आगरा के शिक्षक अजय कुमार शर्मा ने बढ़ाया जनपद का गौरव, NCERT की कक्षा 4 की पुस्तक के कस्टमाइजेशन हेतु हुए चयनित
शिक्षा में नवाचार की दिशा में बड़ा कदम, प्रयागराज के राज्य शिक्षा संस्थान में 5 दिवसीय कार्यशाला में दिया योगदान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा / पिनाहट।
आगरा जनपद के पिनाहट ब्लॉक के संविलियन विद्यालय टोड़ा में कार्यरत सहायक अध्यापक (विज्ञान) अजय कुमार शर्मा ने शिक्षा जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनका चयन NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) द्वारा आयोजित कक्षा 4 की नवविकसित पर्यावरण अध्ययन (EVS) की पुस्तक “हमारा अद्भुत संसार” के उत्तर प्रदेश परिप्रेक्ष्य में कस्टमाइजेशन कार्यशाला के लिए किया गया।
यह कार्यशाला राज्य शिक्षा संस्थान, प्रयागराज (SIET-UP) के सहयोग से 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर के चुनिंदा शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
स्थानीय संदर्भों को जोड़ने की अनोखी पहल
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर तैयार की गई नई पुस्तक को उत्तर प्रदेश की भौगोलिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षिक परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करना था।
अजय कुमार शर्मा ने अपनी टीम के साथ पुस्तक की पाँच प्रमुख इकाइयों पर कार्य किया —
- हमारा समुदाय
- हमारे परिवेश में जीवन
- स्वास्थ्य एवं आरोग्य
- हमारे आस-पास की वस्तुएं
- हमारा पर्यावरण
इन इकाइयों में शामिल 10 अध्यायों का पुनर्लेखन और अनुकूलन (customization) इस प्रकार किया गया कि बच्चे अपनी स्थानीय जीवनशैली, परिवेश, संस्कृति और अनुभवों से जुड़कर सीख सकें।
उदाहरण के लिए — जहाँ पुस्तक में पहले “पहाड़ी इलाकों के जीवन” का संदर्भ था, वहीं उत्तर प्रदेश के सन्दर्भ में गंगा-यमुना के दोआब, खेती-किसानी, स्थानीय मेलों, ग्राम्य जीवन और संवेदनशील पर्यावरणीय मुद्दों को शामिल किया गया।
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विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ बौद्धिक विमर्श
कार्यशाला के दौरान राज्य शिक्षा संस्थान की कार्यक्रम प्रभारी डॉ. दीपा सिंह ने सभी प्रतिभागियों को नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के सिद्धांतों से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि अब पाठ्यक्रम केवल सैद्धांतिक नहीं रहेगा, बल्कि अनुभवात्मक और बालकेंद्रित शिक्षण पद्धति पर आधारित होगा।
शिक्षक अजय कुमार शर्मा ने टीम के सदस्यों पंकज कुमार, प्रदीप कुमार, गौरव सिंह और महेश कुमार के साथ मिलकर इस कार्यशाला में सक्रिय भूमिका निभाई।
इन विशेषज्ञों का मार्गदर्शन डॉ. पूनम सिंह, संतोष कुमार यादव और दयाशंकर जैसे वरिष्ठ शिक्षा शोधकर्ताओं ने किया।
कार्यशाला में यह भी विचार किया गया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए चित्र, उदाहरण और गतिविधियाँ स्थानीय स्तर पर समझने योग्य हों, जिससे उनका आत्मविश्वास और जिज्ञासा बढ़े।
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शिक्षक की प्रतिबद्धता और नवाचार भावना
अजय कुमार शर्मा ने कहा —
“यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि मुझे अपने राज्य और जिले का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। यह कार्यशाला न केवल एक शिक्षण अनुभव थी बल्कि बच्चों की शिक्षा को अधिक स्थानीय और उपयोगी बनाने की दिशा में एक जिम्मेदारी भी थी। हमने कोशिश की है कि किताब में हर बच्चा खुद को और अपने आसपास की दुनिया को देख सके।”
उनकी इस सोच से साफ झलकता है कि अब शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जीवन के अनुभवों से जुड़ी होनी चाहिए।
सम्मान और प्रेरणा का क्षण
कार्यशाला के समापन समारोह में राज्य शिक्षा संस्थान प्रयागराज के प्राचार्य ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास शिक्षा को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी और बालक-हितैषी बनाने में अत्यंत सहायक हैं।
उन्होंने विशेष रूप से आगरा के शिक्षक अजय कुमार शर्मा की समर्पण भावना और शैक्षिक दृष्टिकोण की सराहना की, और कहा कि ऐसे शिक्षक आने वाले समय में शिक्षा नीति के वास्तविक वाहक बनेंगे।
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आगरा की शिक्षा जगत में नई पहचान
आगरा जनपद पहले ही मिशन प्रेरणा और समग्र शिक्षा अभियान में कई नवाचारों के लिए जाना जाता है।
अब अजय कुमार शर्मा का चयन यह दर्शाता है कि आगरा के शिक्षक न केवल शिक्षण कार्य में कुशल हैं, बल्कि शैक्षिक नवाचार, पाठ्यक्रम विकास और अनुसंधान गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
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