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AGRA BREAKING: जिलाधिकारी आगरा अरविंद मल्लप्पा बंगारी के सुझाव “डिजिटल वॉल ऑफ फेम” में शामिल – विकसित भारत 2047 में आगरा का राष्ट्रीय योगदान

विकसित भारत 2047 हेतु जिलाधिकारी आगरा अरविंद मल्लप्पा बंगारी के बहुमूल्य सुझाव भारत सरकार की “डिजिटल वॉल ऑफ फेम” में शामिल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नवंबर 2025 में प्रस्तावित “5th National Conference of Chief Secretaries” में होगी प्रदर्शनी।

जनपद आगरा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी के सुझाव “विकसित भारत-2047” हेतु भारत सरकार की “डिजिटल वॉल ऑफ फेम” में होंगे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाले 5वें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन में आगरा की पहचान राष्ट्रीय पटल पर चमकेगी

Saleem Sherwani

रिपोर्ट — एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़), हिंदी दैनिक समाचार

आगरा, 09 अक्टूबर 2025


आगरा को मिला राष्ट्रीय स्तर का सम्मान

जनपद आगरा एक बार फिर राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराने जा रहा है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी द्वारा विकसित भारत – 2047 विषय पर दिए गए फीडबैक नोट और नीतिगत सुझावों को भारत सरकार ने “डिजिटल वॉल ऑफ फेम” में प्रदर्शित करने के लिए चुना है।
यह निर्णय आगरा प्रशासन की नीति नवाचार, बाल विकास और प्रशासनिक दक्षता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

🇮🇳 विकसित भारत 2047 : प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि का राष्ट्रीय अभियान

विकसित भारत – 2047” अभियान का उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को एक संपूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना है। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, प्रशासनिक अधिकारियों और जिलाधिकारियों से नीतिगत सुधारों, विकास मॉडल और क्षेत्रीय नवाचारों पर सुझाव आमंत्रित किए थे।

इसी पहल के अंतर्गत भारत सरकार ने प्रत्येक जनपद से प्राप्त फीडबैक नोट्स का मूल्यांकन किया, जिनमें से केवल चुनिंदा सुझावों को “डिजिटल वॉल ऑफ फेम” के लिए चुना गया।
आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का नाम इस चयनित सूची में शामिल किया गया है — जो जनपद के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

“डिजिटल वॉल ऑफ फेम” क्या है?

भारत सरकार द्वारा तैयार की जा रही यह “Digital Wall of Fame” एक इंटरएक्टिव डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म होगा, जिस पर देशभर के उन जिलों और अधिकारियों के अभिनव विचारों और नीति सुझावों को प्रदर्शित किया जाएगा जिन्होंने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को सशक्त करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

इसमें प्रत्येक चयनित अधिकारी की फोटो, उनके सुझाव, और उन सुझावों से संबंधित प्रभावशाली प्रथाएँ (Best Practices) शामिल की जाएंगी।
इसका उद्देश्य है कि अन्य जिलों और राज्यों को भी नवाचार और नीति सुधारों के सफल मॉडलों से सीखने का अवसर मिले

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जिलाधिकारी आगरा के चयनित सुझाव — जमीनी चुनौतियों से राष्ट्रीय समाधान तक

जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने अपने सुझावों में विशेष रूप से बाल विकास, प्रारंभिक बाल शिक्षा, मातृ एवं शिशु पोषण, और डिजिटल निगरानी प्रणाली जैसे विषयों पर फोकस किया।

1. प्रारंभिक बाल शिक्षा (ECCE) पर विशेष बल

उन्होंने कहा कि “बाल्यावस्था ही वह नींव है जिस पर विकसित भारत की इमारत खड़ी होगी।”
जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि प्रारंभिक बाल शिक्षा (ECCE) को केवल शिक्षण तक सीमित न रखकर, इसे पोषण, मानसिक विकास और परिवारिक सहभागिता से जोड़ा जाए।

2. आंगनवाड़ी प्रणाली में सुधार

आंगनवाड़ी केन्द्रों की जमीनी स्थिति को बेहतर करने के लिए उन्होंने AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, स्मार्ट लर्निंग किट्स, और डिजिटल प्रशिक्षण मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि टेक्नोलॉजी को ग्राम स्तर तक पहुंचाया जाए तो बच्चों की उपस्थिति, पोषण स्तर और सीखने के परिणामों में क्रांतिकारी सुधार हो सकता है।

3. मानव संसाधन सशक्तिकरण

जिलाधिकारी ने अपने नोट में उल्लेख किया कि बाल विकास योजनाओं की सफलता के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन आवश्यक हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य स्तर पर डिजिटल ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएं जहां सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व पर्यवेक्षक निरंतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

4. कुपोषण और मातृ-शिशु देखभाल

कुपोषण को समाप्त करने के लिए जिलाधिकारी ने डेटा-ड्रिवन मॉनिटरिंग और पोषण मानचित्रण प्रणाली (Nutrition Mapping System) लागू करने का सुझाव दिया। इससे प्रत्येक बच्चे और माता की स्वास्थ्य स्थिति का वास्तविक समय पर मूल्यांकन किया जा सकेगा।

5. आगरा मॉडल की सफलता – एक उदाहरण पूरे देश के लिए

जिलाधिकारी ने अपने सुझावों में यह भी उल्लेख किया कि जनपद आगरा में पहले से चल रही बाल वाटिका और लर्निंग लैब जैसी सफल पहलें अन्य जिलों के लिए रोल मॉडल बन सकती हैं।
यह मॉडल न केवल कम लागत वाला है बल्कि दीर्घकालिक, टिकाऊ और प्रभावी भी है।

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क्यों खास है आगरा का चयन

भारत सरकार ने प्रत्येक राज्य से केवल दो जिलों के फीडबैक नोट्स को चुना है।
उत्तर प्रदेश से आगरा का चयन इस बात का प्रमाण है कि जनपद में नवाचार, नेतृत्व क्षमता और नीति-निर्माण में सक्रिय भागीदारी को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।

इस पहल से यह भी संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार अब जमीनी स्तर की कार्यप्रणालियों और स्थानीय प्रशासनिक नवाचारों को राष्ट्रीय नीति निर्धारण में प्राथमिकता दे रही है।

नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में प्रस्तावित सम्मेलन

आगामी नवंबर 2025 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाला
“5th National Conference of Chief Secretaries” भारत की नीति निर्माण यात्रा का ऐतिहासिक सम्मेलन माना जा रहा है।
इस सम्मेलन की थीम “Human Capital for Viksit Bharat” होगी, जिसमें देशभर के मुख्य सचिव, नीति आयोग, और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

इस मंच पर जिलाधिकारी आगरा के सुझावों को प्रस्तुत किया जाएगा और उनके आधार पर भविष्य की मानव संसाधन नीति, शिक्षा सुधार और बाल विकास रणनीति पर चर्चा होगी।

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जिलाधिकारी का दृष्टिकोण

जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने इस अवसर पर कहा —

“विकसित भारत की दिशा में यदि हम अपने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल पर ध्यान देंगे तो यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी होगी।
आगरा की पहल इस दिशा में एक छोटा परंतु महत्वपूर्ण कदम है। यह सम्मान संपूर्ण आगरा टीम और जनता की सहभागिता का परिणाम है।”

राष्ट्रीय नीति निर्माण में जिलों की भूमिका

यह चयन न केवल आगरा के लिए बल्कि समस्त देश के जिलाधिकारियों के लिए भी एक प्रेरणा है।
अब केंद्र सरकार का जोर जिलों को नीति प्रयोगशाला (Policy Lab) के रूप में विकसित करने पर है, ताकि जमीनी स्तर पर लागू नीतियों की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जा सके।

आगरा की उपलब्धि का व्यापक प्रभाव

  1. आगरा जिले की पहचान अब राष्ट्रीय नवाचार मॉडल के रूप में स्थापित होगी।

  2. आगरा प्रशासन द्वारा प्रस्तुत मॉडल अन्य राज्यों में भी रिप्लिकेटेबल फ्रेमवर्क के रूप में अपनाया जा सकेगा।

  3. बाल विकास, पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में आगरा की पहलें अब नीति आयोग और शिक्षा मंत्रालय के लिए रेफरेंस केस स्टडी बनेंगी।

निष्कर्ष

जनपद आगरा के लिए यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक मान्यता नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब स्थानीय स्तर की सोच को राष्ट्रीय नीति से जोड़ा जाता है, तब भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत बनती है।

जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की यह पहल विकसित भारत – 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक प्रेरक और ऐतिहासिक कदम है।

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