आगरा में मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा, राहत शिविरों की व्यवस्थाओं की समीक्षा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 9 सितंबर 2025।
यमुना नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति ने आगरा शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में आम जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। ऐसे हालात में मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने सोमवार को बाढ़ राहत केंद्रों और प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने खुद मौके पर पहुंचकर न केवल पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, बल्कि अधिकारियों को राहत और पुनर्वास कार्यों को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए।
राहत केंद्रों में रह रहे परिवारों से मुलाकात

मंडलायुक्त का पहला पड़ाव बल्केश्वर स्थित आईटीआई कॉलेज रहा। यहां पिछले तीन दिनों से रजवाड़ा क्षेत्र और सरस्वती नगर के करीब 150 बाढ़ प्रभावित लोग रह रहे हैं।
इन परिवारों के घरों में यमुना नदी का पानी भर गया है, जिसके चलते उनका जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। मंडलायुक्त ने राहत शिविर का जायजा लेते हुए महिलाओं और बच्चों से सीधे संवाद किया। उन्होंने पूछा कि क्या भोजन और पेयजल की आपूर्ति सही ढंग से हो रही है। प्रभावित परिवारों ने बताया कि प्रशासन द्वारा फिलहाल रहने और खाने-पीने की उचित व्यवस्था की गई है।
मौके पर क्षेत्रीय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, पार्षदगण और कई सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे जो राहत सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहे थे।
कैलाश घाट और मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था

इसके बाद मंडलायुक्त कैलाश गांव और कैलाश मंदिर परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने यमुना घाट पर बढ़ते पानी का स्तर देखा और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी हाल में आम नागरिकों को घाट या जलमग्न गलियों की ओर न जाने दिया जाए।
उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर का भी निरीक्षण किया और व्यवस्था को और मजबूत करने के आदेश दिए।
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किसानों की फसलें जलमग्न, होगा नुकसान का आंकलन

निरीक्षण के अगले चरण में मंडलायुक्त तहसील किरावली के ग्राम नगला सोमनाथ पहुंचे। यहां बाढ़ के कारण किसानों की हजारों हेक्टेयर फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। मंडलायुक्त स्वयं ट्रैक्टर पर सवार होकर खेतों तक पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
उन्होंने किसानों की पीड़ा को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि एक विशेष टीम गठित कर नुकसान का सही आकलन कराया जाएगा। साथ ही किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने यह भी कहा कि बारिश और बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। साथ ही भरतपुर की ओर से आने वाले अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए बांध और नहर व्यवस्था पर भी विशेष कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन अलर्ट मोड पर

इस निरीक्षण अभियान में मंडलायुक्त के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे जिनमें एडीएम वित्त व राजस्व शुभांगी शुक्ला, एसडीएम किरावली नीलम तिवारी, नायब तहसीलदार अनिल चौधरी, तहसील सदर और किरावली की राजस्व टीम शामिल रही।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राहत और बचाव कार्यों की निगरानी 24 घंटे की जा रही है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन और बचाव दल मौजूद हैं।
मानवीय पहलू और प्रशासन का भरोसा

मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि इससे प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता स्पष्ट झलकी।
राहत केंद्रों में प्रभावित लोगों से बातचीत करना, बच्चों के स्वास्थ्य और महिलाओं की जरूरतों पर ध्यान देना, किसानों की फसल क्षति का आकलन करना और सड़कों के जीर्णोद्धार का भरोसा देना—यह सब दर्शाता है कि प्रशासन बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ा है।
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