खेरागढ़ में व्यापारी संवाद कार्यक्रम बना व्यापारियों की आवाज का मंच, जीएसटी 2.0 के नए नियमों के साथ पेंशन और स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग भी हुई मुखर

राज्य कर विभाग और व्यापारियों के बीच सीधा संवाद, जीएसटी सुधारों, डिजिटल प्रक्रियाओं और व्यापारी कल्याण योजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)

खेरागढ़/आगरा। 07-06-2026
व्यापार जगत और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा बदलती कर व्यवस्था के प्रति व्यापारियों को जागरूक करने के उद्देश्य से खेरागढ़ स्थित राधा पैलेस में राज्य कर विभाग (खंड-8) द्वारा आयोजित ‘व्यापारी संवाद कार्यक्रम’ चर्चा, सुझाव और समाधान का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों व्यापारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और व्यापार मंडल पदाधिकारियों ने भाग लेकर न केवल जीएसटी 2.0 के नए नियमों की जानकारी प्राप्त की, बल्कि अपनी समस्याओं और मांगों को भी अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से रखा।

कार्यक्रम का उद्देश्य व्यापारियों को नई कर व्यवस्था के प्रति जागरूक करना, विभागीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा व्यापारियों और राज्य कर विभाग के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करना था। कार्यक्रम के दौरान व्यापारियों ने कर प्रणाली से जुड़े तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की, वहीं अधिकारियों ने भी नई व्यवस्थाओं को विस्तार से समझाया।

बदलते समय के साथ बदल रही है कर व्यवस्था

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर (खंड-8) अनुराग चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में व्यापारिक गतिविधियां तेजी से डिजिटल हो रही हैं और इसी के अनुरूप कर प्रणाली को भी आधुनिक बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है तथा अब जीएसटी 2.0 के माध्यम से इसे और अधिक सरल, तकनीकी रूप से सक्षम तथा व्यापारी हितैषी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य व्यापारियों को अधिकतम सुविधा प्रदान करना और अनुपालन की प्रक्रिया को आसान बनाना है ताकि छोटे और मध्यम व्यापारियों को भी किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

ई-इन्वॉइसिंग और डिजिटल अनुपालन पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण

कार्यक्रम में ई-इन्वॉइसिंग प्रणाली पर विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल बिलिंग प्रणाली अपनाने से व्यापारियों को न केवल रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी, बल्कि कर संबंधी त्रुटियों और विवादों की संभावना भी काफी हद तक कम होगी।

व्यापारियों को समझाया गया कि ई-इन्वॉइसिंग के माध्यम से—

  • कारोबार का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित रहेगा।
  • कर विवरणी तैयार करने में कम समय लगेगा।
  • डेटा की पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • भविष्य में जांच या सत्यापन की स्थिति में कठिनाई नहीं होगी।

साथ ही व्यापारियों को जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध नई सुविधाओं, ऑनलाइन सेवाओं और तकनीकी सुधारों के बारे में भी जानकारी दी गई।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के नियमों पर हुई विस्तार से चर्चा

जीएसटी प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। कार्यक्रम में अधिकारियों ने आईटीसी क्लेम से जुड़े नवीनतम नियमों और सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी।

व्यापारियों को बताया गया कि गलत दस्तावेज, अपूर्ण जानकारी या समय पर रिटर्न दाखिल न करने की स्थिति में आईटीसी का लाभ प्रभावित हो सकता है। इसलिए सभी व्यापारियों को दस्तावेजों की शुद्धता और समयबद्ध अनुपालन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

अधिकारियों ने कहा कि जागरूक व्यापारी न केवल अपने व्यवसाय को सुरक्षित रख सकता है बल्कि कर संबंधी अनावश्यक विवादों से भी बच सकता है।

मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान डिप्टी कमिश्नर (खंड-14) राहुल कुमार द्विवेदी ने मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार व्यापारियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारियों को 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है और इसके लिए किसी भी प्रकार का प्रीमियम भुगतान नहीं करना पड़ता।

उन्होंने कहा कि अनेक व्यापारी अभी भी इस योजना की जानकारी से वंचित हैं, इसलिए विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है ताकि अधिक से अधिक व्यापारी इसका लाभ उठा सकें।

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व्यापारियों ने खुलकर रखीं अपनी समस्याएं

संवाद सत्र के दौरान व्यापारियों ने कर विभाग के अधिकारियों के सामने जीएसटी से जुड़ी विभिन्न समस्याएं और सुझाव रखे। व्यापारियों ने रिटर्न फाइलिंग, तकनीकी दिक्कतों, नोटिसों की प्रक्रिया, पोर्टल संचालन तथा छोटे व्यापारियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपनी बात रखी।

विशेष बात यह रही कि अधिकारियों ने सभी प्रश्नों को गंभीरता से सुना और अधिकांश मामलों में मौके पर ही समाधान प्रस्तुत किया।

व्यापारियों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से विभाग और व्यापारियों के बीच दूरी कम होती है तथा समस्याओं का समाधान भी तेजी से हो पाता है।

पेंशन योजना और स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग बनी प्रमुख मुद्दा

कार्यक्रम में व्यापारियों ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने कहा कि व्यापारी वर्ग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और नियमित रूप से कर का भुगतान करता है, इसलिए उनके लिए भी दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की जानी चाहिए।

व्यापारियों ने मांग की कि—

  • नियमित करदाताओं को पेंशन सुविधा प्रदान की जाए।
  • सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
  • वरिष्ठ व्यापारियों के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएं।
  • छोटे व्यापारियों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के लिए अलग नीति बनाई जाए।

व्यापारियों का कहना था कि व्यवसाय में आर्थिक जोखिम अधिक होता है, ऐसे में भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार को विशेष योजनाएं लागू करनी चाहिए।

व्यापारियों ने किया विभागीय पहल का स्वागत

कार्यक्रम में उपस्थित व्यापारियों ने राज्य कर विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संवाद आधारित व्यवस्था से व्यापारियों का विश्वास बढ़ता है और विभागीय प्रक्रियाओं को समझना आसान होता है।

व्यापारियों ने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाएं ताकि नई नीतियों और नियमों की जानकारी सीधे व्यापारियों तक पहुंच सके।

कर अनुपालन को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार

अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि ईमानदार कर भुगतान केवल कानूनी दायित्व नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में सहभागिता भी है। कर से प्राप्त राजस्व का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास कार्यों में किया जाता है।

उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे सभी नियमों का पालन करें, समय पर रिटर्न दाखिल करें और डिजिटल प्रणाली को अपनाकर पारदर्शी व्यापार व्यवस्था को मजबूत बनाएं।

बड़ी संख्या में व्यापारी और गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में व्यापार मंडल के संरक्षक सतीश गोयल, अध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोपाल भाकरिया, महामंत्री संजय मित्तल, कोषाध्यक्ष नरेंद्र जिंदल, अग्रवाल समाज के अध्यक्ष राजकुमार मंगल, अधिवक्ता मुन्नालाल बंसल, मनीष बंसल, राहुल गोयल, धर्मेंद्र वर्मा, कृष्णा पंसारी, रामचरण अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

व्यापार और प्रशासन के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

खेरागढ़ में आयोजित यह व्यापारी संवाद कार्यक्रम केवल जीएसटी की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापारियों की समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सुनने का प्रभावी मंच भी बना। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब प्रशासन और व्यापारी एक साथ बैठकर संवाद करते हैं, तो समस्याओं के समाधान के साथ-साथ विकास और विश्वास के नए रास्ते भी खुलते हैं।

व्यापारियों ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और कर व्यवस्था अधिक सरल एवं पारदर्शी बन सकेगी।

 

 

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