महिलाओं की आत्मनिर्भरता का संगम: विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश और मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने किया “मंडलीय सरस मेला – 2025” का शुभारंभ

रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)

स्थान: जीआईसी ग्राउंड, आगरा

दिनांक: 14 अक्टूबर 2025

“महिलाएं अब नौकरी ढूंढने वाली नहीं, बल्कि नौकरी देने वाली बन चुकी हैं” — विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश

“जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो समाज अपने आप प्रगति करता है” — मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह

स्वदेशी भावना और महिला शक्ति का मिला संगम

मंडलीय सरस मेला 2025: आगरा के जीआईसी ग्राउंड में सोमवार को आयोजित यूपी ट्रेड शो–2025 और स्वदेशी मेले में “मंडलीय सरस मेला–2025” का शुभारंभ बड़े ही उत्साह और परंपरागत गरिमा के साथ किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश और मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और दीप प्रज्ज्वलित कर मेले की शुरुआत की।

कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में रोली तिलक और पुष्प वर्षा के साथ अतिथियों का स्वागत किया।
यह दृश्य महिला सशक्तिकरण और स्वदेशी संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन गया।

महिलाओं के हुनर की महक – गांव से ग्लोबल तक

मंडल के सभी जिलों की स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं ने इस मेले में हस्तनिर्मित वस्त्र, मिट्टी के बर्तन, हर्बल उत्पाद, गृह उपयोगी सामग्री, आभूषण, और पारंपरिक खाद्य उत्पाद के आकर्षक स्टॉल लगाए।
हर स्टॉल पर महिलाओं की मेहनत, सृजनशीलता और आत्मनिर्भरता की कहानी झलक रही थी।

मंडलायुक्त ने स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए समूहों की महिलाओं से निर्माण प्रक्रिया, प्रशिक्षण, उत्पाद की गुणवत्ता, बिक्री और वित्तीय सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
उन्होंने महिलाओं को सुझाव दिया कि वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे GeM Portal और e-commerce मार्केट में भी लाएँ ताकि उनकी पहुंच देशभर तक हो सके।

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विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश का संबोधन – “महिलाओं की मेहनत से चमक रहा है गांव”

डॉ. धर्मेश ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सशक्त रीढ़ अब महिलाएं बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा —

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन में चल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं ने अपने जीवन को आत्मनिर्भर बनाया है। पहले जो महिलाएं घरों तक सीमित थीं, वे अब ‘लखपति दीदी’ बनकर गांव की पहचान बन रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को न केवल प्रशिक्षण और ऋण सहायता दी जा रही है, बल्कि उन्हें ‘उद्यमी’ बनाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग दे रही है।
उन्होंने उपस्थित जनता से अपील की कि वे दीपावली के अवसर पर इन महिलाओं की स्टॉलों से खरीदारी करें, ताकि उनके हुनर को सम्मान और बाजार दोनों मिलें।

मंडलायुक्त का संदेश – “सशक्त महिला ही सशक्त समाज की नींव है”

मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण ही वास्तविक विकास की पहचान है।
उन्होंने कहा —

“प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी जी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं कि हर महिला आत्मनिर्भर बने। जब महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी, तभी हमारा देश वास्तव में ‘विकसित भारत’ बनेगा।”

उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान दें, नई तकनीक अपनाएँ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में कदम बढ़ाएँ।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से उन्हें बैंकिंग सुविधा, प्रशिक्षण और विपणन समर्थन लगातार मिलता रहेगा।

टूलकिट वितरण – आत्मनिर्भरता की ओर ठोस कदम

कार्यक्रम में उद्योग विभाग द्वारा टूल किट्स का वितरण भी किया गया, ताकि महिलाएं अपने व्यवसायों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि कर सकें।

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एनआरएलएम के अधिकारी ने बताया – “महिलाओं को बाजार से जोड़ना हमारा लक्ष्य”

डीसी एनआरएलएम राजन राय ने कहा कि इस मेले का उद्देश्य सिर्फ प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के उत्पादों को स्थायी बाजार से जोड़ने की पहल है।
उन्होंने कहा —

“हमारा मकसद है कि गांव की महिलाएं अब गांव तक सीमित न रहें। उनकी बनाई चीज़ें शहरों और विदेशों तक जाएँ। यह मेले उस सपने को साकार कर रहे हैं।”

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस अवसर पर सीडीओ श्रीमती प्रतिभा सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार, डीसी मनरेगा रामायण सिंह यादव, उपायुक्त उद्योग सोनाली, और विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डीसी एनआरएलएम ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।

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संक्षेप में: महिला शक्ति का उत्सव बना “मंडलीय सरस मेला–2025”

यह मेला न केवल एक आर्थिक गतिविधि है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी भावना और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक जीवंत कदम है।
यह उन महिलाओं का मंच है, जिन्होंने संघर्ष से सफलता की कहानी लिखी और आज समाज की प्रेरणा बन चुकी हैं।

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