श्रीमद भागवत कथा का भव्य समापन: संतों के आशीर्वाद और स्वदेशी संदेश से गूंजा धाकड़ धर्मशाला
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 01-10-2025
आगरा। धाकड़ समाज द्वारा धाकड़ धर्मशाला में आयोजित सप्ताहभर चली श्रीमद भागवत कथा का अंतिम दिन आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय संगम बन गया। हजारों श्रद्धालु धर्मशाला में उमड़े और कथा श्रवण के साथ संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर संतों ने न केवल अध्यात्मिक जीवन मूल्यों का संदेश दिया, बल्कि समाज को स्वदेशी अपनाने और धर्म-संस्कारों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी प्रदान की।
संतों का समागम और आध्यात्मिक संदेश
अंतिम दिन मंच पर कथा वाचक पंडित अभिषेक जी महाराज ने अपनी मधुर वाणी में कथा का वाचन किया। उनके साथ राष्ट्रीय संत अरविंद महाराज और प्रेमनिधि मंदिर, आगरा के संत हरी मोहन शर्मा भी उपस्थित रहे।
संतों ने कहा—
-
“श्रीमद भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।”
-
“जब समाज धर्म और संस्कारों को अपनाता है तो परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों मजबूत होते हैं।”
-
“स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा को भी जीवित रखेगा।”
राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी और स्वदेशी का संदेश
इस अवसर पर आगरा-फिरोजाबाद शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी विजय शिवहरे ने संतों से आशीर्वाद लिया और मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा—
-
“सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए संतों का मार्गदर्शन आवश्यक है। संत समाज ही हमारी संस्कृति के रक्षक हैं।”
-
उन्होंने दीपावली पर मिट्टी से बने दीपक और स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील की।
-
“विदेशी वस्तुएं हमारे धन को बाहर ले जाती हैं, जबकि स्वदेशी अपनाकर हम अपने किसानों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को सहारा देते हैं।”
https://hindidainiksamachar.com/bhagwat-katha-cabinet-minister-yogendra-upadhyay-in-dhakad-dharamshala-with-devotees/
कथा का भावपूर्ण समापन – कृष्ण-सुदामा प्रसंग
कथा के अंतिम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया गया।
इस प्रसंग ने दर्शाया कि सच्ची मित्रता जाति, धन और पद से परे होती है। श्रीकृष्ण का सुदामा के प्रति अपनापन और करुणा श्रोताओं की आंखें नम कर गईं।
आयोजक राजवीर सिंह धाकड़ ने कहा—
“कथा के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि समाज में प्रेम, मित्रता और त्याग ही सबसे बड़ा धर्म है।”
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
भक्तों की भारी भीड़ और प्रसाद वितरण
कथा के व्यवस्थापक कर्ण सिंह धाकड़ ने बताया कि अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु कथा में सम्मिलित हुए।
-
धर्मशाला में जगह-जगह भक्ति गीतों की गूंज रही।
-
कथा के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद वितरण की भव्य व्यवस्था की गई।
-
यह सेवा समाज के ही कार्यकर्ताओं और भक्तों द्वारा की गई, जिससे सामूहिकता और सहयोग का अद्भुत संदेश सामने आया।
आयोजन में महिलाओं और कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में समाज की महिलाओं और युवाओं का विशेष योगदान रहा।
शकुंतला, मिथलेश, कमलेश, मीरा, सुशीला, अनीता जैसी महिलाओं ने सेवा और व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं बृजराज सिंह, महेंद्र सिंह धाकड़, धर्मेंद्र कुमार धाकड़, केशव धाकड़, पिंटू धाकड़, लक्ष्मण धाकड़ सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
https://hindidainiksamachar.com/tata-motors-demerger-record-date-2025/
समाज और धर्म का संगम
इस कथा ने यह साबित किया कि धार्मिक आयोजन केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय चेतना का माध्यम भी बनते हैं।
संतों ने कहा—
“जब परिवार धर्म से जुड़े रहते हैं तो उनकी जड़ें मजबूत होती हैं। स्वदेशी और सनातन का पालन ही भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखेगा।”
CHECK ALSO:
राजकीय हाईस्कूल बल्हैरा में करियर गाइडेंस मेला 2025 | विद्यार्थियों को मिला भविष्य का मार्गदर्शन
आगरा मंडल सड़क सुरक्षा समिति की बैठक: ओवरलोड वाहन, स्कूल बस और ब्लैक स्पॉट पर बड़े फैसले
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विकसित उत्तर प्रदेश@2047 महा अभियान | नगर निकायों से सीधा संवाद
आगरा: एसएन मेडिकल कॉलेज में स्वस्थ्य नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत स्वास्थ्य शिविर
