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आगरा में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध, जिलाधिकारी ने किसानों से कहा – न करें भण्डारण | Fertilizer Supply 2025

आगरा जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने किसानों से अपील की है कि जिले में रबी फसल हेतु पर्याप्त डीएपी, यूरिया, एनपीके व एसएसपी उपलब्ध है। किसानों से संतुलित उपयोग की सलाह दी गई।

जिले में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध: जिलाधिकारी ने किसानों से कहा – भण्डारण न करें, संतुलित खाद का करें उपयोग

 

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) –

आगरा। 02 सितम्बर 2025 – रबी की फसलों की तैयारी को देखते हुए जिले में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसानों में उत्सुकता और चिंता दोनों बनी रहती है। इसी क्रम में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जिले में यूरिया, डी.ए.पी. और अन्य फास्फेटिक खादों की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसान किसी भी स्थिति में उर्वरकों का अनावश्यक भण्डारण न करें, बल्कि आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें।

रबी की फसलों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बताया गया कि रबी फसलों की बुवाई के लिए यूरिया, डी.ए.पी., एम.ओ.पी., एन.पी.के. और एस.एस.पी. खादों का पर्याप्त स्टॉक जिला मुख्यालय से लेकर सहकारी समितियों और प्राइवेट विक्रेताओं तक भेजा गया है।

  • यूरिया – 14,030 मैट्रिक टन

  • डी.ए.पी. – 9,256 मैट्रिक टन

  • एम.ओ.पी. – 5,903 मैट्रिक टन

  • एन.पी.के. – 11,076 मैट्रिक टन

  • एस.एस.पी. – 1,780 मैट्रिक टन

इन आंकड़ों से साफ है कि जिले में किसी भी उर्वरक की कमी नहीं है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होगी।

आलू, गेहूं और सरसों की बुवाई पर विशेष ध्यान

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसान अभी आलू की फसल के लिए डी.ए.पी. का भण्डारण न करें क्योंकि इसकी बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी। उन्होंने किसानों को अनुशंसित मात्रा में ही खाद उपयोग करने की सलाह दी:

  • आलू की फसल – प्रति एकड़ 3 बोरी डी.ए.पी.

  • गेहूं व सरसों की फसल – प्रति एकड़ 2 बोरी डी.ए.पी.

उन्होंने कहा कि किसान अपनी भूमि की जोत के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और POS मशीन से रसीद और कैश मेमो अवश्य लें, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और धोखाधड़ी से बचा जा सके।

संतुलित खाद का महत्व – सिर्फ डी.ए.पी. पर निर्भर न रहें

जिलाधिकारी ने किसानों को चेतावनी दी कि केवल डी.ए.पी. पर निर्भर रहना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। 2025 में किसानों ने पिछले साल की तुलना में यूरिया और डी.ए.पी. का अधिक प्रयोग किया है, जिससे मिट्टी की उर्वरता असंतुलित होने की आशंका है।

उन्होंने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी, जैसे:

  • एन.पी.के. (NPK) – इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उचित मात्रा होती है। इसके उपयोग से बीज अंकुरण, पौधों की वृद्धि और फसल की उत्पादकता बढ़ती है।

  • एस.एस.पी. (SSP) – यह सस्ती और प्रभावी खाद है जिसमें कैल्शियम (21%), फास्फोरस (16%) और सल्फर (12%) पाया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।

किसानों के लिए वैज्ञानिक सुझाव

  • फसल लागत कम करने के लिए – डी.ए.पी. के साथ-साथ एन.पी.के. और एस.एस.पी. का प्रयोग करें।
  • मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाने के लिए – एक ही खाद का बार-बार अधिक उपयोग न करें।
  • ज्यादा उपज के लिए – फसल के अनुसार उचित अनुपात में खाद डालें।
  • आलू और गेहूं की गुणवत्ता सुधारने के लिए – संतुलित खादों का प्रयोग अनिवार्य है।

निगरानी और कार्यवाही

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि खाद के वितरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कृषि, सहकारिता और राजस्व विभाग की टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें निजी दुकानों और सहकारी समितियों का औचक निरीक्षण करेंगी।

यदि कोई दुकानदार खाद की कृत्रिम कमी पैदा करता है या अवैध भण्डारण करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी।

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शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर

यदि किसी किसान को खाद उपलब्धता या वितरण से संबंधित शिकायत हो तो वह नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकता है:

  • 8881508310
  • 7302640291

यह हेल्पलाइन किसी भी कार्य दिवस में सक्रिय रहेगी और किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाएगा।

किसानों को जिलाधिकारी की अपील

जिलाधिकारी ने अंत में किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर खाद का भण्डारण न करें। सरकार और प्रशासन समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराएंगे।

उन्होंने कहा कि संतुलित खाद उपयोग से ही मिट्टी की सेहत बनी रहेगी, फसल लागत कम होगी और उत्पादन अधिक मिलेगा। किसानों का सहयोग ही जिले में खाद आपूर्ति को सुचारू बनाएगा।

निष्कर्ष

आगरा जिले में इस समय उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। डी.ए.पी., यूरिया, एन.पी.के., एस.एस.पी. और अन्य खादें किसानों को निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसानों को जरूरत है कि वे अपनी फसलों के लिए वैज्ञानिक तरीके से संतुलित खाद का उपयोग करें और अनावश्यक भण्डारण से बचें।

इस तरह प्रशासन की सक्रियता और किसानों की जागरूकता मिलकर रबी सीजन की फसलों को बेहतर उपज और गुणवत्ता प्रदान करेंगी।

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