Agra Breaking: बाल दिवस पर प्राथमिक विद्यालय कछपुरा सरेंडा में बच्चों को मिले निःशुल्क जूते-मोज़े, सामुदायिक सहभागिता बनी प्रेरणा
आगरा के खेरागढ़ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कछपुरा सरेंडा में बाल दिवस पर सामुदायिक सहभागिता से बच्चों को निःशुल्क जूते-मोज़े मिले। डॉ. डी.एस. राजौरिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान।

बाल दिवस पर प्राथमिक विद्यालय कछपुरा सरेंडा में नन्हें कदमों की मुस्कान — सामुदायिक सहभागिता से बच्चों को मिले निःशुल्क जूते-मोज़े
रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा/खेरागढ़, 14 नवम्बर 2025
खेरागढ़। “हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान और पैरों में आत्मविश्वास का कदम” — इसी भाव को साकार किया गया ब्लॉक खेरागढ़ के प्राथमिक विद्यालय कछपुरा सरेंडा में आयोजित एक भावनात्मक और प्रेरक कार्यक्रम में।
बाल दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में सामुदायिक सहभागिता के तहत बच्चों को निःशुल्क जूते और मोज़े वितरित किए गए।
कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के चेहरों पर खुशी बिखेरी, बल्कि समाज और शिक्षा के बीच मजबूत जुड़ाव की मिसाल भी पेश की।
कार्यक्रम का शुभारंभ — मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ

कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान की देवी मां सरस्वती के छाया चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ।
मुख्य मंच पर उपस्थित रहे —
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मुख्य अतिथि: अनिल कुमार शर्मा (जिला पंचायत सदस्य)
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विशिष्ट अतिथि: डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय (प्रवक्ता, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, आगरा)
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अध्यक्ष: सुरेश सिंह सिकरवार (भूतपूर्व प्रधान, पीपलखेड़ा)
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विशेष उपस्थिति: महेश चंद्र (खंड शिक्षा अधिकारी, खेरागढ़) एवं आयुष प्रभात (प्रभारी, निपुण सेल)।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक डॉ. सतीश कुमार ने बड़े ही प्रभावशाली शब्दों में किया। उन्होंने कहा —
“बच्चों की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज का सहयोग, परिवार का स्नेह और समुदाय की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है। मातृशक्ति बच्चों के जीवन की पहली शिक्षिका होती है।”
सामुदायिक सहभागिता बनी प्रेरणा का आधार

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसे सरकारी सहायता से नहीं, बल्कि सामुदायिक योगदान से सफल बनाया गया।
आगरा के लघु सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त कर्मी डॉ. डी.एस. राजौरिया, विद्यालय की गतिविधियों और बच्चों की लगन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने स्वयं के सहयोग से सभी छात्र-छात्राओं के लिए जूते प्रदान किए।
साथ ही नगला कमाल के प्रसिद्ध व्यवसायी नसरुद्दीन (आशिक रेडीमेड) ने विद्यालय के बच्चों को मोज़े भेंट किए।
इस अनूठे उपहार को पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।
बालक-बालिकाओं ने एक स्वर में “धन्यवाद” कहकर सभी अतिथियों और दाताओं का आभार जताया।
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शिक्षा, संवेदना और समाज का सुंदर संगम

अकादमिक रिसोर्स पर्सन सौरभ शर्मा ने अभिभावकों को सरकार की विभिन्न शैक्षिक योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे राज्य सरकार का निपुण भारत मिशन और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम मिलकर बच्चों की नींव मजबूत कर रहे हैं।
ब्लॉक मेंटर डॉ. मनोज वार्ष्णेय ने कहा —
“इन नन्हे-मुन्नों में ही देश का भविष्य छिपा है। इनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही सबसे बड़ी सेवा है। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास आने वाले कल को उज्जवल बनाते हैं।”
खंड शिक्षा अधिकारी महेश चंद्र ने कहा कि —
“सामुदायिक सहयोग से विद्यालयों की छवि बदल रही है। आज माता-पिता, समाजसेवी और स्थानीय लोग बच्चों के विकास में बराबर की भूमिका निभा रहे हैं, यही ‘नया भारत’ का स्वरूप है।”
बाल दिवस पर बच्चों की मुस्कान ने जीता सबका दिल
बाल दिवस के इस विशेष अवसर पर विद्यालय में आनंद और उल्लास का माहौल था।
बच्चे नए जूते-मोज़े पहनकर खिलखिला उठे।
शिक्षकों ने बच्चों के साथ “हम होंगे कामयाब” और “नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है” जैसे गीतों के माध्यम से उन्हें प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को अंगवस्त्र और पुष्पमालाओं से सम्मानित किया गया।
इसके उपरांत विद्यालय परिवार की ओर से उपस्थित सभी मेहमानों और बच्चों को मिष्ठान वितरण किया गया।
शिक्षा में सहयोग की नई मिसाल
विद्यालय इंचार्ज डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि —
“यह कार्यक्रम केवल जूतों-मोजों का वितरण नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज के बीच सहयोग का प्रतीक है। बच्चों की जरूरतों को समझना और उन्हें सशक्त बनाना ही असली बाल दिवस का सम्मान है।”
इस अवसर पर सुरेश सिंह सिकरवार, अनिल कुमार शर्मा, महेश चंद्र, डॉ. मनोज वार्ष्णेय, आयुष प्रभात, सौरभ शर्मा, धर्मेंद्र भगौर, हरिओम तोमर, मनीष मुद्गल, और ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बच्चों के माता-पिता ने भी विद्यालय प्रबंधन की इस पहल की सराहना की और कहा कि अब वे भी स्कूल की गतिविधियों में और अधिक सहयोग देंगे।
निष्कर्ष: शिक्षा का सच्चा उत्सव
यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि समाज और शिक्षा एक साथ कदम बढ़ाएं, तो कोई भी विद्यालय संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि उत्साह और संवेदना से आगे बढ़ सकता है।
प्राथमिक विद्यालय कछपुरा सरेंडा का यह कार्यक्रम बाल दिवस के दिन बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और समाज के हृदय में गर्व की भावना छोड़ गया।
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