डायट आगरा में पांच दिवसीय AI कार्यशाला का समापन, प्रशिक्षुओं ने सीखे आधुनिक तकनीक और स्मार्ट शिक्षण के गुर

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 18 मई 2026।

तकनीकी बदलाव और डिजिटल शिक्षा के इस दौर में शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा द्वारा आयोजित पांच दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कार्यशाला का सफल समापन हो गया।

इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET), खंदारी कैंपस आगरा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में डीएलएड बैच-2025 के 90 से अधिक प्रशिक्षुओं ने सक्रिय भागीदारी की। पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल टूल्स के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

यह कार्यशाला भविष्य के शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण पद्धति के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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AI और डिजिटल शिक्षा पर केंद्रित रहा प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं को AI से जुड़े अनेक आधुनिक विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

इनमें प्रमुख रूप से:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इतिहास
  • मशीन लर्निंग
  • जेनरेटिव AI
  • नैपकिन AI
  • कैनवा AI
  • चैटजीपीटी (ChatGPT)
  • जेमीनाई (Gemini)
  • वर्ड और एक्सेल में AI का उपयोग
  • डेटा सिक्योरिटी
  • शिक्षा में AI की भूमिका
  • प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग

जैसे विषय शामिल रहे।

“तकनीक का सही उपयोग शिक्षा को अधिक प्रभावी और रोचक बना सकता है।”

“प्रशिक्षुओं को समय के साथ अद्यतन रखना जरूरी”

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने बताया कि यह कार्यशाला राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में आयोजित की गई।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना बेहद आवश्यक हो गया है।

“AI आधारित प्रशिक्षण से प्रशिक्षु आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को समझते हुए अपने शिक्षण कार्य को और बेहतर बना सकेंगे।”

साइबर सिक्योरिटी पर विशेष सत्र

कार्यशाला के पांचवें दिन के प्रथम सत्र में IIT की श्वेता लवानिया ने साइबर सिक्योरिटी विषय पर प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने प्रशिक्षुओं को डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी, जिनमें:

  • सुरक्षित एप डाउनलोड करना
  • सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने के जोखिम
  • साइबर फ्रॉड से बचाव
  • डिजिटल डेटा की सुरक्षा

जैसे विषय प्रमुख रहे।

“डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।”

स्मार्ट क्लासरूम और AI टूल्स पर व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यशाला के अंतिम सत्र में कार्यशाला समन्वयक डॉ. राजेश लवानिया ने शिक्षा में AI के प्रयोग पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने प्रशिक्षुओं को स्मार्ट क्लासरूम के लिए AI टूल्स का उपयोग सिखाया तथा AI की मदद से:

  • पाठ योजना तैयार करना
  • प्रेजेंटेशन बनाना
  • शिक्षण सामग्री विकसित करना
  • डिजिटल कंटेंट निर्माण

जैसे कार्यों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षुओं ने इस दौरान विभिन्न AI टूल्स का स्वयं प्रयोग कर सीखने का अनुभव प्राप्त किया।

“AI ने शिक्षण को अधिक सरल और प्रभावी बनाया”

शैक्षिक तकनीकी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि पांच दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं ने अत्यंत उत्साह और मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उन्होंने कहा कि AI आधारित तकनीकों ने शिक्षण और रिपोर्ट राइटिंग जैसे कार्यों को काफी सरल बना दिया है।

“इस कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षुओं को आधुनिक शिक्षण विधियों और तकनीकों को समझने का अवसर मिला।”

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षुओं ने कार्यशाला के दौरान अपनी शंकाओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त किया, जिससे उनकी तकनीकी समझ और अधिक मजबूत हुई।

भविष्य की शिक्षा में AI की बड़ी भूमिका

कार्यशाला के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने आई कि आने वाले समय में AI शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।

AI आधारित शिक्षा से:

  • स्मार्ट लर्निंग को बढ़ावा मिलेगा
  • छात्रों की सहभागिता बढ़ेगी
  • शिक्षण अधिक इंटरैक्टिव बनेगा
  • शिक्षकों का कार्य आसान होगा
  • समय और संसाधनों की बचत होगी

“भविष्य की शिक्षा तकनीक और मानवीय रचनात्मकता के संतुलन पर आधारित होगी।”

प्रशिक्षुओं में दिखा उत्साह

कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रशिक्षुओं में आधुनिक तकनीक सीखने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।

प्रशिक्षुओं ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें नई तकनीकों को समझने और शिक्षा में उनके उपयोग का व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जो भविष्य में उनके शिक्षण कार्य में बेहद उपयोगी साबित होगा।

कार्यक्रम में रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यशाला के सफल संचालन में यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, हिमांशु सिंह का विशेष सहयोग रहा।

इस अवसर पर डॉ. प्रज्ञा शर्मा, अनिल कुमार, लक्ष्मी शर्मा, संजीव कुमार सत्यार्थी, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, अबु मोहम्मद आसिफ, यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, रंजना पाण्डेय, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षु एवं डायट स्टाफ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय द्वारा किया गया।

निष्कर्ष

डायट आगरा में आयोजित पांच दिवसीय AI कार्यशाला ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा का भविष्य अब तकनीक आधारित और डिजिटल होने जा रहा है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशिक्षुओं को केवल AI की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें भविष्य की स्मार्ट शिक्षा प्रणाली के लिए तैयार करने का मजबूत माध्यम बना।

“तकनीक और शिक्षा का समन्वय ही भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है” — इसी संदेश के साथ कार्यशाला का सफल समापन हुआ।

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