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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: आगरा में प्रो. डी.पी. सिंह की अध्यक्षता में बैठक, विकसित उत्तर प्रदेश @2047 पर जोर

आगरा में प्रो. डी.पी. सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और विकसित उत्तर प्रदेश @2047 विषय पर बैठक हुई। पढ़ें – कौशल विकास, रोजगार मेले और शिक्षा सुधार पर क्या लिए गए फैसले।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी तेज़ – आगरा में प्रो. डी.पी. सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक

Saleem Sherwani

ब्यूरो चीफ़ – एस. शेरवानी

आगरा, 05 अक्टूबर 2025 | 

उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्यों की सूची में शामिल करने के विज़न के साथ, शनिवार को आगरा मंडल आयुक्त कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रो. डी.पी. सिंह (शिक्षा सलाहकार, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश एवं पूर्व अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग – UGC) ने की।

बैठक का विषय था –
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन और विकसित उत्तर प्रदेश @2047”

इस मौके पर प्रदेश और ज़िले के शीर्ष शिक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन किया।

बैठक का मुख्य एजेंडा: शिक्षा और कौशल का मेल

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बैठक का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि –

  • NEP 2020 को जमीनी स्तर पर उतारकर स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं से जोड़ा जाए।

  • शिक्षा + कौशल विकास (Skill Development) का समन्वय हो, ताकि विद्यार्थी केवल डिग्री धारक न रहकर रोज़गार सृजक और समाज के नेता बनें।

  • 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विज़न में उत्तर प्रदेश की केंद्रीय भूमिका सुनिश्चित हो।

प्रो. सिंह ने स्पष्ट कहा कि –


“यदि हम केवल शिक्षा देंगे लेकिन उसे स्थानीय आवश्यकताओं और कौशल से नहीं जोड़ेंगे, तो हमारी युवा पीढ़ी अपूर्ण रह जाएगी। हमें ऐसे युवा चाहिए जो अपने जनपद में ही रोज़गार पाएँ और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।”

“वन डिस्ट्रिक्ट – वन प्रोजेक्ट” मॉडल पर जोर

बैठक में प्रो. सिंह ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए कहा कि –

  • हर ज़िले की अपनी विशेषता और पहचान है।

  • यदि शिक्षा और कौशल विकास को उस पहचान से जोड़ा जाए तो स्थानीय स्तर पर रोज़गार और उद्यमिता के बड़े अवसर पैदा होंगे।

उदाहरण:

  • आगरा = पर्यटन और हस्तशिल्प

  • मैनपुरी = संगीत वाद्ययंत्र

  • बटेश्वर = धार्मिक पर्यटन
    इन क्षेत्रों से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग और कोर्सेज़ छात्रों के भविष्य को नई दिशा देंगे।

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QR कोड और डिजिटल सहभागिता का सुझाव

प्रो. सिंह ने विभागों को निर्देश दिया कि –

  • पंचायत, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार मंडल और ग्राम प्रधान मिलकर संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करें।

  • हर कार्यक्रम में QR कोड आधारित फीडबैक सिस्टम विकसित किया जाए।

  • जनता, अभिभावकों और विद्यार्थियों से डिजिटल सुझाव लेकर नीति को और प्रभावी बनाया जाए।

इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता भी पॉलिसी मेकिंग में सहभागी बनेगी।

रोजगार मेले और रोल मॉडल स्टूडेंट्स की योजना

बैठक में राजकीय आईटीआई कॉलेजों को विशेष जिम्मेदारी दी गई।

  • नियमित रोजगार मेले (Job Fairs) आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
  • कॉलेजों से उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके छात्र-छात्राओं को “Connect Stabilize” पद्धति से जोड़ा जाए।
  • ये छात्र नए विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल बनें और अपने अनुभव साझा करें।

इससे छात्रों में आत्मविश्वास और कौशल दोनों बढ़ेंगे और युवा समाज के प्रेरक बनेंगे।

उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार की आवश्यकता

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प्रो. सिंह ने उच्च शिक्षा विभाग को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए –

  • भाषा सीखने के कोर्स शुरू करने से पहले पिछले वर्षों में बाज़ार की डिमांड का विश्लेषण किया जाए।

  • विश्वविद्यालय और कॉलेज आपसी सहयोग से अपनी गतिविधियों को साझा करें।

  • शैक्षिक संस्थानों में “Culture of Appreciation” और “Culture of Punishment” का संतुलन अपनाया जाए।

  • शिक्षकों और छात्रों दोनों के बीच जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित हो।

  • विश्वविद्यालयों में रिसर्च कल्चर (Research Culture) को बढ़ावा दिया जाए।

उन्होंने कहा –


“यदि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाली फैक्ट्रियाँ बनकर रह गए तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। हमें ऐसे संस्थान चाहिए जहाँ नवाचार (Innovation) और अनुसंधान (Research) की गूंज सुनाई दे।”

स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित शिक्षा मॉडल

बैठक में यह भी तय हुआ कि –

  • शिक्षा योजनाएँ केवल पाठ्यक्रम आधारित न हों, बल्कि स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़ी हों।

  • निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग वर्ग के लोगों से संवाद कर उनकी राय लेनी होगी।

  • इन सुझावों को योजना में शामिल कर शिक्षा को अधिक वास्तविक और प्रासंगिक बनाया जाएगा।

मुख्य विकास अधिकारी की रिपोर्ट

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, प्रतिभा सिंह ने जानकारी दी कि –

  • आगरा जिले में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत कई शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

  • इन कार्यक्रमों का मकसद है कि हर छात्र केवल पढ़-लिखकर नौकरी खोजने वाला न बने, बल्कि अपने कौशल और ज्ञान से नौकरी देने वाला (Job Creator) बने।

निष्कर्ष: शिक्षा से बनेगा “विकसित उत्तर प्रदेश”

बैठक का समापन करते हुए प्रो. डी.पी. सिंह ने कहा –

“हमें ऐसे युवा तैयार करने होंगे जो न केवल अपने लिए बल्कि पूरे समाज और विश्व के लिए मार्गदर्शन बन सकें। शिक्षा और कौशल का सही मेल ही उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाएगा और भारत को 2047 तक विश्वगुरु के रूप में स्थापित करेगा।”

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

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  • राजेश कुमार, अपर आयुक्त (प्रशासन) आगरा

  • प्रतिभा सिंह, मुख्य विकास अधिकारी आगरा

  • डॉ. राजेश प्रकाश, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी

  • मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) आगरा

  • संयुक्त निदेशक व्यावसायिक शिक्षा

  • जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा के रजिस्टार

  • आगरा कॉलेज, सेन्ट जोन्स कॉलेज, आरबीएस कॉलेज और विभिन्न आईटीआई कॉलेजों के प्राचार्य व प्रोफेसर

 

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