डॉ. संजय निषाद ने आगरा में की मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक | झींगा पालन और PM मत्स्य संपदा योजना पर दिए अहम निर्देश
आगरा में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने विभागीय समीक्षा कर मत्स्यपालकों से संवाद किया। झींगा पालन, एक्वा पार्क, PMMSY और 41,500 करोड़ की सरकारी योजनाओं पर की बड़ी घोषणाएँ।

डॉ. संजय निषाद ने आगरा में की मत्स्य विभाग की विस्तृत समीक्षा, बोले — “मत्स्यपालन से आत्मनिर्भर बनेगा नया भारत”
रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 24 अक्टूबर 2025
उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने शुक्रवार को आगरा स्थित सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण मंडलीय समीक्षा बैठक की, जिसमें मत्स्य विभाग, सिंचाई विभाग, बैंकिंग संस्थान, NABARD और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इस बैठक का उद्देश्य था — राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही मत्स्य योजनाओं की प्रगति, वित्तीय सहयोग की स्थिति, मत्स्यपालकों की समस्याओं और उत्पादन वृद्धि के प्रयासों की विस्तृत समीक्षा करना।
मत्स्य विभाग, सिंचाई और बैंकिंग विभागों के बीच समन्वय पर ज़ोर
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि “सरकार की योजनाएँ तभी सफल होंगी जब विभाग आपसी तालमेल से काम करें।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तालाबों के पट्टों का आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जाए, ताकि अधिक से अधिक मत्स्यपालक योजनाओं से जुड़ सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग संस्थान मत्स्यपालकों को ऋण देने में लापरवाही न करें और उन्हें सरल व त्वरित प्रक्रिया में सहायता दें।
“मत्स्यपालक समाज केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। जब यह वर्ग मजबूत होगा, तब गांवों की आर्थिक प्रगति स्वतः संभव होगी।”
— डॉ. संजय निषाद, मत्स्य मंत्री, उत्तर प्रदेश
मत्स्यपालकों से सीधा संवाद – योजनाओं की जानकारी और सुझाव
बैठक के बाद मंत्री ने जनपद के दर्जनों मत्स्यपालकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने उनसे उनकी समस्याएँ, अनुभव और अपेक्षाएँ जानीं।
इस दौरान उन्होंने विस्तार से बताया कि राज्य सरकार मत्स्यपालकों के लिए किन-किन कल्याणकारी योजनाओं पर काम कर रही है —
प्रमुख योजनाएँ:
-
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY):
-
मत्स्य उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ मत्स्यपालकों को आधुनिक तकनीक व प्रशिक्षण की सुविधा।
-
तालाब विकास, हैचरी, आइस प्लांट, प्रोसेसिंग यूनिट आदि के लिए वित्तीय सहायता।
-
₹5 लाख तक बीमा कवरेज — आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में।
-
आंशिक विकलांगता पर ₹2.5 लाख की सहायता राशि।
-
-
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना (CMMSY):
-
राज्य स्तर पर मत्स्य पालन हेतु अनुदान और प्रशिक्षण सुविधाएँ।
-
स्थानीय युवाओं को मत्स्य उद्यमिता की दिशा में प्रोत्साहन।
-
-
मत्स्यपालक कल्याण कोष:
-
मत्स्यपालकों और उनके परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा और दुर्घटना सहायता।
-
बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग।
-
“पिछली सरकारों ने 67 साल में 3 हजार करोड़ दिए, हमारी सरकार ने साढ़े छह साल में 41,500 करोड़”
डॉ. निषाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछली सरकारों ने मत्स्यपालकों के हितों की कभी परवाह नहीं की।
उन्होंने बताया कि आजादी के 67 सालों में मत्स्य विभाग को मात्र ₹3,000 करोड़ का बजट मिला था, जबकि वर्तमान सरकार ने केवल 6.5 वर्षों में ₹41,500 करोड़ आवंटित किए हैं।
“यह बदलाव केवल संख्याओं का नहीं, सोच का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने मत्स्यपालकों को समाज की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है।”
मंत्री ने कहा कि मत्स्यपालन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला क्षेत्र बन चुका है।
झींगा मछली पालन: आगरा का नया आर्थिक अवसर
आगरा जनपद में खारे जल की प्रचुरता के कारण यहां झींगा मछली पालन (Shrimp Farming) को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
डॉ. निषाद ने बताया कि जिले में अब तक 282 प्रोजेक्ट चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 200 प्रोजेक्ट स्वीकृत और संचालित हैं।
“आगरा में खारा पानी झींगा उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। हम इसे आर्थिक विकास का नया केंद्र बनाना चाहते हैं।”
इसके साथ ही मंत्री ने बताया कि मथुरा और आगरा में अंतरराष्ट्रीय स्तर का हाई-टेक एक्वा पार्क और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है।
मथुरा की बंद पड़ी प्रोसेसिंग यूनिट को भी दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और मत्स्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन बढ़ेगा।
तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल ट्रैकिंग की दिशा में नवाचार
डॉ. निषाद ने बताया कि अब मत्स्यपालन क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
राज्य सरकार जल्द ही एक “मछुआरा मित्र मोबाइल ऐप” लॉन्च करने जा रही है, जिसमें सभी योजनाओं, सब्सिडी, तालाब आवंटन और ऋण स्थिति की रीयल-टाइम जानकारी उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि मत्स्यपालकों के लिए डिजिटल आईडी और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी योजनाओं तक पहुँच आसान होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
महिलाओं को भी मत्स्यपालन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा
मंत्री ने कहा कि मत्स्यपालन केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं है। कई जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह झींगा पालन, बीज उत्पादन और मछली प्रसंस्करण में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने घोषणा की कि आगामी वर्ष से महिलाओं को विशेष 40% सब्सिडी दर पर झींगा पालन प्रोजेक्ट दिए जाएंगे।
TVS Apache RTX 300 Launch 2025 | Price, Engine Power, Specifications & Features
भविष्य की योजना: आगरा को “फिशरी हब” बनाना
सरकार का लक्ष्य है कि आगरा-मथुरा बेल्ट को प्रदेश का “फिशरी हब” बनाया जाए।
यहां उत्पादित झींगा और अन्य मछलियाँ न केवल स्थानीय बाजार बल्कि निर्यात के लिए भी भेजी जाएँगी।
इसके लिए सरकार निजी निवेशकों और सहकारी समितियों को जोड़कर एक्वा क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल लागू करेगी।
निष्कर्ष — मत्स्यपालकों के सशक्तिकरण का नया अध्याय
आगरा की यह समीक्षा बैठक केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं थी, बल्कि मत्स्यपालकों के सम्मान, अधिकार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम थी।
डॉ. निषाद का यह संदेश स्पष्ट था —
“सरकार मत्स्यपालकों को केवल सहायता नहीं, अवसर देना चाहती है। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश मत्स्य उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश में अग्रणी होगा।”
CHECK ALSO:
आगरा रोजगार मेला: केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल बोले — “यह नियुक्ति पत्र अंत नहीं, नई शुरुआत है” | मोदी सरकार ने दिए 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र
आगरा की दिव्या ने “मेरा सपना भारत” राष्ट्रीय भाषण प्रतियोगिता में हासिल किया तृतीय स्थान | GovernmentSchool.in | WeCitizens Foundation
आगरा में निःशुल्क सरसों बीज वितरण शुरू | पूसा मस्टर्ड 32 के 25,000 मिनीकिट | agridarshan.up.gov.in Registration
आगरा में निपुण भारत मिशन प्रशिक्षण का समापन | पुष्पा कुमारी बोलीं – हर विद्यालय को बनाना है निपुण
खेरागढ़ हादसा: लोधी समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ, दुर्गा विसर्जन में जान गंवाने वाले परिवारों को ₹8.40 लाख की आर्थिक सहायता




