कृषि विज्ञान केन्द्र बिचपुरी में खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2025 और फसल अवशेष प्रबंधन पर विशेष आयोजन
किसानों को दी गई आधुनिक खेती की तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक खेती का महत्व और पराली जलाने से होने वाले नुकसान पर विस्तृत चर्चा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 25 सितम्बर 2025
आगरा। कृषि विज्ञान केन्द्र, बिचपुरी में गुरुवार को आयोजित खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2025 और फसल अवशेष प्रबंधन योजनान्तर्गत एक दिवसीय गोष्ठी में किसानों को आधुनिक खेती से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं। इस गोष्ठी में जिले भर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीक, फसल प्रबंधन, मृदा परीक्षण, जैविक और प्राकृतिक खेती तथा फसल अवशेष (पराली) के सही प्रबंधन की दिशा में जागरूक करना था।
पराली जलाने से बचने पर विशेष बल
गोष्ठी के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने किसानों को बताया कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी नष्ट करता है।
मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह ने कहा:
“फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और भूमि बंजर बनने लगती है। अगर किसान इन अवशेषों को खाद बनाने या पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग करें तो उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलेगा।”
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस आदत को छोड़ें और नई तकनीकों के जरिए अवशेषों का सदुपयोग करें।
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मिट्टी परीक्षण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर
भारतीय किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष देवेन्द्र रावत ने कहा कि आज के समय में किसान जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता लगातार घट रही है।
उन्होंने कहा:
“किसानों को हर सीजन में अपने खेत की मिट्टी की जाँच करानी चाहिए। इससे उन्हें यह पता चलेगा कि उनकी भूमि में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और उसी हिसाब से वे खाद का प्रयोग कर सकते हैं। इससे फसल उत्पादन भी बढ़ेगा और लागत भी घटेगी।”
जैविक और प्राकृतिक खेती का महत्व
किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर रुख करें।
उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती ने किसानों की लागत बढ़ा दी है और फसलों की गुणवत्ता भी कम हो रही है। जैविक खेती न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखती है।
उन्होंने फसल अवशेषों के सही उपयोग पर जोर देते हुए कहा:
“अगर किसान पराली को खाद, बायोगैस या चारे के रूप में उपयोग करना शुरू कर दें तो पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा और किसानों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा।”
विभागीय योजनाओं से किसानों को लाभ
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशान्त पौनिया ने कहा कि सरकार किसानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ चला रही है। परंतु इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब किसान वैज्ञानिक तरीकों और नई तकनीकों को अपनाएँगे।
उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा:
“आज अगर हम तकनीकी खेती अपनाएँ तो न सिर्फ अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उन्नत और टिकाऊ खेती का रास्ता दिखा सकते हैं।”
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जागरूकता अभियान और समापन
गोष्ठी के अंत में उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार ने सभी किसानों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार किसानों के लिए नई योजनाएँ लागू कर रहा है और फसल अवशेष प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस मौके पर फसल अवशेष न जलाने और उसका सही उपयोग करने के संदेश के साथ एक प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
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कार्यक्रम में मौजूद रहे
गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशान्त पौनिया, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष देवेन्द्र रावत, किसान नेता मोहन सिंह चाहर, कृषि विभाग और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों के लिए मुख्य संदेश
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पराली जलाना बंद करें, इसका उपयोग खाद और अन्य कृषि कार्यों में करें।
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हर सीजन में मिट्टी की जाँच कराएँ और संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
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जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाएँ ताकि फसलों की गुणवत्ता और आय दोनों बढ़ें।
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सरकार की योजनाओं और वैज्ञानिकों की सलाह का लाभ उठाएँ।
- यह विस्तृत रिपोर्ट किसानों को न सिर्फ जागरूक करने के लिए है बल्कि यह भी दर्शाती है कि नई तकनीक, जिम्मेदारी और जागरूकता ही आधुनिक कृषि का भविष्य है।
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