Agra Breaking News: डायट आगरा में डीएलएड बैच 2025-27 का दीक्षारंभ कार्यक्रम, प्रशिक्षुओं को आदर्श शिक्षक बनने की प्रेरणा
डायट आगरा में डीएलएड बैच 2025-27 के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित हुआ। शिक्षाविदों ने प्रशिक्षुओं को शिक्षक जीवन की जिम्मेदारियों, अनुशासन और शिक्षण के महत्व के बारे में बताया।

डायट आगरा में डीएलएड बैच 2025-27 के लिए दीक्षारंभ संस्कार कार्यक्रम आयोजित, प्रशिक्षुओं को आदर्श शिक्षक बनने की दी गई प्रेरणा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 10 मार्च 2026
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में नव प्रवेशित डीएलएड बैच 2025-27 के प्रशिक्षुओं के लिए दीक्षारंभ संस्कार कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नए प्रशिक्षुओं का औपचारिक स्वागत करना, उन्हें शिक्षक प्रशिक्षण की प्रक्रिया से अवगत कराना तथा उन्हें एक आदर्श शिक्षक बनने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ शिक्षाविदों ने अपने विचार साझा करते हुए प्रशिक्षुओं को शिक्षण की मूल भावना, जिम्मेदारियों और आदर्शों के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आरवीएस कॉलेज आगरा के प्रोफेसर बसंत बहादुर सिंह, सेंट जॉन्स कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रोफेसर सैमुअल स्टेनली तथा प्राचार्य डायट आगरा अनिरुद्ध यादव द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में नवप्रवेशित सभी डीएलएड प्रशिक्षुओं का तिलक लगाकर और पुष्प भेंट कर स्वागत किया गया, जिससे पूरे सभागार में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला।
विद्यार्थी से शिक्षक बनने की यात्रा का पहला कदम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर बसंत बहादुर सिंह ने कहा कि डीएलएड प्रशिक्षण केवल एक शैक्षणिक पाठ्यक्रम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार शिक्षक के रूप में तैयार करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि अब सभी प्रशिक्षु विद्यार्थी से शिक्षक बनने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अध्यापक, शिक्षक और गुरु तीनों शब्दों का अपना अलग महत्व है और एक शिक्षक को इन तीनों भूमिकाओं को समझते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। एक शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं होता बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसलिए प्रशिक्षुओं को अपने व्यक्तित्व, व्यवहार और ज्ञान को निरंतर विकसित करना चाहिए।
शिक्षक ही चाहता है कि उसका विद्यार्थी उससे आगे बढ़े

इस अवसर पर सेंट जॉन्स कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रोफेसर सैमुअल स्टेनली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता के बाद शिक्षक ही ऐसा व्यक्ति होता है जो अपने से छोटे को अपने से बड़ा और सफल देखना चाहता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहा कि उन्हें अपने शिक्षण कौशल, ज्ञान और सकारात्मक सोच के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि हमें केवल इतिहास पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बल्कि इतिहास बदलने वाला शिक्षक बनने का संकल्प लेना चाहिए।
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शिक्षण एक कला है, अनुशासन और स्वाध्याय जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डायट आगरा अनिरुद्ध यादव ने कहा कि शिक्षण अपने आप में एक कला है और इस कला को सीखने के लिए निरंतर अभ्यास, अध्ययन और अनुशासन की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि एक आदर्श शिक्षक वही होता है जिसे उसके विद्यार्थी जीवन भर याद रखते हैं। शिक्षक का व्यक्तित्व, उसका व्यवहार और उसका ज्ञान विद्यार्थियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है।
प्राचार्य ने प्रशिक्षुओं से कहा कि स्वाध्याय, अनुशासन और समयबद्धता शिक्षक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। यदि कोई प्रशिक्षु इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाता है तो वह निश्चित रूप से एक सफल और आदर्श शिक्षक बन सकता है।
डायट की कार्यप्रणाली और योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान सेवा पूर्व प्रभारी यशवीर सिंह ने प्रशिक्षुओं को डायट के विभिन्न विभागों, प्रशिक्षण की रूपरेखा तथा शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि डायट केवल शिक्षक प्रशिक्षण देने वाला संस्थान ही नहीं है बल्कि यह शैक्षिक अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र भी है। यहां प्रशिक्षुओं को आधुनिक शिक्षण विधियों, शैक्षिक तकनीकों और विद्यालयी गतिविधियों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
अनुशासन, नियमितता और समयबद्धता पर दिया गया विशेष जोर
कक्षा अध्यापक हिमांशु सिंह और कल्पना सिन्हा ने प्रशिक्षुओं को डायट की कार्यशैली, प्रशिक्षण कार्यक्रम, उपस्थिति नियम और संस्थान की कार्यपद्धति के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान नियमित उपस्थिति, समय का पालन और अनुशासन का विशेष महत्व है। यदि प्रशिक्षु इन नियमों का पालन करते हैं तो वे अपने प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
शिक्षकों और स्टाफ का रहा महत्वपूर्ण सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में डायट के अनेक शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में प्रवक्ता अनिल कुमार, डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, संजीव कुमार सत्यार्थी, पुष्पेंद्र सिंह, रंजना पांडे, यशपाल सिंह, रचना यादव, अबु मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम और डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता सहित समस्त डायट स्टाफ उपस्थित रहा।
कार्यक्रम का संचालन सेवा पूर्व प्रभारी एवं प्रवक्ता यशवीर सिंह द्वारा किया गया।
शिक्षक प्रशिक्षण से समाज निर्माण की दिशा
दीक्षारंभ कार्यक्रम के माध्यम से नवप्रवेशित प्रशिक्षुओं को यह संदेश दिया गया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं बल्कि समाज निर्माण का महत्वपूर्ण आधार होता है। एक अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, नैतिकता और जिम्मेदारी का भी पाठ पढ़ाता है।
इस प्रेरणादायक कार्यक्रम के माध्यम से डीएलएड प्रशिक्षुओं को अपने भविष्य के शिक्षक जीवन के प्रति प्रेरित किया गया, ताकि वे आने वाले समय में समाज और राष्ट्र के लिए योग्य, संवेदनशील और प्रेरणादायक शिक्षक बन सकें।
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