आगरा में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब
आगरा में यमुना नदी का जलस्तर 152.40 मीटर तक पहुँचने की आशंका, प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों में अलर्ट जारी किया।
आगरा में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) –
आगरा, 20 अगस्त 2025।
आगरा जिले में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और वाटरवर्क्स पर 152.40 मीटर (खतरे के निशान) तक पहुँचने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए शहर और ग्रामीण इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
हथिनी कुंड और ओखला बैराज से छोड़ा गया पानी
अपर जलाधिकारी (वि./रा.) श्रीमती शुभांगी शुक्ला ने जानकारी दी कि:
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17 अगस्त को शाम 4 बजे हथिनी कुंड बैराज, सहारनपुर से 1,78,976 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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19 अगस्त को ओखला बैराज से 91,212 क्यूसेक पानी और गोकुल बैराज से 87,079 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
इसका सीधा असर आगरा की यमुना नदी के जलस्तर पर पड़ा है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 22 अगस्त तक वाटरवर्क्स पर जलस्तर 152.40 मीटर तक पहुँच सकता है, जो खतरे का निशान है।
प्रभावित क्षेत्र और गांव
तहसील सदर और फतेहाबाद में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है।
सदर तहसील में प्रभावित क्षेत्र:
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तनौरा
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नूरपुर
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कैलाश
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स्वामी बाग
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नगला बूढ़ी
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अमर विहार (दयालबाग)
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मोती महल
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कटरा वजीर खाँ
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रामबाग बस्ती
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अप्सरा टॉकीज
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यमुना किनारा रोड
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वेदांत मंदिर से फार्ट तक
फतेहाबाद तहसील में प्रभावित गांव:
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भरापुर
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बमरौली
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ईदौन
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भडायना
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मेवीकलॉ
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गुड़ा मेवली खुर्द
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हिमायूपुर
इन इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों से सतर्कता बरतने और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की अपील की गई है।
प्रशासन की अपील – क्या करें और क्या न करें
प्रशासन ने लोगों से बाढ़ की स्थिति में सावधानी और एहतियात बरतने की अपील की है।
जरूरी दस्तावेज और सामान
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राशन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज वॉटरप्रूफ बैग में रखें।
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प्राथमिक उपचार किट, ORS, क्लोरिन की गोलियां और दवाइयाँ तैयार रखें।
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सूखा अनाज और पशुओं के चारे को ऊँचे स्थान पर सुरक्षित रखें।
बाढ़ की स्थिति में सावधानी
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गर्भवती महिलाएं, बच्चे, वृद्ध, बीमार और दिव्यांगजन तुरंत बाढ़ शरणालयों में पहुँचें।
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केवल उबला हुआ या क्लोरिन युक्त पानी पिएं।
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बिजली का मुख्य स्विच और गैस रेगुलेटर बंद रखें।
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बाढ़ के पानी में डूबी खाद्य सामग्री का सेवन न करें।
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डूबे हैंडपंप का पानी न इस्तेमाल करें।
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नदी या नालों के किनारे जाने से बचें।
बाढ़ शरणालय और राहत केंद्र
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए तहसीलों में बाढ़ शरणालय बनाए हैं।
यहां लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित ठहराने और भोजन-पानी की व्यवस्था की जाएगी।
राजस्व विभाग के अधिकारियों को गांव-गांव जाकर स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को शरणालयों तक शिफ्ट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम
जनपद स्तर पर 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम बनाया गया है। किसी भी आपात स्थिति में लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
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0562-2260550
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9458095419
यमुना का बदलता जलस्तर और आगरा पर असर
आगरा शहर हमेशा से यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। जैसे ही पहाड़ों में बारिश होती है और हथिनी कुंड व अन्य बैराज से पानी छोड़ा जाता है, आगरा पर सीधा असर पड़ता है।
पिछले कुछ सालों में बाढ़ का खतरा टला जरूर है, लेकिन हर बार खतरे के निशान के आसपास जलस्तर पहुँचने से हजारों लोग प्रभावित होते हैं। खासकर निचले इलाकों के घरों में पानी घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
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ग्रामीण इलाकों की चिंता
फतेहाबाद और आसपास के गांवों में किसान चिंतित हैं। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने का खतरा है। वहीं, पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित ठिकाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती है।
ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बाढ़ राहत सामग्री, पशुओं के लिए अस्थायी शरण और मेडिकल टीम तुरंत गांवों में पहुंचाई जाए।
समाजसेवी संगठनों की भूमिका
बाढ़ जैसी आपदाओं में प्रशासन के साथ-साथ समाजसेवी संगठन भी आगे आते रहे हैं। इस बार भी स्थानीय NGOs और युवा समूह राहत कार्यों में सहयोग के लिए तैयार हैं।
युवा स्वयंसेवक प्रभावित गांवों में जाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और भोजन वितरण जैसी सेवाओं में भाग ले रहे हैं।
निष्कर्ष
यमुना नदी का जलस्तर बढ़कर वाटरवर्क्स पर 152.40 मीटर तक पहुँचने की संभावना प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय है। जिला प्रशासन ने गांव-गांव अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
प्रशासन, सिंचाई विभाग और राजस्व अधिकारियों की लगातार निगरानी के बीच उम्मीद है कि समय रहते राहत और बचाव कार्यों से स्थिति पर काबू पाया जा सकेगा।
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