समय के साथ अपने आप को अपडेट करना आवश्यक, शिक्षा में AI का बढ़ता महत्व: विजय प्रताप सिंह
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। तकनीक के तेजी से बदलते दौर में शिक्षा व्यवस्था को भी नई तकनीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, प्रशिक्षण, अध्ययन सामग्री तैयार करने और विद्यार्थियों के सीखने के तरीकों में भी इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी बदलते शैक्षिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) आगरा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा में आवश्यकता एवं उपयोगिता पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम टीचर एजुकेशन योजना के अंतर्गत प्रोग्राम एवं एक्टिविटीज के तहत आयोजित किया गया। सेमिनार में शिक्षकों और प्रतिभागियों को AI की बुनियादी अवधारणाओं से लेकर इसके व्यावहारिक उपयोग, AI टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा शिक्षण कार्यों में इसके प्रभावी इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई।
समय के साथ तकनीक को समझना जरूरी: विजय प्रताप सिंह

कार्यक्रम का शुभारंभ उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य डायट आगरा विजय प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए जरूरी है कि वे समय के साथ स्वयं को अपडेट करते रहें और नई तकनीकों को समझकर उनका सकारात्मक एवं प्रभावी इस्तेमाल करें।
उन्होंने कहा कि बदलते समय में केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े संस्थानों को नई तकनीकों की संभावनाओं को समझते हुए उन्हें विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ना होगा। AI का सही और उद्देश्यपूर्ण उपयोग शिक्षण कार्य को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार हो सकता है।
मशीन लर्निंग और शिक्षा में AI की उपयोगिता पर हुई चर्चा

सेमिनार के प्रथम सत्र में संदर्भदाता डॉ. प्रज्ञा कावरा ने मशीन लर्निंग की अवधारणा को सरल तरीके से स्पष्ट किया। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार काम करता है और वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता क्यों बढ़ रही है।
उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में AI की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। अध्ययन-अध्यापन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार सामग्री तैयार करने तथा शिक्षकों के कार्य को सरल बनाने में AI के संभावित उपयोगों पर चर्चा की गई।
सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि तकनीक का उद्देश्य शिक्षक की भूमिका को समाप्त करना नहीं, बल्कि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सुगम, रचनात्मक और प्रभावी बनाना है।
AI टूल्स और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की दी जानकारी

द्वितीय सत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर गणेश चंद्र ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े विभिन्न टूल्स, तकनीकों और प्रमुख एप्लीकेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को AI के व्यावहारिक इस्तेमाल से परिचित कराया और विशेष रूप से प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की अवधारणा को समझाया।
उन्होंने बताया कि AI से किसी विषय पर विशिष्ट और उपयोगी उत्तर प्राप्त करने के लिए उसे स्पष्ट एवं विशिष्ट प्रॉम्प्ट देना जरूरी है। प्रॉम्प्ट जितना स्पष्ट और उद्देश्यपरक होगा, AI से मिलने वाला उत्तर भी उतना ही उपयोगी और अपेक्षित परिणाम के करीब हो सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों को AI के साथ बेहतर तरीके से संवाद करने की तकनीक समझाते हुए यह भी बताया कि किसी सामान्य प्रश्न और एक स्पष्ट, संदर्भयुक्त प्रॉम्प्ट के परिणाम में काफी अंतर हो सकता है। इस दौरान विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से AI के उपयोग को समझाया गया।
टीम एक्सरसाइज और एक्शन लर्निंग के जरिए कराया अभ्यास

सेमिनार के तृतीय सत्र में इंजीनियर शिखी अग्रवाल ने प्रतिभागियों को AI के व्यावहारिक इस्तेमाल से जोड़ते हुए विभिन्न शिक्षण विधियों पर चर्चा की। उन्होंने टीम एक्सरसाइज, एक्शन लर्निंग, फील्ड एक्सरसाइज, लेक्चरर्स तथा पीयर लर्निंग जैसी विधियों को विस्तार से समझाया।
इस सत्र की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय अभ्यास के माध्यम से AI के उपयोग को समझने का अवसर दिया गया।
अभ्यास के दौरान बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से शिक्षकों के कई नियमित कार्यों को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इनमें छात्रों की उपस्थिति से संबंधित कार्य, प्रश्न पत्र निर्माण, पीपीटी तैयार करना और शिक्षण सामग्री को व्यवस्थित करना जैसे कार्य शामिल रहे।
प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया कि AI टूल्स का इस्तेमाल करते हुए समय की बचत के साथ-साथ शिक्षण सामग्री को अधिक व्यवस्थित और विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप कैसे तैयार किया जा सकता है।
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शिक्षा को रोजगारपरक बनाने में AI की अहम भूमिका
सेमिनार के दौरान वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने कहा कि शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करते हुए विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसी तकनीकी दक्षताओं से भी परिचित कराना जरूरी है, जो भविष्य में उनके लिए उपयोगी साबित हों। इसी दिशा में विभाग द्वारा विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग लैब और ICT लैब की स्थापना की जा रही है।
इन लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए प्रयोग, गतिविधियों और तकनीकी संसाधनों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
AI के साथ बदल रही है सीखने और सिखाने की प्रक्रिया
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव शिक्षा की पूरी प्रक्रिया पर पड़ रहा है। शिक्षक इसका उपयोग अध्ययन सामग्री तैयार करने, प्रस्तुतियों को बेहतर बनाने, प्रश्नों को व्यवस्थित करने और विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों की योजना बनाने में कर सकते हैं।
वहीं विद्यार्थी भी कठिन विषयों को अलग-अलग तरीकों से समझने, अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने और अपनी सीखने की प्रक्रिया को अधिक व्यक्तिगत बनाने के लिए AI आधारित संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
हालांकि, सेमिनार में AI के इस्तेमाल को जिम्मेदारी और उद्देश्य के साथ अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर रहा। तकनीक का उपयोग विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने और शिक्षकों के कार्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
शिक्षकों के लिए बदलते दौर के अनुरूप प्रशिक्षण जरूरी
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि तकनीकी बदलावों के बीच शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। नई तकनीक तभी प्रभावी साबित हो सकती है, जब शिक्षक उसके उपयोग, सीमाओं और संभावनाओं को समझें।
DIET जैसे शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को नई शिक्षण तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग का अवसर भी मिलता है।
AI को लेकर आयोजित यह सेमिनार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण गतिविधि के रूप में सामने आया, जिसमें प्रतिभागियों को तकनीक की जानकारी के साथ उसके वास्तविक शैक्षिक उपयोग का अभ्यास भी कराया गया।
प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मान
कार्यक्रम का संचालन नोडल प्रभारी प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया। सेमिनार के विभिन्न सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से AI और शिक्षा से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की तथा गतिविधियों में भाग लिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इससे प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ा और प्रशिक्षण गतिविधि को औपचारिक रूप से पूर्ण किया गया।
समापन पर डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सभी संदर्भदाताओं, अतिथियों, शिक्षकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी के योगदान के लिए धन्यवाद दिया।
इनका रहा विशेष सहयोग
सेमिनार के आयोजन में डॉ. राजेश लवानिया, सहनोडल प्रभारी कल्पना सिन्हा, यशवीर सिंह, अबू मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, लक्ष्मी शर्मा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, रंजना पांडे, पुष्पेंद्र सिंह, संजीव कुमार सत्यार्थी, यशपाल सिंह, रचना यादव, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता तथा प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित अन्य का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और प्रतिभागियों ने AI आधारित तकनीकों को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता को उपयोगी बताया। सेमिनार से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि आने वाले समय में शिक्षा और तकनीक का संबंध और मजबूत होगा तथा शिक्षकों को भी इस बदलाव के साथ स्वयं को लगातार अपडेट करते रहना होगा।


