Agra News: आगरा में बेसहारा गोवंशों को लेकर सख्त हुए डीएम मनीष बंसल, बोले- सड़क पर मिला एक भी निराश्रित गौवंश तो तय होगी जिम्मेदारी
बंद पड़ी गौशालाएं अगस्त के अंत तक होंगी फिर से संचालित, सभी ब्लॉकों में खरीदे जाएंगे कैटल कैचर, डीबीटी भुगतान हर महीने 5 तारीख तक सुनिश्चित करने के निर्देश
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 27 जुलाई 2026। जनपद में निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों के संरक्षण, गौशालाओं के प्रभावी संचालन और मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना की प्रगति की समीक्षा को लेकर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सोमवार को कैंप कार्यालय में जनपद स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक की। बैठक में गौवंश संरक्षण से जुड़े प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में कोई भी निराश्रित गौवंश सड़कों पर दिखाई नहीं देना चाहिए। यदि कहीं भी बेसहारा गोवंश खुले में विचरण करता मिला तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि गौवंश संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि किसानों की सुरक्षा, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और पशु कल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना का लाभ समय पर मिले, हर महीने 5 तारीख तक पहुंचे डीबीटी भुगतान

बैठक में मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को गोवंशों के भरण-पोषण के लिए मिलने वाली सहायता राशि प्रतिमाह 5 तारीख तक डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उनके बैंक खातों में अनिवार्य रूप से पहुंचनी चाहिए।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 2,840 गोवंश लाभार्थियों को सुपुर्द किए जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
भुगतान प्रक्रिया के लिए तय की गई समयबद्ध कार्ययोजना

बैठक में डीबीटी भुगतान को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया तय की गई।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि:
- प्रत्येक माह 20 से 22 तारीख के बीच ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और लेखपाल संयुक्त रूप से सुपुर्द किए गए गोवंशों का सत्यापन करेंगे।
- सत्यापन रिपोर्ट एवं फंड रिक्वेस्ट संयुक्त हस्ताक्षर के साथ संबंधित खंड विकास अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी।
- संबंधित पशु चिकित्साधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी संयुक्त हस्ताक्षरित रिपोर्ट 23 तारीख तक मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भेजेंगे।
- मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी संयुक्त रूप से रिपोर्ट का परीक्षण कर 25 तारीख तक निदेशक, पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश को प्रेषित करेंगे।
- इसके बाद पात्र लाभार्थियों के खातों में प्रत्येक माह 5 तारीख तक डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
बंद पड़ी गौशालाओं को अगस्त के अंत तक फिर से किया जाएगा संचालित

जिलाधिकारी ने उन 100 गौवंश क्षमता वाली गौशालाओं की समीक्षा की, जो वर्तमान में बंद हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी गौशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए और उनमें आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित कर अगस्त माह के अंत तक पुनः संचालित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिन गौशालाओं में संपर्क मार्ग, विद्युत संयोजन, अतिरिक्त शेड या अन्य मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराया जाए ताकि अधिक संख्या में निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
सभी ब्लॉकों में खरीदे जाएंगे कैटल कैचर
जिले में निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और गौशालाओं तक पहुंचाने के लिए जिलाधिकारी ने सभी विकास खंडों में कैटल कैचर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को निर्देशित किया कि सभी ब्लॉकों में शीघ्र खरीद प्रक्रिया पूरी कराई जाए ताकि किसी भी क्षेत्र में बेसहारा गोवंश मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
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कच्चे रास्तों को बनाया जाएगा पक्का
गौशालाओं तक आवागमन की समस्या को दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जहां अब भी कच्चे संपर्क मार्ग हैं, वहां क्षेत्र पंचायत के माध्यम से प्रस्ताव भेजकर खड़ंजा एवं पक्के संपर्क मार्गों का निर्माण कराया जाए।
उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क सुविधा से चारा, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री समय पर गौशालाओं तक पहुंच सकेगी, जिससे पशुओं की देखभाल और प्रबंधन आसान होगा।
हरा चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए एसडीएम करेंगे भूमि सत्यापन
बैठक में जिलाधिकारी ने गौशालाओं से संबद्ध भूमि पर हरे चारे की खेती बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को निर्देश दिए कि गौशालाओं से जुड़ी भूमि का सत्यापन कर वहां हरे चारे की बुवाई सुनिश्चित कराई जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर चारा उत्पादन बढ़ने से गौशालाओं के संचालन में आसानी होगी और पशुओं को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
घटिया निर्माण सामग्री मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
बैठक के दौरान निर्माणाधीन गौशालाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी निर्माणाधीन गौशाला में अधोमानक निर्माण सामग्री का उपयोग पाया जाता है तो संबंधित कार्यदायी संस्था या जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप ही पूरे किए जाएं।
निरीक्षण में लापरवाही पर सीवीओ को लगाई फटकार
जिलाधिकारी ने याद दिलाया कि उन्होंने पहले ही निर्देश दिए थे कि हर 15 दिन में जिला स्तरीय अधिकारी गौशालाओं का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
समीक्षा में पाया गया कि कई गौशालाओं का निरीक्षण समय पर नहीं हुआ और रिपोर्ट भी निर्धारित समय में प्रस्तुत नहीं की गई। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को कड़ी फटकार लगाते हुए निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि नियमित निरीक्षण के बिना गौशालाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है, इसलिए सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएं।
किसानों की समस्या का स्थायी समाधान प्राथमिकता
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि बेसहारा गोवंशों के कारण किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को रोकना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने, बंद गौशालाओं को पुनः संचालित करने और सभी निराश्रित गोवंशों को संरक्षित करने की दिशा में व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल गोवंशों को आश्रय देना ही नहीं, बल्कि किसानों को राहत प्रदान करना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और गौशालाओं का दीर्घकालिक एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना भी है।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, अपर जिलाधिकारी आजाद भगत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पांडेय सहित पशुपालन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने अंत में कहा कि गौवंश संरक्षण से जुड़े सभी कार्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।


