साहब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उनके सिद्धांतों पर चलकर ही एक सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण संभव है।